बच्चों में कैंसर के इन संकेतों को न करें नजरअंदाज, एम्स भोपाल के विशेषज्ञों ने स्वास्थ्यकर्मियों को किया प्रशिक्षित
एम्स भोपाल के विशेषज्ञों ने बच्चों में कैंसर के शुरुआती संकेत पहचानने को लेकर स्वास्थ्यकर्मियों को प्रशिक्षित किया। जानें किन लक्षणों को नजरअंदाज नहीं करना चाहिए।


भोपाल। बच्चों में कैंसर की शुरुआत कई बार सामान्य बीमारी जैसे लक्षणों से होती है। लंबे समय तक बुखार, अचानक वजन कम होना, हड्डियों में लगातार दर्द या शरीर में गांठ जैसी शिकायतों को सामान्य मानकर नजरअंदाज करना भारी पड़ सकता है। बीमारी की समय पर पहचान और उपचार शुरू करने के उद्देश्य से एम्स भोपाल के विशेषज्ञों ने सामुदायिक चिकित्सा अधिकारियों को बच्चों में कैंसर के शुरुआती संकेत पहचानने का प्रशिक्षण दिया।
राष्ट्रीय बाल स्वास्थ्य कार्यक्रम (RBSK) से जुड़े सामुदायिक चिकित्सा अधिकारियों के प्रशिक्षण कार्यक्रम में एम्स भोपाल के बाल रोग विभाग के प्रोफेसर एवं बाल रक्त रोग-कैंसर विशेषज्ञ डॉ. नरेंद्र कुमार चौधरी और डीएम बाल रक्त रोग एवं कैंसर रेजिडेंट डॉ. मेघा धवन ने जागरूकता एवं शैक्षणिक सत्र लिए। प्रशिक्षण कार्यक्रम का आयोजन कैंकिड्स-किड्सकैन की ओर से किया गया।
दो सप्ताह से ज्यादा बुखार रहे तो जांच जरूरी
प्रशिक्षण के दौरान विशेषज्ञों ने बच्चों में कैंसर के संभावित शुरुआती संकेतों की जानकारी दी। उन्होंने बताया कि यदि बच्चे को दो सप्ताह से अधिक समय तक बिना किसी स्पष्ट कारण के बुखार बना हुआ है तो चिकित्सकीय जांच कराना जरूरी है।
इसी तरह बिना वजह वजन कम होना, असामान्य रक्तस्राव, लगातार हड्डियों में दर्द, शरीर में किसी तरह की गांठ या सूजन जैसे लक्षणों को भी नजरअंदाज नहीं करना चाहिए। पेट में असामान्य रूप से सूजन दिखाई देने पर भी चिकित्सकीय सलाह लेने की जरूरत हो सकती है।
सुबह सिरदर्द के साथ उल्टी को गंभीरता से लें
विशेषज्ञों ने प्रशिक्षण के दौरान कुछ ऐसे संकेतों पर भी विशेष ध्यान देने की सलाह दी, जो गंभीर बीमारी की ओर इशारा कर सकते हैं। सुबह के समय सिरदर्द के साथ उल्टी होना मस्तिष्क में किसी गांठ की संभावना का संकेत हो सकता है।
इसी तरह शिशु या छोटे बच्चे की आंख में सफेद चमक या सफेद प्रतिबिंब दिखाई देना रेटिनोब्लास्टोमा यानी आंख के कैंसर का संभावित संकेत हो सकता है। ऐसे लक्षण दिखाई देने पर बच्चे को जल्द चिकित्सकीय जांच के लिए ले जाने की सलाह दी गई।
समय पर इलाज से बेहतर हो सकते हैं परिणाम
विशेषज्ञों के अनुसार बचपन के कैंसर की जल्दी पहचान और सही समय पर उपचार मिलने पर 70 से 90 प्रतिशत तक बच्चों के ठीक होने की संभावना हो सकती है। हालांकि बीमारी के प्रकार, उसकी अवस्था और उपचार की उपलब्धता के आधार पर परिणाम अलग-अलग हो सकते हैं।
विशेषज्ञों ने जोर दिया कि कैंसर की पहचान में देरी होने पर उपचार प्रभावित हो सकता है। इसलिए संदिग्ध लक्षण दिखाई देने पर बच्चे की जांच में अनावश्यक देरी नहीं करनी चाहिए।
गांव-कस्बों में स्वास्थ्यकर्मियों की अहम भूमिका
प्रशिक्षण के दौरान बताया गया कि राष्ट्रीय बाल स्वास्थ्य कार्यक्रम से जुड़े सामुदायिक चिकित्सा अधिकारी और स्वास्थ्यकर्मी गांवों और कस्बों में बच्चों के लगातार संपर्क में रहते हैं। ऐसे में वे बच्चों में होने वाले असामान्य बदलावों को शुरुआती स्तर पर पहचानने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकते हैं।
यदि स्वास्थ्यकर्मी किसी बच्चे में कैंसर के संभावित संकेतों की पहचान कर उसे समय पर विशेषज्ञ या उच्च स्वास्थ्य केंद्र के लिए रेफर करते हैं, तो जांच और उपचार शुरू होने में होने वाली देरी को कम किया जा सकता है।
हर बुखार कैंसर नहीं, लेकिन लंबे समय तक लक्षण रहें तो जांच जरूरी
विशेषज्ञों ने स्पष्ट संदेश दिया कि हर बुखार, वजन कम होना या हड्डियों में दर्द कैंसर नहीं होता। इन लक्षणों के कई सामान्य कारण भी हो सकते हैं। लेकिन यदि लक्षण लंबे समय तक बने रहते हैं, बार-बार दिखाई देते हैं या उनके साथ अन्य असामान्य संकेत भी नजर आते हैं, तो चिकित्सकीय जांच जरूरी है।
समय पर जांच और सही विशेषज्ञ तक पहुंच बचपन के कैंसर की जल्द पहचान और प्रभावी उपचार की दिशा में महत्वपूर्ण कदम साबित हो सकती है।