पीएम मोदी पर खरगे की टिप्पणी से सियासी घमासान, चिराग पासवान बोले—राजनीतिक विरोध में भाषा की मर्यादा जरूरी
कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे के बयान पर एनडीए नेताओं ने जताई नाराजगी, केंद्रीय मंत्री संतोष सुमन ने की सार्वजनिक माफी की मांग


नई दिल्ली/पटना। कांग्रेस के राष्ट्रीय अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे की प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को लेकर की गई टिप्पणी के बाद बिहार से लेकर राष्ट्रीय राजनीति तक सियासी घमासान तेज हो गया है। खरगे के बयान को लेकर राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन (एनडीए) के नेताओं ने कांग्रेस पर तीखा हमला बोला है। केंद्रीय मंत्री एवं लोक जनशक्ति पार्टी (रामविलास) के राष्ट्रीय अध्यक्ष चिराग पासवान ने टिप्पणी को दुर्भाग्यपूर्ण बताते हुए कहा कि लोकतंत्र में राजनीतिक और वैचारिक मतभेद स्वाभाविक हैं, लेकिन सार्वजनिक जीवन में भाषा की मर्यादा और संवैधानिक पदों की गरिमा बनाए रखना बेहद जरूरी है।
वहीं, हिन्दुस्तानी अवाम मोर्चा (सेक्युलर) के राष्ट्रीय अध्यक्ष एवं बिहार सरकार के मंत्री संतोष कुमार सुमन ने भी खरगे के बयान पर कड़ी आपत्ति जताते हुए उनसे सार्वजनिक रूप से माफी मांगने की मांग की है।
चिराग पासवान बोले—बिहार की धरती से ऐसी टिप्पणी दुर्भाग्यपूर्ण
केंद्रीय मंत्री चिराग पासवान ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर कांग्रेस अध्यक्ष के बयान की निंदा की। उन्होंने लिखा कि बिहार सभ्यता की जननी है और ऐसी ऐतिहासिक एवं सांस्कृतिक धरती से देश के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के प्रति की गई अभद्र टिप्पणी दुर्भाग्यपूर्ण है।
चिराग पासवान ने कहा कि लोकतंत्र में अलग-अलग राजनीतिक विचारधाराओं का होना स्वाभाविक है। राजनीतिक दलों के बीच नीतियों, फैसलों और विचारों को लेकर मतभेद हो सकते हैं, लेकिन किसी भी नेता को सार्वजनिक मंच से टिप्पणी करते समय शब्दों की मर्यादा का ध्यान रखना चाहिए।
उन्होंने जोर देकर कहा कि राजनीतिक विरोध तथ्यों और तर्कों पर आधारित होना चाहिए, न कि व्यक्तिगत टिप्पणियों पर। सार्वजनिक जीवन में पद की गरिमा और लोकतांत्रिक मूल्यों का सम्मान बनाए रखना सभी राजनीतिक दलों की जिम्मेदारी है।
संतोष सुमन ने उठाए सवाल, खरगे से माफी की मांग
खरगे की टिप्पणी को लेकर हिन्दुस्तानी अवाम मोर्चा (सेक्युलर) के राष्ट्रीय अध्यक्ष एवं बिहार सरकार के लघु जल संसाधन मंत्री संतोष कुमार सुमन ने भी नाराजगी जाहिर की है।
संतोष सुमन ने कहा कि बिहार के प्रथम मुख्यमंत्री डॉ. श्रीकृष्ण सिंह की जयंती जैसे महत्वपूर्ण अवसर पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के पिता को लेकर जिस प्रकार की भाषा का इस्तेमाल किया गया, वह भारतीय लोकतंत्र की गरिमा और सार्वजनिक जीवन की मर्यादा के अनुरूप नहीं है।
उन्होंने कहा कि भारतीय संस्कृति में परिवार और पूर्वजों के प्रति सम्मान की परंपरा रही है। राजनीतिक मतभेदों को व्यक्तिगत या पारिवारिक टिप्पणियों तक ले जाना उचित नहीं है।
संतोष सुमन ने कांग्रेस अध्यक्ष से अपने बयान पर सार्वजनिक रूप से माफी मांगने की मांग की।
श्रीकृष्ण सिंह की जयंती पर बयान को लेकर विवाद
संतोष सुमन ने कहा कि बिहार के पूर्व मुख्यमंत्री डॉ. श्रीकृष्ण सिंह जैसे महान नेताओं की जयंती समाज को प्रेरणा देने और लोकतांत्रिक मूल्यों को मजबूत करने का अवसर होती है। ऐसे आयोजनों का उपयोग राजनीतिक कटुता बढ़ाने के बजाय सामाजिक एकता, विकास और जनहित के मुद्दों पर संवाद के लिए किया जाना चाहिए।
उन्होंने कहा कि राजनीतिक नेताओं को अपने वक्तव्यों में संयम रखना चाहिए, ताकि सार्वजनिक जीवन में स्वस्थ राजनीतिक परंपराएं बनी रहें।
राजनीतिक बयानबाजी में मर्यादा पर फिर छिड़ी बहस
खरगे की टिप्पणी को लेकर सामने आई प्रतिक्रियाओं ने एक बार फिर राजनीतिक बयानबाजी की भाषा और मर्यादा पर बहस छेड़ दी है। सत्ता पक्ष के नेताओं का कहना है कि लोकतंत्र में सरकार की नीतियों और फैसलों की आलोचना करना विपक्ष का अधिकार है, लेकिन राजनीतिक असहमति को व्यक्तिगत टिप्पणियों में बदलना उचित नहीं है।
भारतीय राजनीति में सत्ता पक्ष और विपक्ष के बीच तीखी बयानबाजी कोई नई बात नहीं है। हालांकि, चुनावी सभाओं और सार्वजनिक कार्यक्रमों में नेताओं द्वारा इस्तेमाल की जाने वाली भाषा को लेकर समय-समय पर सवाल उठते रहे हैं।
