विश्व पर्यावरण दिवस:वृक्षारोपण का मौसम प्रकृति से तय होता है, कैलेंडर से नहीं

हर वर्ष 5 जून को पूरी दुनिया में विश्व पर्यावरण दिवस मनाया जाता है। सरकारी विभाग,…

युवा मन की जंग: 2029 की राजनीति का नया रणक्षेत्र

भारतीय राजनीति में अक्सर चुनावी लड़ाइयों का केंद्र जातीय समीकरण, धार्मिक ध्रुवीकरण, क्षेत्रीय अस्मिता या आर्थिक…

गनेरा आंदोलन: 10 दिन सड़क पर जनता, 10 मिनट में आश्वासन और फिर लोकतंत्र की जीत का ऐलान!

ग्राम गनेरा का आंदोलन समाप्त हो गया। दस दिन तक ग्रामीण सड़क पर बैठे रहे, महिलाओं…

कॉकरोच जनता पार्टी: जब बेरोज़गारी का दर्द व्यंग्य बनकर फूटा

पिछले दिनों देश की अदालतों से निकला एक वाक्य आज सोशल मीडिया पर खलबली मचाए हुए…

सादगी का कैमरा संस्करण: राजनीति का नया मंच

भारतीय राजनीति में कभी सादगी एक स्वाभाविक पहचान हुआ करती थी। नेता जनता के बीच वैसे…

भारत के लोकतंत्र पर मंडराता अघोषित संकट!

भारत को दुनिया का सबसे बड़ा लोकतंत्र कहा जाता है। यह वाक्य लंबे समय तक केवल…

चरम राष्ट्रवाद : जब देशभक्ति धीरे-धीरे कट्टरता में बदलने लगती है

राष्ट्रप्रेम किसी भी समाज की सबसे सकारात्मक भावनाओं में से एक माना जाता है। अपने देश,…

चोर पहले से ज्ञात, केस फिर भी अज्ञात!

देश में अपराध रोकने की जिम्मेदारी जिस संस्था के कंधों पर है, आज वही संस्था कई…

प्रशिक्षण पहले, आदेश बाद में—माखननगर का प्रशासनिक खेल!

देश में जनगणना कोई सामान्य सरकारी प्रक्रिया नहीं होती, बल्कि यह राष्ट्र की नीतियों, योजनाओं और…

सफेद साड़ी, हवाई चप्पल और सियासत की धार

ममता बनर्जी का ‘सादा’ लेकिन ‘घातक’ राजनीतिक चेहरा भारतीय राजनीति में ताकत की पहचान अक्सर बड़े…

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