MP News: शहडोल में चीतल के अवैध शिकार का खुलासा, घर में पक रहा था मांस; दो आरोपी गिरफ्तार
शहडोल के खन्नौधी वन परिक्षेत्र में वन विभाग ने चीतल के अवैध शिकार का पर्दाफाश करते हुए दो लोगों को गिरफ्तार किया है। कार्रवाई के दौरान एक आरोपी के घर से पका हुआ चीतल का मांस और उसका एक सींग बरामद किया गया।


शहडोल। मध्यप्रदेश के शहडोल जिले के खन्नौधी वन परिक्षेत्र में वन विभाग ने चीतल के अवैध शिकार का खुलासा करते हुए दो आरोपियों को गिरफ्तार किया है। कार्रवाई के दौरान एक आरोपी के घर से पका हुआ चीतल का मांस और उसका एक सींग बरामद किया गया। दोनों आरोपियों को न्यायालय में पेश करने के बाद न्यायिक अभिरक्षा में जिला जेल भेज दिया गया है। फिलहाल वन विभाग यह पता लगाने में जुटा है कि चीतल का शिकार कहां और किन परिस्थितियों में किया गया था।
मुखबिर की सूचना पर हुई कार्रवाई
दक्षिण वनमंडल शहडोल के खन्नौधी वन परिक्षेत्र अंतर्गत ग्राम सलदा में वन विभाग को मुखबिर से सूचना मिली थी कि गांव निवासी बंसीलाल बैगा (42) अपने घर में चीतल का मांस पकाकर खा रहा है। सूचना मिलते ही वन विभाग की टीम ने मौके पर पहुंचकर उसके घर पर दबिश दी।
घर से बरामद हुआ चीतल का मांस और सींग
तलाशी के दौरान झोपड़ी में रखे बर्तन से पके हुए चावल के साथ चीतल का मांस बरामद किया गया। इसके अलावा घर के अंदर से चीतल का एक सींग भी मिला। जब वन अधिकारियों ने आरोपी से वन्यजीव अवशेष रखने के संबंध में वैध दस्तावेज मांगे तो वह कोई दस्तावेज प्रस्तुत नहीं कर सका। इसके बाद वन विभाग ने सभी वन्यजीव अवशेष जब्त कर लिए।
पूछताछ में दूसरे आरोपी का नाम आया सामने
प्रारंभिक पूछताछ में बंसीलाल बैगा ने बताया कि उसने गांव के ही संतोष सिंह (31) के साथ मिलकर चीतल का मांस खाया था। इसके बाद वन विभाग ने दोनों आरोपियों के खिलाफ वन्यजीव संरक्षण अधिनियम, 1972 की विभिन्न धाराओं के तहत मामला दर्ज कर उन्हें गिरफ्तार कर लिया।
दोनों आरोपियों को न्यायालय में पेश किए जाने के बाद न्यायिक अभिरक्षा में जिला जेल शहडोल भेज दिया गया।
शिकार स्थल की तलाश जारी
वन विभाग के अधिकारियों के अनुसार अभी यह स्पष्ट नहीं हो पाया है कि चीतल का शिकार कहां किया गया था और मांस आरोपियों तक कैसे पहुंचा। मामले की जांच जारी है और इस अवैध शिकार में अन्य लोगों की संलिप्तता की भी पड़ताल की जा रही है।
वरिष्ठ अधिकारियों के निर्देशन में हुई कार्रवाई
वन विभाग ने बताया कि यह कार्रवाई वन संरक्षक महेंद्र प्रताप सिंह और दक्षिण वनमंडल की डीएफओ श्रद्धा पन्द्रे के निर्देशन में की गई। अभियान में वन परिक्षेत्राधिकारी, वनपाल, वनरक्षक और अन्य कर्मचारियों की महत्वपूर्ण भूमिका रही