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भोपाल · 5 मिनट पहले

मध्यप्रदेश में हर 150 किमी पर एयरपोर्ट, 75 किमी पर एयरस्ट्रिप और 45 किमी पर हेलीपैड की तैयारी

मध्यप्रदेश में हर 150 किमी पर एयरपोर्ट, 75 किमी पर एयरस्ट्रिप और 45 किमी पर हेलीपैड की तैयारी। 230 विधानसभा क्षेत्रों में स्थायी हेलीपैड की योजना।

दीपक शर्मा
दीपक शर्मा
Editor-in-Chief · 5 मिनट पहले
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मध्यप्रदेश में हर 150 किमी पर एयरपोर्ट, 75 किमी पर एयरस्ट्रिप और 45 किमी पर हेलीपैड की तैयारी

भोपाल। मध्यप्रदेश में हवाई कनेक्टिविटी को बड़े स्तर पर विस्तार देने की तैयारी की जा रही है। नागरिक विमानन नीति-2025 के तहत प्रदेश के दूरदराज और पर्यटन क्षेत्रों को हवाई नेटवर्क से जोड़ने के लिए हर 150 किलोमीटर पर एयरपोर्ट, 75 किलोमीटर पर एयरस्ट्रिप और 45 किलोमीटर पर हेलीपैड विकसित करने की दिशा में काम किया जा रहा है। इसके साथ ही प्रदेश के सभी 230 विधानसभा क्षेत्रों में स्थायी हेलीपैड बनाने की योजना भी प्रस्तावित है।

वर्तमान में प्रदेश में 8 एयरपोर्ट, 20 से अधिक एयरस्ट्रिप और करीब 220 हेलीपैड मौजूद हैं। सरकार का लक्ष्य आने वाले वर्षों में इस नेटवर्क को और मजबूत करना है, ताकि प्रदेश के प्रमुख शहरों के साथ-साथ छोटे शहरों, धार्मिक स्थलों, पर्यटन क्षेत्रों और आदिवासी अंचलों तक भी हवाई संपर्क बढ़ाया जा सके।

उज्जैन और शिवपुरी में चल रहा एयरपोर्ट का काम

प्रदेश में इंदौर, भोपाल, जबलपुर, ग्वालियर और खजुराहो लंबे समय से प्रमुख एयरपोर्ट के रूप में स्थापित हैं। इसके बाद रीवा, दतिया और सतना को भी एयरपोर्ट नेटवर्क से जोड़ा गया है। अब उज्जैन और शिवपुरी में एयरपोर्ट विकसित करने का काम चल रहा है।

इन दोनों एयरपोर्ट के पूरा होने के बाद प्रदेश में एयरपोर्ट की संख्या बढ़कर 10 हो जाएगी। इसके अलावा पांच नए एयरपोर्ट के विकास की स्वीकृति केंद्र स्तर पर प्रक्रियाधीन बताई गई है।

सिंगरौली समेत 10 एयरस्ट्रिप को एयरपोर्ट बनाने का प्रस्ताव

उड़ान योजना के तहत प्रदेश की 10 एयरस्ट्रिप को एयरपोर्ट के रूप में विकसित करने का प्रस्ताव है। इनमें सिंगरौली, सागर, नीमच, छिंदवाड़ा, मंडला, खंडवा, रतलाम, मंदसौर, उमरिया और शहडोल शामिल हैं।

इनमें सिंगरौली को प्राथमिकता दिए जाने की बात सामने आई है। यदि प्रस्ताव को मंजूरी मिलती है तो इन क्षेत्रों के लोगों को बड़े शहरों तक पहुंचने के लिए सड़क और रेल परिवहन पर निर्भरता कम करने में मदद मिल सकती है।

सिंहस्थ-2028 से पहले उज्जैन एयरपोर्ट पर फोकस

सिंहस्थ-2028 को देखते हुए उज्जैन के दताना-मताना एयरपोर्ट के विकास को विशेष प्राथमिकता दी जा रही है। आरसीएस उड़ान 5.2 के तहत शुरुआती चरण में यहां 1800 मीटर लंबा रनवे विकसित किया जा रहा है। भविष्य में रनवे की लंबाई बढ़ाकर 2700 मीटर करने की योजना है।

सिंहस्थ के दौरान उज्जैन में देश-विदेश से बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं के पहुंचने की संभावना को देखते हुए एयर कनेक्टिविटी को महत्वपूर्ण आधारभूत ढांचे के रूप में देखा जा रहा है।

इंदौर से अबूधाबी तक सीधी उड़ान

मध्यप्रदेश का अंतरराष्ट्रीय हवाई संपर्क भी लगातार बढ़ रहा है। इंदौर से दुबई के बाद अब अबूधाबी के लिए भी सीधी उड़ान शुरू हुई है। सरकार के अनुसार, इंदौर-अबूधाबी उड़ान मध्यप्रदेश नागरिक विमानन नीति-2025 के तहत वित्त पोषित प्रदेश की पहली अंतरराष्ट्रीय उड़ान है।

करीब 3 घंटे 15 मिनट की इस उड़ान से मध्यप्रदेश के व्यापार, पर्यटन और निवेश गतिविधियों को बढ़ावा मिलने की उम्मीद है। अंतरराष्ट्रीय कनेक्टिविटी बढ़ने से प्रदेश के कारोबारियों और पर्यटकों को भी लाभ मिलने की संभावना है।

एयर एंबुलेंस से 186 मरीजों को मदद

स्वास्थ्य सेवाओं में भी हवाई कनेक्टिविटी का इस्तेमाल बढ़ाया जा रहा है। प्रदेश में 29 मई 2024 से पीएमश्री एयर एंबुलेंस सेवा संचालित है। इसके तहत आयुष्मान कार्डधारियों को प्रदेश और प्रदेश के बाहर शासकीय तथा आयुष्मान योजना से जुड़े अस्पतालों तक निशुल्क हवाई परिवहन की सुविधा उपलब्ध कराई जाती है।

सरकार के अनुसार अब तक 186 मरीजों और दुर्घटना पीड़ितों को इस सेवा का लाभ मिल चुका है। गंभीर मरीजों को समय पर बेहतर चिकित्सा सुविधा उपलब्ध कराने में एयर एंबुलेंस को महत्वपूर्ण माना जा रहा है।

हेली पर्यटन से 5200 से ज्यादा यात्रियों ने किया सफर

मध्यप्रदेश में धार्मिक, हेरिटेज और वाइल्डलाइफ पर्यटन को भी हवाई नेटवर्क से जोड़ने पर जोर दिया जा रहा है। पीएमश्री हेली पर्यटन सेवा के तहत प्रमुख पर्यटन सर्किट संचालित किए जा रहे हैं।

इनमें इंदौर-उज्जैन-ओंकारेश्वर, भोपाल-चंदेरी-ओरछा और जबलपुर-मैहर-चित्रकूट-कान्हा-बांधवगढ़ सेक्टर शामिल हैं। सरकार के मुताबिक अब तक 5200 से अधिक यात्रियों ने हेली सेवा का इस्तेमाल किया है, जबकि 680 से ज्यादा जॉय राइड संचालित की जा चुकी हैं।

चार्टर्ड विमान का खर्च घटाने की तैयारी

राज्य सरकार को नया शासकीय विमान मिलने की भी तैयारी है। सरकार के अनुसार कोविड-19 के दौरान रेमडेसिविर की आपूर्ति के दौरान शासकीय विमान क्षतिग्रस्त होने के बाद से चार्टर्ड विमानों का उपयोग किया जा रहा है।

नए शासकीय विमान के आने के बाद विमान संचालन पर होने वाला खर्च मौजूदा खर्च का करीब एक-तिहाई रह जाने का दावा किया गया है। इससे सरकारी यात्राओं और विशेष परिस्थितियों में विमान के इस्तेमाल पर होने वाला खर्च कम करने में मदद मिलने की उम्मीद है।

पर्यटन, स्वास्थ्य और निवेश को मिलेगा नया कनेक्शन

मध्यप्रदेश में प्रस्तावित एयरपोर्ट, एयरस्ट्रिप और हेलीपैड नेटवर्क को केवल परिवहन सुविधा के विस्तार के तौर पर नहीं देखा जा रहा है। सरकार का लक्ष्य पर्यटन, स्वास्थ्य, व्यापार और निवेश गतिविधियों को भी इससे जोड़ना है।

खासकर सिंहस्थ-2028 से पहले उज्जैन एयरपोर्ट, सिंगरौली सहित प्रस्तावित नए एयरपोर्ट और हेली पर्यटन सेवाओं का विस्तार प्रदेश के विमानन ढांचे में बड़ा बदलाव ला सकता है। यदि प्रस्तावित परियोजनाएं तय समय पर पूरी होती हैं तो आने वाले वर्षों में मध्यप्रदेश के छोटे शहरों और दूरदराज के क्षेत्रों की हवाई कनेक्टिविटी में उल्लेखनीय बढ़ोतरी देखने को मिल सकती है।

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