LIC को बड़ा झटका: 23 साल पुराने बीमा क्लेम पर उपभोक्ता आयोग का फैसला, पत्नी को मिलेंगे 2 लाख रुपये
बालाघाट जिला उपभोक्ता आयोग ने LIC को मृतक कर्मचारी की पत्नी को 2 लाख रुपये बीमा राशि, 6% ब्याज, 10 हजार रुपये हर्जाना और 2 हजार रुपये मुकदमे का खर्च देने का आदेश दिया।


बालाघाट। जिला उपभोक्ता विवाद निवारण आयोग ने भारतीय जीवन बीमा निगम (LIC) को मृतक बीमित कर्मचारी की पत्नी को बीमा राशि का भुगतान करने का आदेश दिया है। आयोग ने बीमा क्लेम खारिज करने को सेवा में कमी और लापरवाही मानते हुए महिला को 2 लाख रुपये की बीमा राशि के साथ 6 प्रतिशत सालाना ब्याज देने के निर्देश दिए हैं। इसके अलावा बीमा निगम को 10 हजार रुपये हर्जाना और 2 हजार रुपये मुकदमे के खर्च के रूप में भी देने होंगे।
आयोग के अध्यक्ष उपेंद्र कुमार सोनकर तथा सदस्य डॉ. महेश कुमार चांडक और हर्षा बिजेवार डोहरे की पीठ ने यह फैसला सुनाया। आदेश के मुताबिक, बीमा निगम को क्लेम की राशि पर 9 फरवरी 2026 से वास्तविक भुगतान की तारीख तक 6 प्रतिशत वार्षिक ब्याज देना होगा। आयोग ने सभी निर्धारित भुगतानों को एक महीने के भीतर पूरा करने का निर्देश दिया है।
वेतन से कटती थी बीमा पॉलिसी की किस्त
मामले के अनुसार, बालाघाट जिले के समनापुर गांव की निवासी सुधा चौहान के पति खेमचंद चौहान भोपाल स्थित सेंट्रल वेयरहाउसिंग कॉरपोरेशन में कार्यरत थे। उन्होंने 15 अक्टूबर 2001 को भारतीय जीवन बीमा निगम से 2 लाख रुपये की बीमा पॉलिसी ली थी। पॉलिसी के लिए हर महीने 287 रुपये का प्रीमियम उनके वेतन से काटा जाता था।
बीमा पॉलिसी के चालू रहने के दौरान 30 अप्रैल 2003 को खेमचंद चौहान का निधन हो गया। पति की मृत्यु के बाद सुधा चौहान ने बीमा राशि प्राप्त करने के लिए क्लेम प्रस्तुत किया, लेकिन आवश्यक दस्तावेज उपलब्ध नहीं होने का हवाला देकर एलआईसी ने उनका दावा निरस्त कर दिया।
बीमा राशि नहीं मिलने से परेशान महिला ने न्याय के लिए जिला उपभोक्ता विवाद निवारण आयोग में शिकायत दर्ज कराई।
वेतन पर्ची और प्रीमियम कटौती के दस्तावेज बने आधार
आयोग में सुनवाई के दौरान सुधा चौहान ने अपने दावे के समर्थन में वेतन पर्ची, वर्ष 2001 से अप्रैल 2003 तक प्रीमियम की नियमित कटौती के रिकॉर्ड और अन्य संबंधित दस्तावेज प्रस्तुत किए। उपलब्ध जानकारी के अनुसार, 23 फरवरी 2004 को इन दस्तावेजों को पेश किया गया था।
दस्तावेजों के आधार पर आयोग ने माना कि जब बीमा पॉलिसी के लिए कर्मचारी के वेतन से नियमित रूप से प्रीमियम काटा जा रहा था, तब बीमा क्लेम को निरस्त करना उचित नहीं था। आयोग ने बीमा निगम की कार्रवाई को सेवा में कमी और लापरवाही माना।
एक महीने में करना होगा भुगतान
जिला उपभोक्ता आयोग ने एलआईसी को सुधा चौहान के पक्ष में 2 लाख रुपये की बीमा राशि जारी करने का आदेश दिया है। इसके साथ ही 9 फरवरी 2026 से भुगतान होने तक 6 प्रतिशत सालाना ब्याज, सेवा में कमी के लिए 10 हजार रुपये और मुकदमे के खर्च के रूप में 2 हजार रुपये अतिरिक्त देने होंगे।
आयोग ने बीमा निगम को आदेश का पालन करने के लिए एक महीने का समय दिया है। इस फैसले से लंबे समय से बीमा क्लेम के लिए संघर्ष कर रही महिला को राहत मिलने का रास्ता साफ हुआ है।

