
माखननगर। मध्यप्रदेश वेयरहाउसिंग एंड लॉिस्टिक कॉर्पोरेशन की माखननगर शाखा में उस समय हड़कंप मच गया जब यात्रा देयक (TA) नहीं मिलने से नाराज़ कर्मचारियों ने अचानक काम बंद कर दिया। कर्मचारियों के हड़ताल पर जाने से गोदामों का संचालन प्रभावित हो गया और कई गोदाम संचालकों के फोन शाखा कार्यालय में लगातार बजते रहे कि “अभी तक गोदाम क्यों नहीं खुली?”
सबसे चौंकाने वाली बात यह रही कि पूरा मामला सामने आने के बाद भी जिम्मेदार अधिकारी अनजान बने रहे।
सूत्रों के मुताबिक कर्मचारियों को विगत एक माह से यात्रा देयक का भुगतान नहीं किया गया। आरोप है कि कर्मचारियों से लगातार ओवरटाइम काम कराया जा रहा था और कई कर्मचारियों को रात 10 बजे तक ड्यूटी करनी पड़ रही थी, लेकिन बदले में न समय पर भुगतान मिला और न ही कोई स्पष्ट जवाब।
जब शाखा प्रबंधक हेमंत चंदेल से इस संबंध में चर्चा करने का प्रयास किया गया तो उन्होंने फोन उठाना तक उचित नहीं समझा।
वहीं आरएम अतुल सोरठे ने सिर्फ इतना कहा — “मैं दिखवाता हूं।”
अब सवाल यह उठ रहा है कि आखिर एक महीने से कर्मचारियों का यात्रा देयक लंबित है और अधिकारियों को इसकी जानकारी तक नहीं?
क्या शाखा स्तर पर मनमानी चल रही है?
क्या कर्मचारियों का आर्थिक शोषण किया जा रहा है?
यदि मामला इतना गंभीर था तो उच्च अधिकारियों ने समय रहते हस्तक्षेप क्यों नहीं किया?
नाम न छापने की शर्त पर कर्मचारियों ने बताया कि लगातार दबाव में काम कराया जा रहा था। कर्मचारियों का कहना है कि “भुगतान नहीं, आराम नहीं, फिर भी काम करो” जैसी स्थिति बना दी गई थी।
सूत्रों के अनुसार मामला बढ़ता देख शाखा प्रबंधक हेमंत चंदेल ने कर्मचारियों को सोमवार तक भुगतान कराने का आश्वासन दिया, जिसके बाद कर्मचारी वापस काम पर लौटे।
लेकिन बड़ा सवाल अभी भी कायम है —
अगर कर्मचारियों को उनका वैधानिक भुगतान समय पर नहीं मिलेगा तो वेयरहाउसिंग व्यवस्था आखिर कितने दिन भरोसे पर चलेगी?
यह मामला अब केवल यात्रा देयक का नहीं, बल्कि कर्मचारियों के सम्मान, श्रम अधिकार और विभागीय कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े कर रहा है।