MP News: बिजली कंपनियों के 5000 से ज्यादा संविदा कर्मचारी हो सकेंगे नियमित, अक्टूबर से पहले होगी परीक्षा
मध्य प्रदेश की बिजली कंपनियों में कार्यरत 5 हजार से अधिक संविदा अधिकारी-कर्मचारियों के नियमितीकरण का रास्ता खुला। सरकार प्रक्रिया और पात्रता नियमों पर काम कर रही है।


भोपाल। मध्य प्रदेश की बिजली वितरण कंपनियों में संविदा आधार पर कार्यरत 5 हजार से अधिक अधिकारी और कर्मचारियों के लिए बड़ी राहत की खबर है। लंबे समय से नियमितीकरण की मांग कर रहे संविदाकर्मियों के लिए अब स्थायी नियुक्ति का रास्ता खुलता नजर आ रहा है। इस संबंध में ऊर्जा विभाग और बिजली कंपनियों के स्तर पर आवश्यक प्रक्रिया शुरू होने की जानकारी सामने आई है।
जानकारी के अनुसार, प्रदेश की विभिन्न बिजली वितरण कंपनियों में वर्षों से संविदा पर कार्यरत अधिकारी और कर्मचारी नियमितीकरण की मांग कर रहे थे। कई कर्मचारी लंबे समय से तकनीकी, प्रशासनिक और फील्ड से जुड़े महत्वपूर्ण कार्यों का संचालन कर रहे हैं। अब सरकार द्वारा इस दिशा में सकारात्मक पहल किए जाने से कर्मचारियों में उत्साह का माहौल है।
सूत्रों के मुताबिक, नियमितीकरण की प्रक्रिया के लिए पात्रता, सेवा अवधि, पदों की उपलब्धता और विभागीय नियमों के आधार पर विस्तृत कार्ययोजना तैयार की जा रही है। अंतिम निर्णय शासन स्तर पर तय दिशा-निर्देशों के अनुरूप लिया जाएगा।
कर्मचारी संगठनों ने सरकार के इस कदम का स्वागत करते हुए कहा कि वर्षों से संविदा पर कार्य कर रहे कर्मचारियों को नियमित सेवा का लाभ मिलना चाहिए। उनका कहना है कि नियमित होने से कर्मचारियों को नौकरी की सुरक्षा, वेतनमान, पदोन्नति और अन्य सेवा संबंधी सुविधाओं का लाभ मिलेगा।
वहीं, ऊर्जा विभाग के अधिकारियों का कहना है कि प्रक्रिया को नियमानुसार आगे बढ़ाया जा रहा है। सभी संबंधित पहलुओं का परीक्षण करने के बाद पात्र कर्मचारियों के नियमितीकरण को लेकर आवश्यक कार्रवाई की जाएगी।
यदि नियमितीकरण की प्रक्रिया तय समय पर पूरी होती है, तो इससे प्रदेश की बिजली कंपनियों में कार्यरत हजारों संविदाकर्मियों को सीधा लाभ मिलेगा। साथ ही बिजली व्यवस्था को और अधिक स्थिर एवं प्रभावी बनाने में भी मदद मिलने की उम्मीद है।
सरकार की ओर से अंतिम आदेश जारी होने के बाद पात्र कर्मचारियों की सूची और नियमितीकरण की प्रक्रिया से संबंधित विस्तृत दिशा-निर्देश जारी किए जा सकते हैं। फिलहाल बिजली कंपनियों के हजारों संविदाकर्मी इस निर्णय पर नजर बनाए हुए हैं।