MP के सभी स्कूलों में 28 अक्टूबर को ई-कचरा प्रबंधन दिवस, पुराने मोबाइल-कंप्यूटर होंगे जमा
मध्यप्रदेश के सभी सरकारी और निजी स्कूलों में 28 अक्टूबर को ई-कचरा प्रबंधन दिवस मनाया जाएगा। पुराने इलेक्ट्रॉनिक उपकरणों का संग्रहण और जागरूकता प्रतियोगिताएं होंगी।


नर्मदापुरम। मध्यप्रदेश के सरकारी और निजी विद्यालयों में अब विद्यार्थियों को इलेक्ट्रॉनिक कचरे से पर्यावरण को होने वाले नुकसान और उसके सुरक्षित निस्तारण के प्रति जागरूक किया जाएगा। भारत सरकार के शिक्षा मंत्रालय के निर्देशानुसार प्रदेश के सभी जिलों में विशेष ई-कचरा प्रबंधन अभियान चलाया जा रहा है। इसी क्रम में 28 अक्टूबर को प्रदेश के सभी शासकीय एवं अशासकीय विद्यालयों में ई-कचरा प्रबंधन दिवस मनाया जाएगा। इस दौरान स्कूलों में पुराने मोबाइल, कंप्यूटर, लैपटॉप, चार्जर, बैटरियां और अन्य अनुपयोगी इलेक्ट्रॉनिक उपकरणों के संग्रहण के साथ जागरूकता गतिविधियां आयोजित की जाएंगी।
अभियान का उद्देश्य विद्यार्थियों में पर्यावरण संरक्षण की भावना विकसित करना और इलेक्ट्रॉनिक कचरे के सुरक्षित संग्रहण, पृथक्करण, पुनर्चक्रण तथा वैज्ञानिक निस्तारण के प्रति जागरूकता बढ़ाना है। इसके लिए विद्यालयों में विशेष ई-कचरा संग्रहण कॉर्नर स्थापित किए जा रहे हैं, जहां विद्यार्थी, शिक्षक और अभिभावक अनुपयोगी इलेक्ट्रॉनिक सामग्री जमा कर सकेंगे।
घरों और स्कूलों से एकत्रित होगा इलेक्ट्रॉनिक कचरा
अभियान के अंतर्गत विद्यालयों में खराब और अनुपयोगी इलेक्ट्रॉनिक एवं विद्युत उपकरणों को एकत्रित किया जाएगा। इनमें पुराने कंप्यूटर, लैपटॉप, की-बोर्ड, मोबाइल फोन, चार्जर, केबल, सीडी-डीवीडी, पेन ड्राइव, प्रिंटर, कार्ट्रिज, बैटरियां और बल्ब जैसी सामग्री शामिल होगी।
इन उपकरणों को सामान्य घरेलू कचरे के साथ फेंकने के बजाय अलग से संग्रहित किया जाएगा। इसके बाद निर्धारित नियमों के अनुसार अधिकृत रिसाइक्लर अथवा रिफर्बिशर के माध्यम से इनके सुरक्षित निस्तारण की व्यवस्था की जाएगी।
ई-कचरे में मौजूद कुछ हानिकारक पदार्थों के असुरक्षित निस्तारण से मिट्टी, पानी और पर्यावरण प्रदूषित होने का खतरा रहता है। ऐसे में विद्यालयों के माध्यम से विद्यार्थियों और उनके परिवारों को सुरक्षित ई-कचरा प्रबंधन का महत्व समझाया जाएगा।
प्रार्थना सभा में होगी चर्चा, प्रतियोगिताओं से देंगे जागरूकता का संदेश
28 अक्टूबर को आयोजित होने वाले विशेष ई-कचरा प्रबंधन दिवस के अवसर पर विद्यालयों की प्रार्थना सभाओं में विद्यार्थियों को इलेक्ट्रॉनिक कचरे के दुष्प्रभाव और उसके सुरक्षित निस्तारण की जानकारी दी जाएगी।
इस दौरान जागरूकता संवाद, परिचर्चा और प्रश्नोत्तरी जैसी गतिविधियां आयोजित होंगी। विद्यार्थियों की रचनात्मक भागीदारी सुनिश्चित करने के लिए पोस्टर निर्माण, नारा लेखन और चित्रकला प्रतियोगिताएं भी कराई जाएंगी।
इन गतिविधियों के माध्यम से विद्यार्थी इलेक्ट्रॉनिक उपकरणों के जिम्मेदार उपयोग, पुराने उपकरणों के पुनर्चक्रण और पर्यावरण संरक्षण से जुड़े संदेश प्रस्तुत करेंगे।
सामान्य कचरे में नहीं फेंका जाएगा ई-वेस्ट
अभियान के तहत एकत्रित इलेक्ट्रॉनिक कचरे का निस्तारण केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड (CPCB) अथवा संबंधित राज्य प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड (SPCB) के लागू नियमों के अनुसार किया जाएगा।
इसके लिए पंजीकृत और अधिकृत रिसाइक्लर या रिफर्बिशर की सेवाएं ली जाएंगी। अभियान में इलेक्ट्रॉनिक कचरे को सामान्य कचरे से अलग रखने और वैज्ञानिक तरीके से उसका निस्तारण सुनिश्चित करने पर विशेष जोर दिया गया है।
यह पहल केंद्र सरकार के 'स्वच्छता ही सेवा' और 'मिशन लाइफ' के उद्देश्यों के अनुरूप संचालित की जा रही है।
हर स्कूल को पोर्टल पर अपलोड करनी होगी गतिविधियों की रिपोर्ट
अभियान की निगरानी के लिए विद्यालयों को आयोजित गतिविधियों की ऑनलाइन रिपोर्टिंग भी करनी होगी। प्रत्येक विद्यालय को ई-कचरा प्रबंधन दिवस के दौरान आयोजित कार्यक्रमों का विवरण, प्रतिभागियों की संख्या और दो से तीन जियोटैग्ड तस्वीरें भारत सरकार के इको क्लब पोर्टल पर अपलोड करनी होंगी।
इसके लिए https://ecoclubs.education.gov.in/पोर्टल निर्धारित किया गया है।
जिला शिक्षा अधिकारियों और जिला परियोजना समन्वयकों को अभियान की जिलावार समीक्षा एवं नियमित निगरानी की जिम्मेदारी दी गई है, ताकि सभी विद्यालयों में निर्धारित गतिविधियों का आयोजन और उनकी रिपोर्टिंग सुनिश्चित की जा सके।
विद्यार्थियों के माध्यम से घर-घर पहुंचेगा पर्यावरण संरक्षण का संदेश
अभियान के माध्यम से विद्यार्थियों के साथ अभिभावकों और स्थानीय समुदाय को भी ई-कचरे के सुरक्षित प्रबंधन से जोड़ने का प्रयास किया जाएगा। विद्यालयों में स्थापित संग्रहण कॉर्नर और जागरूकता गतिविधियों के जरिए लोगों को यह समझाया जाएगा कि खराब इलेक्ट्रॉनिक उपकरणों को सामान्य कचरे में फेंकने के बजाय अधिकृत व्यवस्था के माध्यम से निस्तारित करना क्यों आवश्यक है।
शिक्षा विभाग की इस पहल से विद्यालयों में स्वच्छता और पर्यावरण संरक्षण के प्रति जागरूकता बढ़ाने के साथ विद्यार्थियों में जिम्मेदार उपभोग और सुरक्षित अपशिष्ट प्रबंधन की आदत विकसित करने का प्रयास किया जाएगा।

