Dindori: अमृत 2.0 योजना में अनियमितताओं का खुलासा, डिंडौरी जलाशय परियोजना पर जांच तेज
डिंडौरी में अमृत 2.0 योजना के तहत 68 लाख रुपये की जलाशय सौंदर्यीकरण परियोजना की अंतरिम जांच में तकनीकी और वित्तीय अनियमितताएं सामने आई हैं। कई अधिकारियों की विभागीय जांच और थर्ड पार्टी ऑडिट की सिफारिश की गई है।


डिंडौरी। नगर परिषद डिंडौरी में अमृत 2.0 योजना के तहत पुरानी डिंडौरी जलाशय के सौंदर्यीकरण कार्य में कथित तकनीकी और वित्तीय अनियमितताओं का मामला सामने आया है। कलेक्टर अंजू पवन भदौरिया द्वारा गठित तीन सदस्यीय जांच दल की अंतरिम रिपोर्ट में परियोजना के क्रियान्वयन के दौरान गंभीर लापरवाही और नियमों के उल्लंघन की बात कही गई है। रिपोर्ट के आधार पर संबंधित अधिकारियों की भूमिका की जांच और आगे की कार्रवाई की तैयारी शुरू हो गई है।
जांच रिपोर्ट के अनुसार वर्ष 2024-25 में 68 लाख रुपये की लागत से स्वीकृत इस परियोजना पर अब तक करीब 42 लाख रुपये खर्च किए जा चुके हैं। जांच के दौरान पाया गया कि वार्ड क्रमांक 12 और 13 के पास तालाब के भीतर ही सीवर लाइन और मेनहोल का निर्माण कर दिया गया। इसके अलावा सीवेज ट्रीटमेंट प्लांट (एसटीपी) के प्रभावी ढंग से संचालित नहीं होने के कारण दूषित पानी सीधे जलाशय में पहुंच रहा है, जिससे जल की गुणवत्ता और भंडारण क्षमता प्रभावित हो रही है।
अंतरिम रिपोर्ट में नगर परिषद, एमपीयूडीसी और जल संसाधन विभाग की कार्यप्रणाली पर भी सवाल उठाए गए हैं। जांच दल के अनुसार परियोजना के लिए आवश्यक एनओसी और तकनीकी स्वीकृतियां समय पर प्राप्त नहीं की गईं। साथ ही अतिक्रमण नहीं हटाने और निर्माण कार्य में बरती गई लापरवाही के कारण परियोजना का मूल उद्देश्य प्रभावित हुआ।
जांच दल ने तत्कालीन सीएमओ अमित तिवारी, इंजीनियर शिवराज बघेल, तहसीलदार आर.पी. मार्को, राजस्व निरीक्षक हेमंत उइके, पटवारी बलिराम भवेदी सहित अन्य संबंधित अधिकारियों की भूमिका की विभागीय जांच कराने की अनुशंसा की है। इसके अलावा पूरे मामले का थर्ड पार्टी ऑडिट कराने और आरोप सिद्ध होने की स्थिति में आर्थिक अपराध प्रकोष्ठ (EOW) या लोकायुक्त से एफआईआर दर्ज कराने की भी सिफारिश की गई है।
इधर आरटीआई कार्यकर्ता सतीश शिवात्री ने अंतरिम जांच रिपोर्ट सामने आने के बावजूद कार्रवाई में हो रही देरी पर सवाल उठाए हैं। वहीं कलेक्टर अंजू पवन भदौरिया ने कहा कि जांच दल ने फिलहाल अंतरिम रिपोर्ट प्रस्तुत की है। अंतिम रिपोर्ट मिलने के बाद तथ्यों के आधार पर दोषियों के खिलाफ नियमानुसार सख्त कार्रवाई करते हुए प्रतिवेदन राज्य शासन को भेजा जाएगा।
