हरियाली अमावस्या 2026: कब है हरियाली अमावस्या? जानें तारीख और महत्व
हरियाली अमावस्या 2026 कब मनाई जाएगी? जानें 12 अगस्त की तारीख, अमावस्या तिथि, भगवान शिव की पूजा, पितृ तर्पण और पौधरोपण का धार्मिक महत्व।


सावन का महीना भगवान शिव की आराधना के लिए विशेष माना जाता है। इस दौरान शिव पूजा के साथ कई धार्मिक पर्व भी मनाए जाते हैं। इन्हीं में हरियाली अमावस्या का पर्व भी महत्वपूर्ण माना जाता है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, इस दिन भगवान शिव और माता पार्वती की पूजा करने, पितरों का तर्पण करने और पौधरोपण करने का विशेष महत्व है।
हरियाली अमावस्या को प्रकृति और पितरों से जुड़ा पर्व भी माना जाता है। इस दिन लोग पेड़-पौधे लगाते हैं और अपने पूर्वजों की शांति के लिए तर्पण आदि करते हैं।
हरियाली अमावस्या 2026 कब है?
पंचांग के अनुसार, सावन माह की अमावस्या तिथि 11 अगस्त 2026 को दोपहर 3 बजकर 22 मिनट से शुरू होकर 12 अगस्त 2026 को दोपहर 12 बजकर 36 मिनट तक रहेगी। उदया तिथि के आधार पर हरियाली अमावस्या 12 अगस्त 2026, बुधवार को मनाई जाएगी।
पूजा या तर्पण के लिए स्थानीय पंचांग के अनुसार समय देखना उचित रहेगा, क्योंकि विभिन्न स्थानों पर सूर्योदय और तिथि के समय में अंतर हो सकता है।
हरियाली अमावस्या का क्या है धार्मिक महत्व?
धार्मिक मान्यताओं के अनुसार हरियाली अमावस्या के दिन प्रकृति की पूजा और पौधरोपण को विशेष महत्व दिया जाता है। सावन में चारों ओर हरियाली छाने के कारण इस अमावस्या का संबंध प्रकृति और पर्यावरण से भी जोड़ा जाता है।
मान्यता है कि इस दिन पेड़-पौधे लगाने से शुभ फल प्राप्त होता है। हालांकि, इन धार्मिक मान्यताओं का कोई वैज्ञानिक प्रमाण नहीं है।
भगवान शिव और माता पार्वती की पूजा
हरियाली अमावस्या के दिन भगवान शिव और माता पार्वती की पूजा करने की परंपरा भी है। श्रद्धालु सुबह स्नान के बाद भगवान शिव का जलाभिषेक करते हैं और बेलपत्र सहित अन्य पूजन सामग्री अर्पित करते हैं।
धार्मिक मान्यता के अनुसार, सावन में शिव आराधना करने से सुख-शांति और समृद्धि की प्राप्ति होती है। श्रद्धालु अपनी श्रद्धा के अनुसार इस दिन पूजा-पाठ और धार्मिक अनुष्ठान करते हैं।
पितरों के लिए तर्पण की भी मान्यता
हरियाली अमावस्या को पितरों के निमित्त तर्पण और श्राद्ध कर्म करने की भी परंपरा है। मान्यता है कि इस दिन पूर्वजों का स्मरण और तर्पण करने से उन्हें शांति मिलती है तथा परिवार पर पितरों का आशीर्वाद बना रहता है।
पितृ दोष से मुक्ति जैसी मान्यताएं ज्योतिष और धार्मिक परंपराओं से जुड़ी हैं। इन्हें आस्था के रूप में ही देखा जाना चाहिए।
पौधरोपण को दें प्राथमिकता
हरियाली अमावस्या प्रकृति के संरक्षण का संदेश देने वाला अवसर भी बन सकती है। इस दिन घर, खेत, मंदिर परिसर या सार्वजनिक स्थानों पर पौधे लगाए जा सकते हैं।
पौधरोपण के साथ उनकी नियमित देखभाल करना भी उतना ही जरूरी है। केवल पौधा लगाने के बजाय उसके संरक्षण और विकास की जिम्मेदारी लेना पर्यावरण के लिए अधिक उपयोगी होगा।
जरूरी सूचना
हरियाली अमावस्या की तारीख और तिथि के समय को लेकर स्थानीय पंचांग में थोड़ा अंतर हो सकता है। इसलिए पूजा, तर्पण या किसी विशेष धार्मिक अनुष्ठान के लिए अपने क्षेत्र के पंचांग अथवा स्थानीय विद्वान से समय की पुष्टि कर लेना उचित रहेगा।
Disclaimer : इस लेख में दी गई धार्मिक मान्यताएं, पूजा-पद्धतियां और ज्योतिषीय धारणाएं सामान्य जानकारी के उद्देश्य से प्रस्तुत की गई हैं। DenvaPost इन मान्यताओं को वैज्ञानिक तथ्य या अंतिम सत्य के रूप में प्रस्तुत या प्रमाणित नहीं करता है। पाठकों से अनुरोध है कि धार्मिक अनुष्ठान अपनी आस्था, परंपरा और स्थानीय पंचांग के अनुसार करें। किसी भी विशेष धार्मिक या ज्योतिषीय निर्णय के लिए योग्य विशेषज्ञ से सलाह लेना उचित है

