गोवा चुनाव से पहले AAP-GFP का बड़ा गठबंधन, ‘गोवा फर्स्ट’ के जरिए भाजपा-कांग्रेस को चुनौती
गोवा विधानसभा चुनाव 2027 से पहले AAP और GFP ने ‘गोवा फर्स्ट’ गठबंधन का ऐलान किया। अरविंद केजरीवाल ने भाजपा और कांग्रेस पर निशाना साधते हुए इसे जनता का नया विकल्प बताया।


पणजी/नई दिल्ली। गोवा विधानसभा चुनाव 2027 से पहले राज्य की राजनीति में बड़ा सियासी बदलाव सामने आया है। आम आदमी पार्टी (AAP) के राष्ट्रीय संयोजक अरविंद केजरीवाल ने रविवार को विजय सरदेसाई के नेतृत्व वाली गोवा फॉरवर्ड पार्टी (GFP) के साथ गठबंधन का ऐलान किया। दोनों दलों के इस नए राजनीतिक गठबंधन को ‘गोवा फर्स्ट’ (Goa First) नाम दिया गया है।
अरविंद केजरीवाल ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X के जरिए गठबंधन की घोषणा करते हुए इसे गोवा की जनता के सामने एक ‘असली राजनीतिक विकल्प’ बताया। गठबंधन का लक्ष्य आगामी विधानसभा चुनाव में भाजपा और कांग्रेस के बीच सियासी मुकाबले के बीच अपनी मजबूत जगह बनाना और सरकार बनाने का दावा पेश करना है।
केजरीवाल का भाजपा-कांग्रेस पर हमला
गठबंधन की घोषणा के साथ ही अरविंद केजरीवाल ने भाजपा और कांग्रेस पर तीखा निशाना साधा। उन्होंने आरोप लगाया कि गोवा की जनता को चुनावों के बाद बार-बार राजनीतिक धोखे का सामना करना पड़ा है।
केजरीवाल के मुताबिक चुनाव के दौरान भाजपा और कांग्रेस एक-दूसरे के खिलाफ लड़ती हुई दिखाई देती हैं, लेकिन चुनाव परिणाम आने के बाद राजनीतिक समीकरण बदल जाते हैं। उन्होंने आरोप लगाया कि दोनों दल बंद दरवाजों के पीछे बातचीत करते हैं और सरकार बनाने के लिए एक-दूसरे की मदद करते हैं।
केजरीवाल ने कहा कि गोवा की जनता को अब तीसरी बार ऐसे राजनीतिक समीकरण का शिकार नहीं होने दिया जाएगा। उन्होंने दावा किया कि ‘गोवा फर्स्ट’ गठबंधन प्रदेश की राजनीति में एक अलग और भरोसेमंद विकल्प पेश करेगा।
‘गोवा फर्स्ट’ का क्या है लक्ष्य?
AAP और GFP के गठबंधन का मुख्य नारा ‘गोवा फर्स्ट’ रखा गया है। गठबंधन नेताओं का कहना है कि गोवा की राजनीति में ऐसा विकल्प जरूरी है जो सत्ता की राजनीति के बजाय राज्य और उसके लोगों के हितों को प्राथमिकता दे।
केजरीवाल ने कहा कि गोवा की जनता लंबे समय से भाजपा और कांग्रेस के बीच विकल्प चुनने के लिए मजबूर रही है। उनके मुताबिक ‘गोवा फर्स्ट’ गठबंधन जनता को तीसरा मजबूत विकल्प देने की कोशिश करेगा।
उन्होंने यह भी दावा किया कि गठबंधन केवल चुनाव लड़ने तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि सत्ता में आने की स्थिति में ईमानदार, स्थिर और जवाबदेह सरकार देने का प्रयास करेगा।
कांग्रेस को गठबंधन से रखा गया बाहर
फिलहाल ‘गोवा फर्स्ट’ गठबंधन में कांग्रेस को शामिल नहीं किया गया है। उपलब्ध जानकारी के मुताबिक AAP और GFP के बीच गठबंधन को लेकर बातचीत आगे बढ़ी, लेकिन कांग्रेस के साथ व्यापक गठबंधन को लेकर सहमति नहीं बन सकी।
कांग्रेस के कुछ विधायकों के अतीत में भाजपा में शामिल होने के मुद्दे को भी इस राजनीतिक दूरी की एक वजह के तौर पर देखा जा रहा है। AAP और GFP नेताओं की ओर से संकेत दिया गया है कि भविष्य में भाजपा को चुनौती देने के लिए समान विचारधारा वाले धर्मनिरपेक्ष दलों के साथ सहयोग के रास्ते खुले रहेंगे।
विजय सरदेसाई की भूमिका अहम
गोवा फॉरवर्ड पार्टी के प्रमुख विजय सरदेसाई राज्य की राजनीति में एक महत्वपूर्ण क्षेत्रीय चेहरा हैं। ऐसे में GFP के साथ गठबंधन से AAP को स्थानीय स्तर पर संगठन और राजनीतिक आधार मजबूत करने में मदद मिलने की उम्मीद है।
वहीं, GFP के लिए AAP के साथ गठबंधन राष्ट्रीय स्तर पर मजबूत राजनीतिक नेटवर्क और संसाधनों तक पहुंच का अवसर माना जा रहा है। दोनों दल मिलकर 2027 के चुनाव में भाजपा के साथ-साथ कांग्रेस के सामने भी चुनौती पेश करने की रणनीति पर काम कर सकते हैं।
2027 में त्रिकोणीय मुकाबले के आसार
गोवा विधानसभा चुनाव 2027 में अभी समय है, लेकिन ‘गोवा फर्स्ट’ के ऐलान ने राज्य की चुनावी राजनीति को नया मोड़ दे दिया है। भाजपा जहां सत्ता बरकरार रखने की कोशिश करेगी, वहीं कांग्रेस भी अपने राजनीतिक आधार को मजबूत करने की तैयारी में रहेगी।
अब AAP और GFP के गठबंधन के सामने चुनौती यह होगी कि वह अपने राजनीतिक संदेश को जमीनी स्तर तक कैसे पहुंचाता है और कितनी सीटों पर प्रभावी संगठन खड़ा कर पाता है।
‘गोवा फर्स्ट’ का ऐलान ऐसे समय हुआ है जब राज्य में 2027 के विधानसभा चुनाव को लेकर राजनीतिक दलों ने अपनी रणनीतियां तैयार करना शुरू कर दिया है। आने वाले महीनों में सीट बंटवारे, उम्मीदवारों और अन्य दलों के साथ संभावित गठबंधन को लेकर तस्वीर और साफ होने की उम्मीद है।

