ब्रेकिंग
शुक्रवार, 11 सितंबर 2026
Maps
Denva Post
सभी खबरें
धर्म संस्कृति · 11-08-2025

उत्तरी कर्नाटक के शकील अहमद अंगड़ी ने भाषा के प्रति प्रेम से गढ़ी अनोखी मिसाल

विजयपुरा (कर्नाटक): "गुरु ब्रह्मा, गुरु विष्णु, गुरु देवो महेश्वरः..." — जब संस्कृत का यह प्रसिद्ध श्लोक स्पष्ट उच्चारण के साथ कक्षा में गूंजता है, तो छात्रों की जुबान पर अनुशासन और भक्ति दोनों दिखते हैं। इन पंक्तियों का पाठ करवाने वाला शिक्षक कोई पंडित नहीं,…

देनवा पोस्ट
देनवा पोस्ट
झीलें और नदियां
समाचार डेस्क · 11-08-2025
शेयर
उत्तरी कर्नाटक के शकील अहमद अंगड़ी ने भाषा के प्रति प्रेम से गढ़ी अनोखी मिसाल

विजयपुरा (कर्नाटक): "गुरु ब्रह्मा, गुरु विष्णु, गुरु देवो महेश्वरः..." — जब संस्कृत का यह प्रसिद्ध श्लोक स्पष्ट उच्चारण के साथ कक्षा में गूंजता है, तो छात्रों की जुबान पर अनुशासन और भक्ति दोनों दिखते हैं। इन पंक्तियों का पाठ करवाने वाला शिक्षक कोई पंडित नहीं, बल्कि एक मुस्लिम शिक्षक, शकील अहमद मौलासब अंगड़ी हैं, जो बीते 26 वर्षों से उत्तर कर्नाटक में संस्कृत का प्रचार-प्रसार कर रहे हैं।

समाचार

55 वर्षीय अंगड़ी आज भी रोज़ाना बोलेगांव स्थित वृषभ लिंगाचार्य संस्कृत पाठशाला में छात्रों को संस्कृत पढ़ाते हैं और कक्षा के अंत में गर्व से कहते हैं — "जयतु संस्कृतम्, जयतु मनुकुलम्" (संस्कृत की जय, मानवता की जय)।

संस्कृत: केवल भाषा नहीं, जीवन का मार्ग

संस्कृत सप्ताह और माह के तहत, जो 9 अगस्त से शुरू हुआ है और जिसे विश्व संस्कृत दिवस के रूप में भी मनाया जाता है, अंगड़ी छात्रों के लिए विभिन्न खेलों, श्लोक प्रतियोगिताओं और भाषण आयोजनों का संचालन कर रहे हैं। वे कहते हैं, “संस्कृत मेरे लिए सिर्फ विषय नहीं, जीवन भाषा है।”

अंगड़ी के चारों बच्चे — अरफात, अरबाज, अल्फिया और तसफिया — भी संस्कृत पढ़ रहे हैं। यह दिखाता है कि यह परंपरागत भाषा केवल किसी एक धर्म या समुदाय की नहीं, बल्कि सभी की साझा विरासत है।

धार्मिक समर्पण से प्रेरित शिक्षा पथ

दसवीं पास करने के बाद अंगड़ी ने इंडी तालुका के बोलेगांव में संस्कृत शिक्षा की शुरुआत की। उनकी धार्मिक गतिविधियों में सक्रियता और समर्पण ने बाथनल मठ के वृषभ लिंगाचार्य स्वामीजी का ध्यान खींचा, जिन्होंने उन्हें आगे अध्ययन के लिए प्रोत्साहित किया। अंगड़ी ने बाद में जामखंडी की लक्ष्मीनरसिंह संस्कृत पाठशाला में संस्कृत साहित्य का अध्ययन किया।

सांप्रदायिक सौहार्द का जीवंत उदाहरण

सारंगमठ-गच्छीनामठ, सिंदगी के प्रभु सारंगदेव शिवाचार्य ने अंगड़ी को "सांप्रदायिक सद्भाव का आदर्श" बताते हुए कहा,

“उन्होंने दिखा दिया है कि किसी भी भाषा को सीखने या सिखाने में कोई धार्मिक बाधा नहीं होनी चाहिए।”

प्रेरणा का स्रोत

शकील अहमद अंगड़ी की कहानी एक स्पष्ट संदेश देती है — भाषा का कोई धर्म नहीं होता। संस्कृत जैसी प्राचीन भाषा को जीवित रखने में उनके जैसा समर्पण, केवल शिक्षण नहीं, संस्कृति और समरसता की सेवा है।

यह खबर शेयर करें
शेयर