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काम की बात · 06-08-2025

बैंक बैलेंस में '37 अंकों' की गड़बड़ी: कोटक बैंक ने ग्राहकों को दी सतर्कता बरतने की सलाह

मुंबई। कोटक महिंद्रा बैंक ने हाल ही में अपने ग्राहकों को आगाह किया है कि वे अपने खाते की शेष राशि या लेन-देन विवरण की जांच के लिए केवल बैंक के आधिकारिक मोबाइल बैंकिंग ऐप या नेट बैंकिंग प्लेटफॉर्म का ही प्रयोग करें। यह कदम एक चौंकाने वाली मीडिया रिपोर्ट के बाद…

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समाचार डेस्क · 06-08-2025
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बैंक बैलेंस में '37 अंकों' की गड़बड़ी: कोटक बैंक ने ग्राहकों को दी सतर्कता बरतने की सलाह

मुंबई। कोटक महिंद्रा बैंक ने हाल ही में अपने ग्राहकों को आगाह किया है कि वे अपने खाते की शेष राशि या लेन-देन विवरण की जांच के लिए केवल बैंक के आधिकारिक मोबाइल बैंकिंग ऐप या नेट बैंकिंग प्लेटफॉर्म का ही प्रयोग करें। यह कदम एक चौंकाने वाली मीडिया रिपोर्ट के बाद उठाया गया है, जिसमें दावा किया गया था कि दिल्ली के एक ग्राहक ने थर्ड-पार्टी यूपीआई ऐप के माध्यम से 37 अंकों वाली बैंक बैलेंस राशि देखी थी।

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कोटक बैंक ने रिपोर्ट को बताया “ग़लत”

बैंक द्वारा जारी एक आधिकारिक बयान में स्पष्ट किया गया है कि ऐसे “असामान्य रूप से उच्च बैलेंस” वाली खबरें भ्रामक और तथ्यों से परे हैं। बैंक ने ग्राहकों से अपील की है कि वे खाता जानकारी की सत्यता केवल बैंक के अपने डिजिटल माध्यमों से करें, न कि किसी थर्ड-पार्टी ऐप के भरोसे।

क्या है पूरा मामला?

दिल्ली निवासी एक व्यक्ति ने कथित तौर पर Navi UPI App के ज़रिए अपने खाते का बैलेंस चेक किया, जहां उसे 37 अंकों की राशि दिखाई दी। यह ऐप भारतीय राष्ट्रीय भुगतान निगम (NPCI) द्वारा अनुमोदित API का उपयोग करता है और उपयोगकर्ताओं को उनके बैंक खातों को लिंक करने की सुविधा देता है।

हालांकि, यह ऐप उपयोगकर्ता को बैंक के सर्वर से जुड़कर ही बैलेंस दिखाता है, लेकिन इसमें तकनीकी गड़बड़ी या डेटा रेंडरिंग त्रुटि से इस तरह का असामान्य परिणाम सामने आ सकता है।

यूपीआई कैसे काम करता है?

जब कोई ग्राहक थर्ड-पार्टी यूपीआई ऐप का उपयोग करता है, तो वह अपने बैंक खाते को लिंक करने के लिए मोबाइल नंबर का सत्यापन करता है और एक यूपीआई पिन सेट करता है। इसके बाद यह ऐप एनपीसीआई के सेंट्रल स्विच के माध्यम से संबंधित बैंक को बैलेंस या लेनदेन का अनुरोध भेजता है। बैंक से प्राप्त जानकारी को ऐप इंटरफ़ेस पर प्रदर्शित करता है।

साइबर सुरक्षा विशेषज्ञों की राय

डिजिटल लेन-देन से जुड़े विशेषज्ञों का कहना है कि यह मामला तकनीकी बग या डेटा फॉर्मेटिंग एरर का नतीजा हो सकता है, जिसे मीडिया द्वारा सनसनीखेज़ बना दिया गया।

> “कोई भी थर्ड-पार्टी ऐप केवल उतनी ही जानकारी दिखाता है जितनी बैंक द्वारा API के माध्यम से दी जाती है। यदि ऐप उस डेटा को ग़लत तरीके से पढ़ता है, तो भ्रम की स्थिति पैदा हो सकती है।” – साइबर सिक्योरिटी सलाहकार

क्या करें ग्राहक?

केवल बैंक के आधिकारिक ऐप या वेबसाइट पर जाकर ही बैलेंस या स्टेटमेंट देखें।

थर्ड-पार्टी ऐप्स का प्रयोग करते समय अनुमतियाँ और सुरक्षा शर्तें ध्यान से पढ़ें।

किसी भी असामान्य गतिविधि की सूचना तत्काल बैंक को दें।

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