ब्रेकिंग
गुरुवार, 10 सितंबर 2026
नए स्थान तलाशें
Denva Post
सभी खबरें
राजकाज · 08-07-2024

Bhopal News: माखनलाल यूनिवर्सिटी का नाम यूजीसी की डिफॉल्टर यूनिवर्सिटी की सूची से हटा

माखनलाल चतुर्वेदी विश्वविद्यालय - फोटो : सोशल मीडिया विश्वविद्यालय अनुदान आयोग (यूजीसी) ने लोकपाल की नियुक्ति न करने पर देश के डिफॉल्टर विश्वविद्यालयों की सूची से माखनलाल चतुर्वेदी राष्ट्रीय  पत्रकारिता एवं संचार विश्वविद्यालय का नाम हटा लिया है। गौरतलब ह…

पत्रकारिता कोर्स खोजें

देनवा पोस्ट
देनवा पोस्ट
समाचार डेस्क · 08-07-2024
शेयर
Bhopal News: माखनलाल यूनिवर्सिटी का नाम यूजीसी की डिफॉल्टर यूनिवर्सिटी की सूची से हटा

माखनलाल चतुर्वेदी विश्वविद्यालय

नए स्थान तलाशें

- फोटो : सोशल मीडिया

विश्वविद्यालय अनुदान आयोग (यूजीसी) ने लोकपाल की नियुक्ति न करने पर देश के डिफॉल्टर विश्वविद्यालयों की सूची से माखनलाल चतुर्वेदी राष्ट्रीय पत्रकारिता एवं संचार विश्वविद्यालय का नाम हटा लिया है।

गौरतलब है कि विश्वविद्यालय अनुदान आयोग ने लोकपाल की नियुक्ति न करने पर एमसीयू का नाम डिफॉल्टर विश्वविद्यालय की सूची में शामिल कर लिया था। जबकि एमसीयू के कुलगुरु डॉ केजी सुरेश के प्रयासों से विश्वविद्यालय द्वारा 7 जून को ही पूर्व सेवानिवृत प्रधान जिला एवं सत्र न्यायाधीश ओमप्रकाश सुनरया की नियुक्ति के आदेश जारी कर दिए गए थे। जिसके बाद कि एमसीयू के कुलगुरु ने इस विषय में गहरी आपत्ति दर्ज कराते हुए यूजीसी को पत्र लिखा था। विश्वविद्यालय अनुदान आयोग ने कदम उठाते हुए नई अपडेटेड सूची जारी कि जिसमें एमसीयू का नाम डिफॉल्टर विश्वविद्यालय की सूची से हटा दिया है।

संवादहीनता की वजह से हुई गलतफहमी

इस बारे में प्रो. सुरेश ने यूजीसी को धन्यवाद ज्ञापित किया है। उन्होंने आभार प्रकट करते हुए कहा कि संवादहीनता की वजह से कुछ गलतफहमी हो गई थी, जिसे यूजीसी ने सुधार लिया है। प्रो. सुरेश ने कहा कि लोकपाल की नियुक्ति संबंधी प्रक्रिया के बीच लोकसभा चुनाव के कारण आचार संहिता लग गई थी। इसके हटने के तत्काल बाद 7 जून को लोकपाल की नियुक्ति के आदेश एमसीयू प्रशासन द्वारा जारी कर दिए गए थे। उन्होंने कहा कि विश्वविद्यालय यूजीसी के सभी नियमों का सुचारु रूप से पालन करता है एवं शीघ्रता के साथ लागू भी करता है। कुलगुरु प्रो. सुरेश ने कहा कि राष्ट्रीय शिक्षा नीति को भी एमसीयू द्वारा तीन साल पहले ही लागू किया जा चुका है। जबकि कई विश्वविद्यालयों में अभी तक इसे लागू नहीं किया गया है। लेकिन एमसीयू हर विषय में गंभीरता दिखाते हुए बहुत शीघ्रता के साथ निर्णय लेता है।

यह खबर शेयर करें
शेयर