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बड़वानी जिला अस्पताल के सिविल सर्जन पर महिला कर्मचारी ने लगाए छेड़छाड़ और प्रताड़ना के आरोप, FIR दर्ज

डॉ. मनोज खन्ना के खिलाफ महिला थाने में मामला दर्ज; छुट्टी, वेतन और उपस्थिति को लेकर भी विवाद, अधिकारी ने आरोपों को बताया निराधार

अशोक शर्मा
अशोक शर्मा
Sub Editor · अभी अभी
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बड़वानी जिला अस्पताल के सिविल सर्जन पर महिला कर्मचारी ने लगाए छेड़छाड़ और प्रताड़ना के आरोप, FIR दर्ज

बड़वानी। मध्यप्रदेश के बड़वानी जिला चिकित्सालय में कार्यरत एक महिला कर्मचारी ने सिविल सर्जन डॉ. मनोज खन्ना के खिलाफ छेड़छाड़, मानसिक प्रताड़ना, अनुचित व्यवहार और पद के दुरुपयोग के आरोप लगाए हैं। महिला की शिकायत पर बड़वानी महिला थाना पुलिस ने प्रकरण दर्ज कर जांच शुरू कर दी है। वहीं, संबंधित अधिकारी ने महिला के आरोपों को निराधार बताते हुए उसकी उपस्थिति और कार्यशैली पर सवाल उठाए हैं। फिलहाल मामले में लगाए गए आरोपों की पुष्टि होना बाकी है।

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पुलिस के अनुसार, महिला कर्मचारी की शिकायत पर भारतीय न्याय संहिता (BNS) की धारा 74, 75 और 78 के तहत प्रकरण दर्ज किया गया है। शिकायतकर्ता का कहना है कि उन्होंने इस मामले में कलेक्टर सहित वरिष्ठ अधिकारियों को भी आवेदन दिए थे। महिला ने 3 सितंबर को महिला थाना सेल पहुंचकर एफआईआर दर्ज करने की मांग भी की थी।

पिता की गंभीर बीमारी के दौरान छुट्टी नहीं मिलने का आरोप

महिला कर्मचारी ने अपनी शिकायत में बताया कि उनके 71 वर्षीय पिता को 16 अप्रैल को स्ट्रोक आया था। उनकी हालत गंभीर होने के कारण उन्हें सात दिनों तक वेंटिलेटर पर रखा गया। इसके बाद 6 मई को ट्रेकोस्टॉमी के साथ अस्पताल से छुट्टी देकर घर भेजा गया।

शिकायतकर्ता के अनुसार, उनके पिता को 31 मई तक चौबीस घंटे नर्सिंग देखभाल की आवश्यकता थी। परिवार में इकलौती अविवाहित बेटी होने के कारण उनकी देखभाल की जिम्मेदारी उन्हीं पर थी। महिला का आरोप है कि उन्होंने पिता की मेडिकल रिपोर्ट संलग्न कर अवकाश के लिए आवेदन दिया, लेकिन 17 से 31 मई तक की छुट्टी स्वीकृत नहीं की गई।

महिला ने यह भी दावा किया कि इस अवधि से संबंधित विवाद के दौरान उनका 75 दिनों का वेतन रोक दिया गया। शिकायत में आरोप लगाया गया है कि जब उन्होंने मौखिक रूप से छुट्टी के संबंध में बात रखी, तो उन्हें कार्यालय समय के बाद मिलने के लिए कहा गया। इन आरोपों और संबंधित दस्तावेजों की जांच के बाद ही वास्तविक स्थिति स्पष्ट हो सकेगी।

हाजिरी रजिस्टर और ड्यूटी को लेकर भी विवाद

महिला कर्मचारी ने अपनी शिकायत में उपस्थिति दर्ज करने की प्रक्रिया पर भी सवाल उठाए हैं। उनके मुताबिक, 6 और 7 अगस्त को छुट्टी के आवेदनों के सामने हाजिरी रजिस्टर में सवालिया निशान लगाए गए थे।

शिकायतकर्ता का दावा है कि 15 और 21 अगस्त को ड्यूटी पर मौजूद रहने के बावजूद उनकी अनुपस्थिति दर्ज की गई। उन्होंने आरोप लगाया कि 1 सितंबर को उन्हें उपस्थिति रजिस्टर पर हस्ताक्षर करने की अनुमति नहीं दी गई और आवक शाखा ने उनका आवेदन लेने से भी इनकार कर दिया।

महिला ने पूर्व सिविल सर्जन डॉ. अनिता सिंगारे के 19 सितंबर 2024 के पत्र क्रमांक 7899 का हवाला देते हुए कहा कि मानवीय आधार पर उन्हें सुबह 11 बजे से शाम 5 बजे तक कार्यालय आने की अनुमति दी गई थी। उनका आरोप है कि डॉ. मनोज खन्ना ने इस व्यवस्था को जारी नहीं रखा।

सिविल सर्जन ने आरोपों को बताया निराधार

दूसरी ओर, सिविल सर्जन डॉ. मनोज खन्ना ने महिला कर्मचारी की ओर से लगाए गए आरोपों को गलत बताया है। उनका कहना है कि कर्मचारी समय पर कार्यालय नहीं पहुंचतीं और बिना सूचना दिए छुट्टी पर चली जाती हैं।

डॉ. खन्ना के अनुसार, महिला कर्मचारी अप्रैल में करीब डेढ़ महीने तक लगातार अनुपस्थित रही थीं। उन्होंने यह भी दावा किया कि कर्मचारी सुबह लगभग 11:30 बजे कार्यालय आती हैं और दोपहर 2 बजे से पहले चली जाती हैं।

सिविल सर्जन ने बताया कि कर्मचारी की अनुपस्थिति से संबंधित मामला भोपाल भेजा गया है। इस तरह दोनों पक्षों के आरोप अलग-अलग हैं। जहां महिला कर्मचारी ने अनुचित व्यवहार और मानसिक प्रताड़ना की शिकायत की है, वहीं अधिकारी ने उनकी उपस्थिति और कार्यप्रणाली पर सवाल उठाए हैं।

पुलिस जांच के बाद स्पष्ट होगी स्थिति

मामले में महिला थाना पुलिस ने प्रकरण दर्ज कर जांच शुरू कर दी है। अब शिकायत में लगाए गए आरोपों, संबंधित दस्तावेजों, अवकाश आवेदनों, उपस्थिति रजिस्टर और दोनों पक्षों के बयानों के आधार पर तथ्यों की जांच की जाएगी।

मामला जिला चिकित्सालय के वरिष्ठ अधिकारी से जुड़ा होने के कारण जांच की निष्पक्षता और उपलब्ध साक्ष्यों का परीक्षण महत्वपूर्ण होगा। फिलहाल, एफआईआर दर्ज होना आरोपों का अंतिम प्रमाण नहीं है। पुलिस जांच के निष्कर्षों के बाद ही मामले की वास्तविक स्थिति स्पष्ट हो सकेगी।

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