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राजकाज · 24-03-2026

800 क्विंटल शासकीय गेहूं गायब: कोठरा वेयरहाउस बना घोटाले का केंद्र, व्यवस्था पर उठे गंभीर सवाल

नर्मदापुरम/सिवनी मालवा। सिवनी मालवा विधानसभा क्षेत्र की शिवपुर तहसील अंतर्गत ग्राम कोठरा स्थित पंचमुखी वेयरहाउस में शासकीय गेहूं गायब होने का बड़ा मामला सामने आया है। करीब 800 क्विंटल (लगभग 1600 बोरी) गेहूं स्टॉक से गायब मिलने के बाद प्रशासन में हड़कंप मच गया…

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समाचार डेस्क · 24-03-2026
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नर्मदापुरम/सिवनी मालवा। सिवनी मालवा विधानसभा क्षेत्र की शिवपुर तहसील अंतर्गत ग्राम कोठरा स्थित पंचमुखी वेयरहाउस में शासकीय गेहूं गायब होने का बड़ा मामला सामने आया है। करीब 800 क्विंटल (लगभग 1600 बोरी) गेहूं स्टॉक से गायब मिलने के बाद प्रशासन में हड़कंप मच गया है और भंडारण व्यवस्था की पारदर्शिता पर गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं।

जानकारी के अनुसार, मामले का खुलासा तब हुआ जब एसडीएम विजय राय अपनी टीम के साथ खरीदी केंद्र शुरू होने से पहले निरीक्षण के लिए पहुंचे। प्रारंभिक जांच में स्टॉक में गड़बड़ी की आशंका होने पर वेयरहाउस को तत्काल सील कर दिया गया। तीन दिन बाद, सल्फास का असर खत्म होने पर जब वेयरहाउस खोला गया और स्टॉक की गिनती की गई, तो 1600 बोरी गेहूं कम पाया गया।

एसडीएम विजय राय के अनुसार, रबी उपार्जन 2025-26 के तहत रखे गए गेहूं का भौतिक सत्यापन किया गया था, जिसमें भारी कमी सामने आई। वेयरहाउस संचालक से पूछताछ में संतोषजनक जवाब नहीं मिलने पर एफआईआर दर्ज करने के निर्देश दिए गए हैं।

सिर्फ चोरी नहीं, सिस्टम पर सवाल

यह मामला महज गेहूं चोरी का नहीं, बल्कि पूरी भंडारण व्यवस्था की विश्वसनीयता पर सवाल खड़ा करता है। सबसे बड़ा प्रश्न यह है कि इतनी बड़ी मात्रा में शासकीय अनाज आखिर गायब कैसे हो गया?

क्या वेयरहाउस की चाबी संचालक के पास होना नियमों के खिलाफ था? क्या बिना अधिकारियों की मिलीभगत के इतना बड़ा घोटाला संभव है? क्या गेहूं एक बार में गायब हुआ या लंबे समय से धीरे-धीरे बाहर किया जा रहा था?

रिकॉर्ड और निगरानी पर भी सवाल

स्टॉक रजिस्टर और वास्तविक स्टॉक का मिलान समय-समय पर क्यों नहीं किया गया? क्या कागजों में हेरफेर कर स्टॉक पूरा दिखाया जा रहा था? वेयरहाउस में सुरक्षा व्यवस्था—जैसे सीसीटीवी, गार्ड या निगरानी प्रणाली—कितनी प्रभावी थी और यदि थी तो नाकाम क्यों रही?

यह भी जांच का विषय है कि गेहूं को बाहर ले जाने में ट्रांसपोर्टरों की कोई भूमिका रही या नहीं। साथ ही, इस वेयरहाउस में कब से शासकीय अनाज रखा जा रहा था और क्या पहले कभी इसकी गहन जांच हुई थी?

क्या अन्य वेयरहाउस भी जांच के दायरे में आएंगे?

इस घटना ने पूरे क्षेत्र के अन्य वेयरहाउसों को भी संदेह के घेरे में ला दिया है। सवाल उठ रहा है कि क्षेत्र में कुल कितने वेयरहाउस हैं और क्या सभी का व्यापक ऑडिट किया जाएगा?

जिम्मेदारी और रिकवरी पर नजर

अब सबसे अहम मुद्दा यह है कि इस घोटाले की जिम्मेदारी किस स्तर तक तय होगी—क्या केवल वेयरहाउस संचालक पर कार्रवाई होगी या संबंधित अधिकारी-कर्मचारी भी जांच के दायरे में आएंगे? साथ ही, सरकार को हुए नुकसान की भरपाई कैसे की जाएगी और क्या दोषियों से रिकवरी की जाएगी?

फिलहाल पुलिस ने मामला दर्ज कर जांच शुरू कर दी है, लेकिन इस पूरे प्रकरण ने एक बार फिर यह साबित कर दिया है कि यदि निगरानी तंत्र मजबूत न हो, तो शासकीय संसाधनों की सुरक्षा केवल कागजों तक सीमित रह जाती है। अब देखना होगा कि जांच कितनी पारदर्शी होती है और कब तक इस घोटाले की पूरी सच्चाई सामने आती है।

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