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भोपाल · 40 मिनट पहले

MP Politics: UCC पर सियासी संग्राम तेज, उमंग सिंघार बोले- 2028 में कांग्रेस सरकार बनी तो खत्म करेंगे कानून

मध्यप्रदेश में UCC को लेकर सियासी टकराव तेज हो गया है। उमंग सिंघार ने कहा कि 2028 में कांग्रेस सरकार बनी तो समान नागरिक संहिता कानून खत्म किया जाएगा।

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समाचार डेस्क · 40 मिनट पहले
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MP Politics: UCC पर सियासी संग्राम तेज, उमंग सिंघार बोले- 2028 में कांग्रेस सरकार बनी तो खत्म करेंगे कानून

भोपाल। मध्यप्रदेश में समान नागरिक संहिता (UCC) को लेकर सियासी टकराव एक बार फिर तेज हो गया है। विधानसभा से समान नागरिक संहिता विधेयक-2026 पारित होने के बाद अब नेता प्रतिपक्ष उमंग सिंघार ने इसे लेकर बड़ा बयान दिया है। भोपाल में विधायक आरिफ मसूद की ओर से आयोजित ‘जंगे आजादी-उलेमा की कुर्बानी’ कार्यक्रम में संबोधित करते हुए सिंघार ने कहा कि यदि वर्ष 2028 में मध्यप्रदेश में कांग्रेस की सरकार बनती है तो यूसीसी के इस कानून को खत्म कर दिया जाएगा।

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उमंग सिंघार ने यूसीसी को ‘काला कानून’ बताते हुए इसे वापस लेने की बात कही। उनके इस बयान के बाद मध्यप्रदेश की  राजनीति में समान नागरिक संहिता का मुद्दा एक बार फिर भाजपा और कांग्रेस के बीच टकराव का केंद्र बनता दिखाई दे रहा है।

विधानसभा में पारित हो चुका है यूसीसी विधेयक

मध्यप्रदेश सरकार ने 20 जुलाई को विशेष मंत्रिमंडल बैठक में समान नागरिक संहिता विधेयक-2026 को मंजूरी दी थी। इसके अगले दिन 21 जुलाई को विधानसभा में विधेयक पारित किया गया। विधेयक को लेकर विपक्षी कांग्रेस विधायकों ने इसे प्रवर समिति के पास भेजने की मांग की थी। इस दौरान सदन में विरोध और हंगामे की स्थिति भी बनी।

विधेयक में विवाह से जुड़े नियमों को एक समान करने के साथ कई महत्वपूर्ण प्रावधान किए गए हैं। इनमें बहुविवाह पर रोक, विवाह का अनिवार्य पंजीयन और साथ रह रहे जोड़ों (लिव-इन रिलेशनशिप) के संबंधों का पंजीयन जैसे प्रावधान शामिल हैं। अनुसूचित जनजातियों को इसके दायरे से बाहर रखने का प्रावधान भी किया गया है।

क्या है समान नागरिक संहिता?

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समान नागरिक संहिता यानी Uniform Civil Code (UCC) का उद्देश्य धर्म के आधार पर अलग-अलग व्यक्तिगत कानूनों के स्थान पर नागरिकों के लिए पारिवारिक मामलों में एक समान कानूनी व्यवस्था लागू करना है।

इसके तहत विवाह, तलाक, उत्तराधिकार, भरण-पोषण, गोद लेने और अन्य संबंधित पारिवारिक मामलों से जुड़े नियमों को एक समान कानून के दायरे में लाने की अवधारणा है। भारतीय संविधान के अनुच्छेद 44 में राज्य को नागरिकों के लिए समान नागरिक संहिता सुनिश्चित करने की दिशा में प्रयास करने का निर्देश दिया गया है। हालांकि, अनुच्छेद 44 संविधान के नीति-निर्देशक तत्वों का हिस्सा है।

कांग्रेस क्यों कर रही यूसीसी का विरोध?

कांग्रेस और अन्य विपक्षी दल यूसीसी के कई प्रावधानों को लेकर सवाल उठाते रहे हैं। विपक्ष का प्रमुख तर्क है कि अलग-अलग समुदायों की धार्मिक और पारंपरिक व्यवस्थाओं पर समान कानून का प्रभाव पड़ सकता है।

आदिवासी समाज की पारंपरिक व्यवस्थाओं और उनके संवैधानिक संरक्षण को लेकर भी सवाल उठाए गए हैं। कांग्रेस का यह भी कहना रहा है कि इतने महत्वपूर्ण कानून पर व्यापक चर्चा और सभी पक्षों से विचार-विमर्श होना चाहिए।

दूसरी ओर, सरकार यूसीसी को समानता और सामाजिक समरसता से जोड़कर देख रही है। सरकार का तर्क है कि समान कानून से नागरिकों को बराबरी का अधिकार मिलेगा और विशेष रूप से महिलाओं को विवाह, तलाक और संपत्ति जैसे मामलों में बेहतर कानूनी सुरक्षा मिल सकती है।

मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव भी यूसीसी को समानता और सामाजिक समरसता से जोड़ते हुए इसके समर्थन में अपनी बात रख चुके हैं।

2028 से पहले बड़ा राजनीतिक मुद्दा बन सकता है UCC

विधानसभा से विधेयक पारित होने के बाद नेता प्रतिपक्ष उमंग सिंघार का इसे खत्म करने का ऐलान राजनीतिक रूप से महत्वपूर्ण माना जा रहा है। सिंघार के बयान ने साफ कर दिया है कि कांग्रेस इस मुद्दे को आने वाले समय में राजनीतिक बहस का हिस्सा बनाए रख सकती है।

वर्ष 2028 में होने वाले विधानसभा चुनाव से पहले यूसीसी भाजपा और कांग्रेस के बीच प्रमुख राजनीतिक मुद्दों में शामिल हो सकता है। एक ओर भाजपा इसे समानता और कानूनी सुधार से जोड़कर जनता के सामने रख सकती है, वहीं कांग्रेस इसके प्रावधानों और विभिन्न समुदायों की परंपराओं पर पड़ने वाले प्रभाव को मुद्दा बना सकती है।

ऐसे में उमंग सिंघार का यह बयान मध्यप्रदेश की राजनीति में यूसीसी को लेकर आने वाले दिनों में बयानबाजी और सियासी टकराव को और तेज कर सकता है।

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