ट्रंप का नोबेल शांति पुरस्कार पर फिर दावा, बोले- मैंने 8 युद्ध खत्म कराए
डोनाल्ड ट्रंप ने नोबेल शांति पुरस्कार पर फिर दावा किया है। उन्होंने कहा कि उन्होंने आठ युद्ध खत्म कराए और कई संघर्षों को रोकने में भूमिका निभाई। नोबेल पुरस्कार की घोषणा 9 अक्टूबर को होगी।


वॉशिंगटन। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने एक बार फिर नोबेल शांति पुरस्कार पर अपना दावा पेश किया है। व्हाइट हाउस के ओवल ऑफिस में बुधवार को पत्रकारों से बातचीत के दौरान ट्रंप ने कहा कि उन्होंने अपने कार्यकाल में आठ युद्ध खत्म कराए हैं और ऐसे काम किए हैं, जिनकी मिसाल पहले नहीं मिलती। उन्होंने यह भी कहा कि यदि इतने बड़े योगदान के बावजूद उन्हें नोबेल शांति पुरस्कार नहीं मिलता है, तो इससे पुरस्कार देने वाली समिति की साख पर सवाल उठेंगे।
नोबेल शांति पुरस्कार 2026 की घोषणा शुक्रवार, 9 अक्टूबर को नॉर्वे के ओस्लो स्थित नॉर्वेजियन नोबेल इंस्टीट्यूट में की जाएगी। इस साल पुरस्कार के लिए कुल 287 उम्मीदवार नामित किए गए हैं, हालांकि नोबेल समिति आधिकारिक तौर पर नामांकित उम्मीदवारों की पुष्टि 50 साल तक नहीं करती।
'मैंने आठ युद्ध खत्म कराए'
ट्रंप ने पत्रकारों से कहा कि उन्होंने ऐसे काम किए हैं, जो किसी अन्य अमेरिकी राष्ट्रपति ने नहीं किए। उन्होंने अपने शांति प्रयासों का जिक्र करते हुए कहा कि उन्होंने आठ युद्ध खत्म कराए हैं और कई संघर्षों को आगे बढ़ने से रोकने में भूमिका निभाई है।
ट्रंप ने कहा कि वह अपनी तारीफ नहीं कर रहे हैं, बल्कि अपने कामों के तथ्य बता रहे हैं। उनके मुताबिक, इतने बड़े स्तर पर युद्धों को खत्म करने का रिकॉर्ड किसी अन्य राष्ट्रपति का नहीं रहा है।
हालांकि, ट्रंप के इन दावों को लेकर विवाद भी है। कुछ संघर्षों में हिंसा दोबारा शुरू होने और कई मामलों में उनकी भूमिका को लेकर संबंधित पक्षों द्वारा अलग-अलग दावे किए गए हैं।
नोबेल नहीं मिला तो समिति की साख पर सवाल?
ट्रंप ने कहा कि नोबेल समिति की ऐसी प्रतिष्ठा है कि शायद वह उनके जैसे व्यक्ति को पुरस्कार न दे। उन्होंने यह भी कहा कि पुरस्कार मिले या नहीं, उनके अनुसार वह पहले ही काफी कुछ कर चुके हैं।
ट्रंप ने संकेत दिया कि यदि आठ युद्धों को खत्म कराने जैसे प्रयासों के बावजूद उन्हें सम्मान नहीं दिया जाता है, तो यह नोबेल समिति के लिए भी सवाल खड़े करेगा। उन्होंने इसे नाराजगी के बजाय अपने काम के आधार पर किया गया आकलन बताया।
ओबामा को नोबेल मिलने पर भी साधा निशाना
ट्रंप ने पूर्व राष्ट्रपति बराक ओबामा को 2009 में दिए गए नोबेल शांति पुरस्कार का भी जिक्र किया। उन्होंने सवाल उठाया कि ओबामा को राष्ट्रपति पद संभालने के शुरुआती दौर में ही यह सम्मान क्यों दिया गया था।
ट्रंप ने कहा कि उन्हें आज तक यह समझ नहीं आया कि ओबामा को यह पुरस्कार किस उपलब्धि के लिए मिला था। उन्होंने अपने शांति प्रयासों की तुलना करते हुए खुद को पुरस्कार का अधिक योग्य दावेदार बताया।
मारिया कोरिना मचाडो का भी किया जिक्र
ट्रंप ने 2025 की नोबेल शांति पुरस्कार विजेता वेनेजुएला की विपक्षी नेता मारिया कोरिना मचाडो का भी उल्लेख किया। मचाडो ने जनवरी 2026 में व्हाइट हाउस में ट्रंप से मुलाकात के दौरान अपना नोबेल पदक उन्हें प्रस्तुत किया था।
ट्रंप ने इसे अपने लिए सम्मान की बात बताया और कहा कि मचाडो ने उन्हें इस पुरस्कार का अधिक योग्य हकदार माना था। हालांकि, मचाडो का अपना 2025 का नोबेल शांति पुरस्कार उन्हें ही प्रदान किया गया था; ट्रंप को दिया गया पदक उनके पुरस्कार की मान्यता या ट्रांसफर नहीं था।
टैरिफ को भी बताया शांति स्थापित करने का जरिया
ट्रंप ने यह भी दावा किया कि उन्होंने कई मामलों में टैरिफ की धमकी और आर्थिक दबाव का इस्तेमाल संघर्षों को रोकने के लिए किया। उनके अनुसार, कुछ देशों पर आर्थिक दबाव बनाकर ऐसे कदम उठाने से रोका गया, जिनसे बड़े संघर्ष या जनहानि हो सकती थी।
ट्रंप का कहना है कि आर्थिक दबाव भी कूटनीति का एक प्रभावी हथियार हो सकता है और इसके जरिए युद्धों को शुरू होने से पहले रोका जा सकता है।
ईरान युद्ध का भी किया जिक्र
ट्रंप ने संकेत दिया कि उनकी युद्ध रोकने की कोशिशें अभी खत्म नहीं हुई हैं और एक अन्य संघर्ष को सुलझाने की दिशा में भी काम चल रहा है। उनके बयान को मौजूदा अमेरिका-ईरान संघर्ष के संदर्भ में देखा जा रहा है। रिपोर्टों के मुताबिक, ईरान से जुड़े युद्ध और परमाणु मुद्दे को लेकर ट्रंप प्रशासन की कोशिशें अभी जारी हैं।
अब शुक्रवार को होगा फैसला
नोबेल शांति पुरस्कार को लेकर ट्रंप की दावेदारी ऐसे समय सामने आई है, जब पुरस्कार की घोषणा में कुछ ही घंटे बाकी हैं। नॉर्वेजियन नोबेल समिति शुक्रवार, 9 अक्टूबर को विजेता के नाम की घोषणा करेगी।
ट्रंप लगातार अपने विदेश नीति और संघर्षों को रोकने के प्रयासों को अपनी बड़ी उपलब्धि बताते रहे हैं। अब उनकी दावेदारी कितनी सफल होती है, इसका फैसला नोबेल समिति करेगी। दुनिया की नजरें शुक्रवार की घोषणा पर टिकी हैं।
