AI से आतंकवादी हमलों का खतरा! ब्रिटेन की खुफिया एजेंसी MI5 ने दी चेतावनी, ड्रोन और जैव हथियारों पर जताई चिंता
ब्रिटेन की खुफिया एजेंसी MI5 के प्रमुख सर केन मैक्कलम ने चेतावनी दी कि आतंकवादी ड्रोन हमलों, जैविक खतरों और दुष्प्रचार के लिए AI का दुरुपयोग कर सकते हैं।


आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) का दुरुपयोग अब वैश्विक सुरक्षा के लिए बड़ी चुनौती बनता जा रहा है। ब्रिटेन की घरेलू खुफिया एजेंसी MI5 के प्रमुख सर केन मैक्कलम ने चेतावनी दी है कि आतंकवादी संगठन एआई तकनीक का इस्तेमाल हमलों की योजना बनाने, निगरानी करने और अपनी गतिविधियों को अधिक प्रभावी बनाने के लिए कर सकते हैं। उन्होंने कहा कि एआई आतंकवादी ताकतों की क्षमताओं को बढ़ाने वाले ‘सुपरचार्जर’ की तरह काम कर रही है। इससे ड्रोन हमलों और जैविक हथियारों से जुड़े संभावित खतरे को लेकर सुरक्षा एजेंसियों की चिंता बढ़ गई है।
ड्रोन हमलों में AI का इस्तेमाल बढ़ने की आशंका
सर केन मैक्कलम के मुताबिक, यूक्रेन युद्ध में ड्रोन तकनीक के व्यापक इस्तेमाल ने सुरक्षा एजेंसियों के सामने नई चुनौतियां खड़ी की हैं। आशंका है कि आतंकवादी संगठन भी ऐसी तकनीकों का दुरुपयोग कर ब्रिटेन में हमलों को अंजाम देने की कोशिश कर सकते हैं।
उन्होंने बताया कि खुफिया एजेंसियों ने ऐसे आतंकवादियों की पहचान की है, जिन्होंने अपनी निगरानी और हमले की रणनीतियों को बेहतर बनाने के लिए एआई का इस्तेमाल करने की कोशिश की। एआई-सक्षम ड्रोन इस खतरे को और जटिल बना सकते हैं।
जैविक हथियारों और खतरनाक रोगजनकों को लेकर चिंता
MI5 प्रमुख ने आतंकवादी संगठनों और शत्रुतापूर्ण देशों की ओर से एआई के संभावित दुरुपयोग पर भी चिंता जताई। उनके अनुसार, इस तकनीक का इस्तेमाल जैविक अनुसंधान से जुड़ी सुरक्षा कमजोरियों की पहचान करने और खतरनाक रोगजनकों के विकास में सहायता लेने के लिए किया जा सकता है।
उन्होंने अल कायदा जैसे आतंकवादी संगठनों द्वारा वायरस अनुसंधान एवं विकास से संबंधित जानकारी का दुरुपयोग किए जाने की आशंका का भी उल्लेख किया। हालांकि, इस तरह के खतरे अभी किस स्तर तक विकसित हुए हैं, इसे लेकर अनिश्चितता बनी हुई है। इसके बावजूद खुफिया एजेंसियां इसे गंभीर सुरक्षा चुनौती मान रही हैं।
दुष्प्रचार और कट्टरपंथ फैलाने में भी AI का खतरा
एआई का दुरुपयोग केवल हथियारों तक सीमित नहीं है। इसका इस्तेमाल लोगों की पसंद, व्यवहार और व्यक्तिगत प्रोफाइल के अनुरूप दुष्प्रचार तैयार करने तथा कट्टरपंथी विचारधारा फैलाने के लिए भी किया जा सकता है।
ऐसी तकनीक के जरिए अलग-अलग लोगों को निशाना बनाकर भ्रामक संदेश फैलाना आसान हो सकता है। इससे आतंकवादी संगठनों की ऑनलाइन गतिविधियों और लोगों को कट्टरपंथ की ओर आकर्षित करने की कोशिशों पर निगरानी रखना सुरक्षा एजेंसियों के लिए अधिक चुनौतीपूर्ण बन सकता है।
रूस, ईरान और चीन से जुड़े सुरक्षा जोखिमों का भी जिक्र
अपने वार्षिक संबोधन में सर केन मैक्कलम ने ब्रिटेन के सामने मौजूद व्यापक भू-राजनीतिक खतरों पर भी प्रकाश डाला। उन्होंने रूस को ब्रिटेन और उसके सहयोगियों के लिए प्रमुख आक्रामक खतरा बताया।
इसके अलावा, ईरान समर्थित समूहों से जुड़े संभावित खतरों और ब्रिटेन के सैन्य ठिकानों की सुरक्षा को लेकर भी चिंता जताई गई। रिपोर्ट के मुताबिक, ग्लूचेस्टरशायर स्थित आरएएफ फेयरफोर्ड जैसे सैन्य ठिकानों को संभावित निशाना बनाए जाने की आशंकाओं के बीच सुरक्षा एजेंसियां सतर्क हैं।
MI5 चीन से जुड़े जासूसी के खतरों पर भी नजर रख रहा है। इन चुनौतियों के बीच ब्रिटेन की सुरक्षा एजेंसियों के सामने आतंकवाद, विदेशी हस्तक्षेप और तकनीकी दुरुपयोग से एक साथ निपटने की चुनौती है।
AI के दुरुपयोग पर नजर रखने के लिए बनेगा विशेष केंद्र
एआई तकनीक से पैदा हो रहे खतरों का आकलन करने और उनसे निपटने की तैयारी के तहत MI5 मुख्यालय थमस हाउस में एक विशेष एआई थ्रेट असेसमेंट सेंटर स्थापित करने की योजना का भी उल्लेख किया गया है।
एआई कंपनियों की सुरक्षा रिपोर्टों में भी ऐसे मामलों को लेकर चिंता सामने आई है, जिनमें आपराधिक तत्वों और आतंकवादी समूहों द्वारा एआई मॉडल का खतरनाक उद्देश्यों के लिए इस्तेमाल करने की कोशिश की गई। इनमें हथियारों और जैविक खतरों से जुड़ी जानकारी हासिल करने के प्रयास भी शामिल हैं।
भविष्य की सुरक्षा के लिए नई चुनौती बना AI
ब्रिटेन की खुफिया एजेंसी की चेतावनी इस बात की ओर इशारा करती है कि एआई जहां चिकित्सा, विज्ञान और तकनीकी विकास के लिए उपयोगी साबित हो रही है, वहीं इसका गलत इस्तेमाल गंभीर सुरक्षा संकट पैदा कर सकता है।
आतंकवादी संगठनों द्वारा इस तकनीक का संभावित दुरुपयोग रोकने के लिए खुफिया निगरानी, तकनीकी सुरक्षा और अंतरराष्ट्रीय सहयोग को मजबूत करना महत्वपूर्ण होगा। आने वाले समय में एआई से जुड़े खतरों की पहचान और रोकथाम वैश्विक सुरक्षा एजेंसियों की प्रमुख प्राथमिकताओं में शामिल रह सकती है।

