बालाघाट में फर्जी डिग्री से सरकारी डॉक्टर की नौकरी का आरोप, तत्कालीन BMO पर FIR
मध्य प्रदेश के बालाघाट में तत्कालीन BMO सुनील सिंह पर फर्जी दस्तावेजों से सरकारी नौकरी और पदोन्नति हासिल करने का आरोप है। पुलिस ने FIR दर्ज कर जांच शुरू की।


बालाघाट। मध्य प्रदेश के बालाघाट जिले में फर्जी दस्तावेजों के आधार पर सरकारी डॉक्टर की नौकरी हासिल करने का गंभीर मामला सामने आया है। बिरसा के तत्कालीन ब्लॉक मेडिकल ऑफिसर (BMO) सुनील सिंह के खिलाफ पुलिस ने धोखाधड़ी और दस्तावेजों की कूटरचना से संबंधित धाराओं में मामला दर्ज किया है। राज्यस्तरीय जांच में सामने आया कि आरोपी पर देवास में पदस्थ दूसरे डॉक्टर सुनील सिंह की शैक्षणिक डिग्री और दस्तावेजों का इस्तेमाल कर सरकारी सेवा में आने का आरोप है। मामले में आरोपी द्वारा वर्षों तक वेतन लेने और पदोन्नति हासिल करने की भी जांच की जा रही है।
एक ही MBBS डिग्री, दो अलग-अलग सरकारी डॉक्टर
मामले का खुलासा स्वास्थ्य विभाग के रिकॉर्ड में एक ही नाम और समान शैक्षणिक विवरण वाले दो डॉक्टरों की जानकारी सामने आने के बाद हुआ। जांच के अनुसार, दोनों डॉक्टरों के दस्तावेजों में नाम, पिता का नाम, जन्मतिथि, मेडिकल कोर्स और कॉलेज का विवरण समान था, जबकि उनकी पदस्थापना अलग-अलग स्थानों पर थी।
जांच में देवास में पदस्थ डॉक्टर की डिग्री वास्तविक पाई गई, जबकि बालाघाट में पदस्थ सुनील सिंह के दस्तावेज कथित रूप से कूटरचित पाए गए। इस तरह एक ही MBBS डिग्री के आधार पर दो अलग-अलग व्यक्तियों के सरकारी सेवा में कार्यरत रहने का मामला सामने आया। बताया गया है कि यह स्थिति 15 साल से अधिक समय तक बनी रही।
दस्तावेजों में कई विसंगतियां, स्थायी पंजीकरण का रिकॉर्ड भी नहीं
राज्यस्तरीय जांच समिति ने मामले की गंभीरता को देखते हुए संबंधित अभिलेखों का परीक्षण किया। जांच के दौरान आरोपी के दस्तावेजों में कई विसंगतियां सामने आईं। रिकॉर्ड के अनुसार, उसने अलग-अलग समय पर अपना गृह जिला रीवा, मुरैना और बालाघाट बताया था।
इसके अलावा, विभाग के पास आरोपी का केवल प्रोविजनल रजिस्ट्रेशन उपलब्ध होने की बात सामने आई, जबकि उसके स्थायी पंजीकरण का रिकॉर्ड नहीं मिला। इन तथ्यों के आधार पर दस्तावेजों की सत्यता और सरकारी नियुक्ति की प्रक्रिया पर सवाल उठे हैं।
संविदा डॉक्टर से BMO और क्लास-वन अधिकारी तक का सफर
मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी (CMHO) शत्रुघन दाहिया के अनुसार, सुनील सिंह की पहली नियुक्ति वर्ष 2009 में बालाघाट जिले में संविदा डॉक्टर के रूप में हुई थी। वर्ष 2012 में उसे नियमित कर दिया गया। इसके बाद वर्ष 2020 में उसे ब्लॉक मेडिकल ऑफिसर का प्रभार सौंपा गया और बाद में क्लास-वन अधिकारी के रूप में पदोन्नति दी गई।
जानकारी के मुताबिक, वर्ष 2023 से वह लगातार बिरसा क्षेत्र में BMO के पद पर कार्यरत था। अब फर्जी दस्तावेजों से नौकरी हासिल करने के आरोप सामने आने के बाद उसकी नियुक्ति, पदोन्नति और वेतन भुगतान से जुड़े रिकॉर्ड भी मामले की जांच के महत्वपूर्ण पहलू बन गए हैं।
जून में पद से हटाया, जुलाई से चिकित्सा अवकाश पर
जून 2026 में कथित फर्जीवाड़े का खुलासा होने के बाद सुनील सिंह को बिरसा BMO के पद से हटाकर प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र दमोह, बालाघाट में पदस्थ किया गया था। जांच के दौरान स्वास्थ्य विभाग ने उसे कई बार भोपाल बुलाया, लेकिन वह उपस्थित नहीं हुआ।
इसके बाद जुलाई 2026 में वह एक महीने के चिकित्सा अवकाश पर चला गया। उपलब्ध जानकारी के अनुसार, इसके बाद से वह ड्यूटी पर वापस नहीं लौटा है।
पुलिस ने दर्ज किया मामला, अब आगे की जांच
जांच रिपोर्ट के आधार पर बिरसा पुलिस ने आरोपी के खिलाफ भारतीय न्याय संहिता (BNS) की धारा 318(4), 340(2) और 336(3) के तहत मामला दर्ज किया है। पुलिस अब मामले की आगे जांच कर रही है।
यह मामला केवल एक डॉक्टर की नियुक्ति तक सीमित नहीं है, बल्कि स्वास्थ्य विभाग के दस्तावेज सत्यापन, नियुक्ति प्रक्रिया, पदोन्नति और लंबे समय तक चली निगरानी व्यवस्था पर भी सवाल खड़े करता है। अब जांच में यह स्पष्ट होना महत्वपूर्ण होगा कि कथित फर्जी दस्तावेजों के आधार पर नियुक्ति और पदोन्नति कैसे होती रही तथा संबंधित अभिलेखों के सत्यापन में चूक कहां हुई।
