केंद्र सरकार के 8.23 लाख से ज्यादा मंजूर पद खाली, RTI में सामने आई प्रशासनिक स्टाफ की बड़ी कमी
RTI के अनुसार 1 मार्च 2024 तक केंद्र सरकार के सिविल विभागों में 39.23 लाख मंजूर पदों में से 8.23 लाख से ज्यादा खाली थे। रेलवे, रक्षा और गृह मंत्रालय में बड़ी रिक्तियां।


भोपाल। देश में सरकारी नौकरी की तैयारी कर रहे लाखों युवाओं के बीच केंद्र सरकार के विभागों में खाली पड़े पदों को लेकर एक बड़ी जानकारी सामने आई है। RTI के जरिए मिली जानकारी के मुताबिक, केंद्र सरकार के सिविल विभागों में 8,23,656 मंजूर पद खाली हैं। ये आंकड़े 1 मार्च 2024 की स्थिति पर आधारित हैं।
महत्वपूर्ण बात यह है कि इन आंकड़ों में पब्लिक सेक्टर बैंक और सार्वजनिक क्षेत्र के उपक्रम (PSU) शामिल नहीं हैं। जानकारी में केंद्र सरकार के विभिन्न मंत्रालयों और विभागों के नियमित सिविलियन कर्मचारियों की स्थिति बताई गई है।
RTI से मिली जानकारी के अनुसार, केंद्र सरकार के विभिन्न सिविल विभागों में कुल 39,23,212 पद मंजूर थे। इनमें से 1 मार्च 2024 तक 30,99,556 कर्मचारी कार्यरत थे। इस तरह मंजूर पदों में करीब 21 प्रतिशत पद खाली थे।
हर पांच में से एक से ज्यादा पद खाली
नीमच निवासी RTI एक्टिविस्ट चंद्र शेखर गौर द्वारा मांगी गई जानकारी के अनुसार, केंद्र सरकार के मंजूर सिविल पदों में हर पांच में से एक से ज्यादा पद पर कर्मचारी कार्यरत नहीं था।
गौर ने कहा कि देश में बेरोजगारी और सरकारी नौकरी के लिए युवाओं के बीच बढ़ती प्रतिस्पर्धा के दौर में इतने बड़े पैमाने पर पदों का खाली रहना चिंता का विषय है। उनके अनुसार, सरकार को इन पदों को भरने की प्रक्रिया को प्राथमिकता देते हुए मिशन मोड में आगे बढ़ाना चाहिए।
इससे एक तरफ युवाओं को रोजगार के अवसर मिल सकते हैं, वहीं दूसरी तरफ सरकारी विभागों की कार्यक्षमता में भी सुधार हो सकता है।
राष्ट्रपति सचिवालय में 35.74 प्रतिशत पद खाली
RTI में सामने आए आंकड़ों के अनुसार, कर्मचारियों की कमी केंद्र सरकार के शीर्ष संस्थानों तक भी दिखाई देती है।
राष्ट्रपति सचिवालय में कुल 803 पद मंजूर थे, लेकिन 1 मार्च 2024 तक केवल 516 कर्मचारी कार्यरत थे। इस तरह 287 पद खाली थे। यह कुल मंजूर पदों का करीब 35.74 प्रतिशत है।
इसी तरह प्रधानमंत्री कार्यालय (PMO) में 441 मंजूर पदों के मुकाबले 315 कर्मचारी कार्यरत थे। यहां 126 पद खाली थे, जो कुल मंजूर पदों का करीब 28.57 प्रतिशत है।
इस तरह राष्ट्रपति सचिवालय और PMO जैसे महत्वपूर्ण कार्यालयों में भी मंजूर पदों और वास्तविक कर्मचारियों की संख्या के बीच उल्लेखनीय अंतर दिखाई देता है।
19 अगस्त को जारी जवाब में क्या कहा गया?
19 अगस्त को दिए गए जवाब में डिपार्टमेंट ऑफ एक्सपेंडिचर की पे रिसर्च यूनिट ने नियमित केंद्रीय सरकारी सिविलियन कर्मचारियों की अनुमानित संख्या की जानकारी दी।
इसमें 1 मार्च 2024 तक मंत्रालय और विभागवार मंजूर पदों तथा कार्यरत कर्मचारियों की संख्या बताई गई है। आंकड़ों से कागजों पर स्वीकृत प्रशासनिक ढांचे और वास्तव में काम कर रहे कर्मचारियों के बीच अंतर सामने आता है।
रक्षा मंत्रालय के सिविलियन विभाग में 2.42 लाख पद खाली
कर्मचारियों की कमी के मामले में रक्षा मंत्रालय के सिविलियन विभाग का आंकड़ा सबसे ज्यादा चौंकाने वाला है।
रक्षा मंत्रालय के सिविलियन विभाग में कुल 5,56,248 पद मंजूर थे, जबकि केवल 3,14,005 कर्मचारी कार्यरत थे। इस तरह 2,42,243 पद खाली थे।
यह मंजूर सिविलियन पदों का करीब 43.5 प्रतिशत है।
यहां यह स्पष्ट करना जरूरी है कि ये आंकड़े रक्षा मंत्रालय के सिविलियन कर्मचारियों से संबंधित हैं। इन्हें भारतीय सेना, नौसेना या वायुसेना में सैन्य पदों की रिक्तियों के साथ नहीं जोड़ा जाना चाहिए।
रेलवे में 2.40 लाख से ज्यादा पद खाली
देश के सबसे बड़े नियोक्ताओं और विशाल परिवहन नेटवर्क में शामिल भारतीय रेलवे में भी बड़ी संख्या में पद खाली थे।
रेलवे में कुल 14,79,701 पद मंजूर थे। इनमें से 12,39,576 कर्मचारी कार्यरत थे। इस तरह 2,40,125 पद खाली थे।
RTI में सामने आई कुल 8.23 लाख से ज्यादा रिक्तियों में अकेले रेलवे की हिस्सेदारी करीब 30 प्रतिशत बैठती है।
रक्षा मंत्रालय के सिविलियन विभाग और रेलवे को मिलाकर ही 4.82 लाख से ज्यादा पद खाली थे। यानी कुल रिक्तियों के आधे से ज्यादा पद इन दोनों बड़े संस्थानों में ही खाली थे।
गृह मंत्रालय में 1.10 लाख से ज्यादा पद रिक्त
देश की आंतरिक सुरक्षा और प्रशासन से जुड़े गृह मंत्रालय में भी कर्मचारियों की कमी सामने आई है।
गृह मंत्रालय में 11,18,233 पद मंजूर थे, जबकि 10,07,348 कर्मचारी कार्यरत थे। इस तरह 1,10,885 पद खाली थे।
प्रतिशत के लिहाज से यह कमी कुछ छोटे विभागों की तुलना में कम हो सकती है, लेकिन संख्या के लिहाज से गृह मंत्रालय में एक लाख से ज्यादा मंजूर पदों का खाली रहना महत्वपूर्ण है।
रक्षा मंत्रालय के सिविलियन विभाग, रेलवे और गृह मंत्रालय को मिलाकर करीब 5.93 लाख पद खाली थे। यानी RTI में सामने आई कुल रिक्तियों का लगभग तीन-चौथाई हिस्सा इन तीन बड़े विभागों में ही था।
डाक विभाग में 61 हजार से ज्यादा पद खाली
डाक विभाग में भी कर्मचारियों की कमी सामने आई। यहां कुल 2,53,124 पद मंजूर थे, जबकि 1,91,578 कर्मचारी कार्यरत थे।
इस तरह विभाग में 61,546 पद खाली थे।
डाक विभाग देश के दूरदराज और ग्रामीण क्षेत्रों तक सरकारी सेवाएं पहुंचाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है। ऐसे में बड़ी संख्या में पदों का खाली रहना विभाग की कार्यक्षमता के लिहाज से महत्वपूर्ण मुद्दा है।
राजस्व विभाग में करीब 39 प्रतिशत पद खाली
सरकार के टैक्स और राजस्व प्रशासन के लिहाज से महत्वपूर्ण राजस्व विभाग में भी बड़ी संख्या में पद खाली थे।
विभाग में 1,79,374 पद मंजूर थे, जबकि केवल 1,09,712 कर्मचारी कार्यरत थे। इस तरह 69,662 पद खाली थे।
यानी विभाग के करीब 39 प्रतिशत मंजूर पदों पर कर्मचारी कार्यरत नहीं थे।
कृषि विभाग में 34 प्रतिशत पद खाली
कृषि और किसान कल्याण विभाग में कुल 5,420 पद मंजूर थे। इनमें से 3,565 कर्मचारी कार्यरत थे।
इस तरह विभाग में 1,855 पद खाली थे, जो कुल मंजूर पदों का करीब 34 प्रतिशत है।
कृषि से जुड़े प्रशासनिक कामकाज, योजनाओं के क्रियान्वयन और किसानों तक सरकारी कार्यक्रमों की पहुंच के लिहाज से यह कमी महत्वपूर्ण मानी जा सकती है।
पशुपालन विभाग में आधे से ज्यादा पद खाली
पशुपालन और डेयरी विभाग में स्थिति और अधिक गंभीर दिखाई देती है।
विभाग में कुल 2,393 पद मंजूर थे, लेकिन केवल 1,015 कर्मचारी कार्यरत थे। इस तरह 1,378 पद खाली थे।
यानी विभाग के करीब 58 प्रतिशत मंजूर पद खाली थे।
वहीं मत्स्य पालन विभाग में 664 मंजूर पदों के मुकाबले 464 कर्मचारी कार्यरत थे। यहां 200 पद खाली थे।
पर्यावरण मंत्रालय में करीब 38 प्रतिशत रिक्तियां
पर्यावरण, वन और जलवायु परिवर्तन मंत्रालय में 5,127 पद मंजूर थे। इनमें से 3,170 कर्मचारी कार्यरत थे।
इस तरह 1,957 पद खाली थे, जो कुल मंजूर पदों का करीब 38 प्रतिशत है।
पर्यावरण प्रशासन, वन संरक्षण और जलवायु परिवर्तन से जुड़े कामों के बढ़ते दायरे के बीच यह रिक्तियां महत्वपूर्ण हैं।
श्रम एवं रोजगार मंत्रालय में 41 प्रतिशत से ज्यादा पद खाली
श्रम एवं रोजगार मंत्रालय में भी कर्मचारियों की कमी का आंकड़ा काफी बड़ा है।
यहां 6,302 पद मंजूर थे, जबकि 3,684 कर्मचारी कार्यरत थे। इस तरह 2,618 पद खाली थे।
यानी मंत्रालय के मंजूर पदों में 41 प्रतिशत से ज्यादा पद रिक्त थे।
शिक्षा विभाग में भी बड़ी संख्या में पद खाली
उच्च शिक्षा विभाग में 1,414 पद मंजूर थे, जबकि 892 कर्मचारी कार्यरत थे। यहां 522 पद खाली थे, जो करीब 37 प्रतिशत है।
वहीं स्कूल शिक्षा और साक्षरता विभाग में 365 मंजूर पदों के मुकाबले 278 कर्मचारी कार्यरत थे। यहां 87 पद खाली थे।
स्वास्थ्य विभाग में 1,500 से ज्यादा पद रिक्त
स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण विभाग में 27,427 पद मंजूर थे। इनमें से 25,845 कर्मचारी कार्यरत थे।
इस तरह विभाग में 1,582 पद खाली थे।
स्वास्थ्य अनुसंधान विभाग में स्थिति और अधिक गंभीर थी। यहां 62 मंजूर पदों में से केवल 28 कर्मचारी कार्यरत थे। यानी 34 पद खाली थे और आधे से ज्यादा पदों पर कर्मचारी नहीं थे।
आयुष विभाग में भी 432 मंजूर पदों के मुकाबले 199 कर्मचारी कार्यरत थे। यहां 233 पद खाली थे।
परमाणु ऊर्जा विभाग में 10 हजार से ज्यादा पद खाली
देश के वैज्ञानिक और रणनीतिक क्षेत्रों से जुड़े विभागों में भी रिक्तियां सामने आई हैं।
परमाणु ऊर्जा विभाग में 37,250 पद मंजूर थे, जबकि 27,016 कर्मचारी कार्यरत थे। इस तरह 10,234 पद खाली थे।
वहीं अंतरिक्ष विभाग में 19,200 मंजूर पदों के मुकाबले 15,074 कर्मचारी कार्यरत थे। यहां 4,126 पद खाली थे।
इलेक्ट्रॉनिक्स एवं सूचना प्रौद्योगिकी मंत्रालय में 6,527 मंजूर पदों के मुकाबले 4,846 कर्मचारी कार्यरत थे। इस विभाग में 1,681 पद खाली थे।
शहरी विकास और जल संसाधन विभाग भी प्रभावित
आवास एवं शहरी मामलों के मंत्रालय में 19,151 पद मंजूर थे, जबकि 14,559 कर्मचारी कार्यरत थे। इस तरह 4,592 पद खाली थे।
वहीं जल संसाधन, नदी विकास और गंगा कायाकल्प विभाग में 11,433 मंजूर पदों के मुकाबले 8,242 कर्मचारी कार्यरत थे। यहां 3,191 पद रिक्त थे।
उद्योग, सूचना और कानून से जुड़े विभागों में भी रिक्तियां
उद्योग एवं आंतरिक व्यापार संवर्धन विभाग में 3,807 पद मंजूर थे, जबकि 2,454 कर्मचारी कार्यरत थे। यहां 1,353 पद खाली थे।
सूचना एवं प्रसारण मंत्रालय में 4,940 मंजूर पदों के मुकाबले 3,103 कर्मचारी कार्यरत थे। इस तरह 1,837 पद खाली थे, जो कुल मंजूर पदों का करीब 37 प्रतिशत है।
वहीं कानून एवं न्याय मंत्रालय में 3,478 मंजूर पदों के मुकाबले 2,211 कर्मचारी कार्यरत थे। यहां 1,267 पद रिक्त थे।
युवाओं के लिए रोजगार और प्रशासन के लिए चुनौती
RTI से सामने आए ये आंकड़े एक साथ दो महत्वपूर्ण सवाल खड़े करते हैं। पहला, देश में सरकारी नौकरी की तैयारी कर रहे लाखों युवाओं के लिए इन रिक्त पदों को भरने की प्रक्रिया कितनी तेज है। दूसरा, लंबे समय तक पद खाली रहने का असर सरकारी विभागों की कार्यक्षमता और नागरिक सेवाओं पर कितना पड़ रहा है।
हालांकि मंजूर पद और वास्तविक रिक्तियों के आंकड़े अलग-अलग भर्ती प्रक्रियाओं, कैडर नियमों और प्रशासनिक आवश्यकताओं से प्रभावित हो सकते हैं। इसलिए प्रत्येक विभाग में रिक्तियों की स्थिति और भर्ती की प्रक्रिया अलग हो सकती है।
फिर भी 8,23,656 मंजूर पदों का खाली होना केंद्र सरकार के मानव संसाधन प्रबंधन और सरकारी रोजगार के लिहाज से एक बड़ा आंकड़ा है। ऐसे में इन रिक्तियों को भरने की गति और भर्ती प्रक्रिया पर आने वाले समय में युवाओं की नजर बनी रहना स्वाभाविक है।
एक नजर में बड़े विभागों की रिक्तियां
विभाग मंजूर पद कार्यरत कर्मचारी खाली पद
रक्षा मंत्रालय के सिविलियन विभाग 5,56,248 3,14,005 2,42,243
रेलवे 14,79,701 12,39,576 2,40,125
गृह मंत्रालय 11,18,233 10,07,348 1,10,885
डाक विभाग 2,53,124 1,91,578 61,546
राजस्व विभाग 1,79,374 1,09,712 69,662
परमाणु ऊर्जा विभाग 37,250 27,016 10,234
कृषि एवं किसान कल्याण विभाग 5,420 3,565 1,855
पर्यावरण मंत्रालय 5,127 3,170 1,957
श्रम एवं रोजगार मंत्रालय 6,302 3,684 2,618
स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण 27,427 25,845 1,582
