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देश-दुनिया · 19-09-2025

Onion Price Crash : किसानों का आंदोलन और निर्यात नीति पर सवाल

महाराष्ट्र ने इस वर्ष जरूरत से अधिक प्याज पैदा किया है और संग्रहीत रबी प्याज की गुणवत्ता खराब हो गई है, जिससे बाजार में कीमतें घट गई हैं। | Photo Credit: B JOTHI RAMALINGAM Maharastra : महाराष्ट्र, जो भारत का सबसे बड़ा प्याज उत्पादक राज्य है, 12 सितंबर से कि…

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समाचार डेस्क · 19-09-2025
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Onion Price Crash : किसानों का आंदोलन और निर्यात नीति पर सवाल

महाराष्ट्र ने इस वर्ष जरूरत से अधिक प्याज पैदा किया है और संग्रहीत रबी प्याज की गुणवत्ता खराब हो गई है, जिससे बाजार में कीमतें घट गई हैं।

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| Photo Credit: B JOTHI RAMALINGAM

Maharastra : महाराष्ट्र, जो भारत का सबसे बड़ा प्याज उत्पादक राज्य है, 12 सितंबर से किसानों के आंदोलन का गवाह बना हुआ है। हजारों किसान अपने प्याज की गिरती (Onion Price Crash) कीमतों के विरोध में सड़क पर नहीं, बल्कि फोन पर विरोध दर्ज कर रहे हैं। उनकी मांग सीधी है—सरकार तात्कालिक हस्तक्षेप करे और उन्हें ₹1500 प्रति क्विंटल की राहत राशि दी जाए।

संकट की जड़ Onion Price Crash : लागत से कम दाम

किसान बताते हैं कि इस समय बाजार में प्याज के दाम ₹800 से ₹1000 प्रति क्विंटल तक ही मिल रहे हैं, जबकि उनकी उत्पादन लागत ₹2200 से ₹2500 प्रति क्विंटल बैठती है। बेहतर दाम की उम्मीद में भंडारित किया गया रबी प्याज अब खराब होने लगा है, जिससे किसान मजबूरन और भी कम कीमत पर बेच रहे हैं।

बफर स्टॉक (Onion Price Crash) नीति बनी नई मुसीबत

सरकार की मूल्य स्थिरीकरण नीति के तहत NAFED और NCCF ने प्याज खरीदकर बफर स्टॉक बनाया और अब वही प्याज देशभर में सस्ती दरों पर बेचा जा रहा है।

उपभोक्ताओं को इसका फायदा जरूर मिल रहा है,

लेकिन किसानों के लिए यह दोहरी मार साबित हो रही है।महाराष्ट्र राज्य प्याज उत्पादक संगठन का कहना है कि "सरकार को तुरंत NCCF और NAFED द्वारा बाजार में प्याज उतारना बंद करना चाहिए।"

अंतरराष्ट्रीय बाजार में भारत की साख को झटका

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भारत प्याज का बड़ा निर्यातक रहा है। सरकारी आँकड़े बताते हैं कि 2022–23 में 25.25 लाख टन प्याज का निर्यात हुआ था। लेकिन 2024–25 में यह घटकर 11.47 लाख टन रह गया।

बांग्लादेश और श्रीलंका जैसे पारंपरिक आयातक अब चीन और पाकिस्तान से प्याज खरीद रहे हैं।

निर्यातकों का कहना है कि भारत की बार-बार बदलती निर्यात नीति ने वैश्विक बाजार में देश की विश्वसनीयता को नुकसान पहुँचाया है।

समाधान की तलाश

विशेषज्ञों और किसान संगठनों ने सरकार को कई सुझाव दिए हैं:

स्थिर निर्यात नीति बनाई जाए, ताकि अंतरराष्ट्रीय बाजार में भारत की पकड़ फिर से मजबूत हो।

प्रमुख आयातक देशों के साथ दीर्घकालिक समझौते किए जाएं।

आंध्र प्रदेश मॉडल लागू किया जाए, जहाँ सरकार ने किसानों से ₹1200 प्रति क्विंटल की दर पर खरीद शुरू की है।

निर्यातकों को प्रोत्साहन देकर और बफर स्टॉक की रणनीति पर पुनर्विचार कर किसानों को राहत दी जाए।

यह संकट केवल प्याज के दामों की अस्थायी गिरावट का नहीं है। यह एक संरचनात्मक और नीतिगत चुनौती है—जहाँ किसानों की लागत, बाजार की अस्थिरता और सरकारी रणनीतियाँ आपस में टकरा रही हैं। जब तक सरकार उत्पादन, निर्यात और मूल्य स्थिरीकरण के बीच संतुलन नहीं बनाती, तब तक प्याज किसानों का दर्द खत्म होना मुश्किल है।

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