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ग्वालियर · 02-10-2025

ग्वालियर: पुलिस की वर्दी पहनकर वसूली और ठगी करने वाला गिरोह पकड़ा गया, चार गिरफ्तार

Image generated by Ai ग्वालियर (मध्यप्रदेश)।ग्वालियर पुलिस ने एक बड़े ठगी (fake-police) और वसूली रैकेट का पर्दाफाश किया है। पुलिस ने बुधवार शाम चार ऐसे शातिर बदमाशों को गिरफ्तार किया, जो पुलिस की वर्दी पहनकर हाईवे पर वाहन चालकों से वसूली करते थे और युवाओं को…

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समाचार डेस्क · 02-10-2025
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भौगोलिक संदर्भ

ग्वालियर (मध्यप्रदेश)।ग्वालियर पुलिस ने एक बड़े ठगी (fake-police) और वसूली रैकेट का पर्दाफाश किया है। पुलिस ने बुधवार शाम चार ऐसे शातिर बदमाशों को गिरफ्तार किया, जो पुलिस की वर्दी पहनकर हाईवे पर वाहन चालकों से वसूली करते थे और युवाओं को नौकरी लगवाने का झांसा देकर ठगी करते थे। आरोपितों के पास से नकली पुलिस वर्दी, पहचान पत्र और फर्जी दस्तावेज बरामद हुए हैं।

क्राइम ब्रांच का कहना है कि यह (fake-police) गिरोह कई महीनों से सक्रिय था और ट्रक तथा डंपर चालकों से अवैध वसूली करता था। गिरफ्तार बदमाशों में से तीन आरोपी पहले से भी आपराधिक गतिविधियों में लिप्त रहे हैं।

शिकायत से खुला राज़

यह मामला तब उजागर हुआ जब वैभव पाल नामक एक टाइपिस्ट ने पुलिस में शिकायत दर्ज कराई।

वैभव “लीगल हाउस” नाम से एक टाइपिंग और फोटोकॉपी की दुकान चलाते हैं। कुछ दिन पहले उनके पास एक युवक आया और खुद को पुलिस विभाग में दारोगा बताकर नियुक्ति पत्र टाइप करवाने लगा।

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उसके बाद उसी युवक ने अपने तीन साथियों को भी दुकान पर भेजा। संदेह होने पर वैभव ने तुरंत पुलिस को सूचना दी। शिकायत मिलने के बाद क्राइम ब्रांच ने मोबाइल नंबरों की लोकेशन ट्रेस की और बुधवार शाम चारों आरोपियों को दबोच लिया।

पकड़े गए आरोपी

गिरफ्तार आरोपियों की पहचान इस प्रकार हुई:

शिवम चतुर्वेदी (गिरोह का सरगना, निवासी सागर)

पवन यादव पुत्र ओमकार यादव (निवासी सागर)

नीरज यादव पुत्र कुंदन यादव (निवासी सागर)

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रविंद्र यादव पुत्र अशोक यादव (निवासी सागर)

पुलिस जांच में सामने आया है कि इस गिरोह ने पहले भी दमोह जिले में चोरी की एफआईआर दर्ज करवाई थी।

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वर्दी पहनकर बनते थे अधिकारी

क्राइम ब्रांच अधिकारियों ने बताया कि आरोपी कभी निरीक्षक, कभी आरटीओ और कभी ट्रैफिक पुलिस अधिकारी बनकर सड़कों पर चेकिंग प्वाइंट लगाते थे।

वे खासतौर पर हाईवे पर ट्रक और डंपर चालकों को निशाना बनाते।

वाहन रोककर दस्तावेजों की जांच के नाम पर मोटी रकम वसूलते।

इस तरह कई महीनों से अवैध वसूली का खेल चल रहा था।

नौकरी दिलाने के नाम पर ठगी

सिर्फ वसूली ही नहीं, आरोपियों का गिरोह (fake-police) बेरोजगार युवाओं को भी शिकार बनाता था।

वे खुद को पुलिस भर्ती से जुड़ा अधिकारी बताकर नौकरी लगवाने का झांसा देते।

युवाओं से मोटी रकम ऐंठकर उन्हें नकली नियुक्ति पत्र थमा देते।

फर्जी पहचान पत्र और दस्तावेजों की मदद से वे अपने झांसे को और पुख्ता करते थे।

पुलिस को मिले अहम सबूत

गिरोह से बरामद सामान में शामिल हैं:

पुलिस की नकली वर्दियां

फर्जी आईडी कार्ड और पहचान पत्र

नियुक्ति पत्रों के ड्राफ्ट

मोबाइल फोन और अन्य दस्तावेज

इन सबूतों से यह साबित हुआ कि गिरोह लंबे समय से सुनियोजित तरीके से अपराध कर रहा था।

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पुलिस का बयान

ग्वालियर क्राइम ब्रांच के अधिकारियों ने बताया:

आरोपियों के खिलाफ धारा 420, 467, 468 और 471 सहित अन्य धाराओं में मुकदमा दर्ज किया गया है।

यह भी जांच की जा रही है कि उन्होंने और किन जिलों में ठगी और वसूली की घटनाओं को अंजाम दिया है।

पुलिस आरोपियों के आपराधिक रिकॉर्ड की भी जांच कर रही है।

दहशत में स्थानीय लोग

इस घटना के सामने आने के बाद ग्वालियर और आसपास के इलाके के लोग सकते में हैं।

ग्रामीणों और वाहन चालकों का कहना है कि जब पुलिस की वर्दी में ठग (fake-police ) घूम रहे हों, तो असली और नकली में फर्क करना मुश्किल हो जाता है।

लोग अब प्रशासन से सुरक्षा बढ़ाने की मांग कर रहे हैं।

पुलिस की सख्त चेतावनी

ग्वालियर पुलिस अधिकारियों ने साफ कहा है कि इस तरह की ठगी (fake-police) और वसूली किसी भी कीमत पर बर्दाश्त नहीं की जाएगी।

नकली पुलिस गिरोह के खिलाफ अभियान चलाया जाएगा।

लोगों से अपील की गई है कि संदिग्ध व्यक्तियों या नकली पुलिस की गतिविधियों की तुरंत सूचना दें।

अधिकारी बोले कि यह घटना समाज के लिए एक गंभीर चेतावनी है और भविष्य में इस तरह के अपराध रोकने के लिए सख्त कदम उठाए जाएंगे।

निष्कर्ष

ग्वालियर में पकड़ा गया यह नकली पुलिस (fake-police) गिरोह इस बात का सबूत है कि अपराधी किस हद तक जाकर ठगी कर सकते हैं।

कभी (fake-police )वर्दी पहनकर वसूली, तो कभी नौकरी दिलाने का झांसा देकर ठगी – इन बदमाशों ने अपराध की नई स्क्रिप्ट लिखी।

फिलहाल चारों आरोपी सलाखों के पीछे हैं और पुलिस उनसे पूछताछ कर रही है।

अब देखना यह होगा कि जांच में और कितने राज़ सामने आते हैं और क्या प्रशासन ऐसे (fake-police) गिरोहों पर पूरी तरह से नकेल कस पाता है या नहीं।

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