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भोपाल · 5 मिनट पहले

भोपाल में बनेगा आयुर्वेद का डिजिटल ट्रेनिंग सेंटर! ऑनलाइन पढ़ाई से देश-विदेश तक पहुंचेगा प्रशिक्षण

भोपाल में नेशनल इंस्टीट्यूट ऑफ ट्रेनिंग इन आयुर्वेदा बनाने की तैयारी है। ऑनलाइन, ऑफलाइन और हाइब्रिड मोड से देश-विदेश तक आयुर्वेद प्रशिक्षण देने की योजना है।

अशोक शर्मा
अशोक शर्मा
Sub Editor · 5 मिनट पहले
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भोपाल में बनेगा आयुर्वेद का डिजिटल ट्रेनिंग सेंटर! ऑनलाइन पढ़ाई से देश-विदेश तक पहुंचेगा प्रशिक्षण

भोपाल। मध्य प्रदेश में आयुर्वेद की पढ़ाई और प्रशिक्षण को डिजिटल प्लेटफॉर्म से जोड़ने की तैयारी की जा रही है। राजधानी भोपाल स्थित पं. खुशीलाल शासकीय आयुर्वेद संस्थान में प्रस्तावित नेशनल इंस्टीट्यूट ऑफ ट्रेनिंग इन आयुर्वेदा के जरिए चिकित्सकों, शिक्षकों, मेडिकल ऑफिसर्स, नर्सिंग स्टाफ, विद्यार्थियों और शोधार्थियों को ऑनलाइन और ऑफलाइन प्रशिक्षण उपलब्ध कराने की योजना है।

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प्रस्तावित संस्थान की खासियत यह होगी कि प्रशिक्षण लेने के लिए हर बार संस्थान पहुंचना जरूरी नहीं होगा। पाठ्यक्रमों को ऑनलाइन, ऑफलाइन और हाइब्रिड मोड में संचालित करने की तैयारी है। देश ही नहीं, विदेशों में रहने वाले लोग भी ऑनलाइन पंजीयन कर प्रशिक्षण कार्यक्रमों में शामिल हो सकेंगे। पाठ्यक्रम पूरा करने और निर्धारित मानक पूरा करने पर ऑनलाइन प्रमाणपत्र जारी करने की व्यवस्था भी प्रस्तावित है।

डॉक्टरों को नई तकनीक और उपचार पद्धतियों से अपडेट करने पर जोर

इस प्रोजेक्ट पर काम कर रहे पंडित खुशीलाल आयुर्वेद अस्पताल के डॉ. नयन राम के अनुसार, प्रस्तावित संस्थान का उद्देश्य केवल आयुर्वेद की पारंपरिक जानकारी तक सीमित नहीं रहेगा। बदलते चिकित्सा क्षेत्र और उपचार की नई तकनीकों को भी प्रशिक्षण कार्यक्रमों में शामिल किया जा सकेगा।

प्रशिक्षण में ऐसी तकनीकों और प्रक्रियाओं को भी शामिल करने की योजना है, जिनका सामना हर चिकित्सक या स्वास्थ्यकर्मी को रोजाना नहीं होता। एंडोस्कोपी, कोलपोस्कोपी और क्रायोसर्जरी जैसी तकनीकों के साथ उपचार के क्षेत्र में हो रहे नए प्रयोग और नवाचार भी प्रशिक्षण का हिस्सा बनाए जा सकते हैं।

इससे डॉक्टरों और नर्सिंग स्टाफ को समय-समय पर अपनी जानकारी और कौशल को अपडेट करने का अवसर मिल सकेगा।

योग से पंचकर्म और महिला स्वास्थ्य तक होंगे पाठ्यक्रम

प्रस्तावित संस्थान में आयुर्वेद से जुड़े विभिन्न विषयों पर प्रशिक्षण कार्यक्रम तैयार किए जाने की योजना है। इनमें योग, गर्भावस्था, पंचकर्म, शल्य चिकित्सा, महिला स्वास्थ्य और मर्म चिकित्सा जैसे विषय शामिल हो सकते हैं।

संस्थान से जुड़े कॉलेज में मर्म चिकित्सा का केंद्र भी स्थापित किया गया है। इसके अलावा आयुर्वेद के क्षेत्र में काम करने वाले शोधकर्ताओं, इंजीनियरों, गैर-सरकारी संगठनों से जुड़े लोगों और अन्य विशेषज्ञों की जरूरत के अनुसार विशेष प्रशिक्षण कार्यक्रम तैयार किए जा सकते हैं।

विशेषज्ञों के लेक्चर रिकॉर्ड होंगे, बनेगा डिजिटल स्टूडियो

इस योजना का एक महत्वपूर्ण हिस्सा डिजिटल कंटेंट तैयार करना होगा। इसके लिए संस्थान में रिकॉर्डिंग और एडिटिंग की सुविधा वाला डिजिटल स्टूडियो विकसित करने की योजना है।

देशभर के विषय विशेषज्ञों को आमंत्रित कर उनके व्याख्यान रिकॉर्ड किए जा सकेंगे। इन व्याख्यानों को लंबे पाठ्यक्रमों के रूप में सुरक्षित रखने के साथ-साथ छोटे वीडियो, रील और पॉडकास्ट के रूप में भी तैयार किया जा सकेगा।

इसके लिए सर्वर और पॉडकास्ट स्टूडियो विकसित करने की योजना भी प्रस्तावित है।

30 से 40 लोगों का ऑनलाइन बैच, परीक्षा के बाद प्रमाणपत्र

प्रस्तावित प्रशिक्षण व्यवस्था केवल रिकॉर्ड किए गए वीडियो तक सीमित नहीं होगी। किसी विषय पर पूरा पाठ्यक्रम करने वाले करीब 30 से 40 लोगों का ऑनलाइन बैच बनाया जा सकेगा।

वेब के माध्यम से विशेषज्ञों के साथ लाइव प्रशिक्षण कराया जा सकता है। पाठ्यक्रम के दौरान प्रशिक्षणार्थियों के ज्ञान का आकलन करने के लिए परीक्षा की व्यवस्था भी प्रस्तावित है। प्रशिक्षण पूरा करने और निर्धारित मानक हासिल करने वाले प्रतिभागियों को ऑनलाइन प्रमाणपत्र जारी किया जा सकेगा।

आम लोग और मरीज भी समझ सकेंगे आयुर्वेद की बुनियादी बातें

प्रस्तावित संस्थान का दायरा केवल डॉक्टरों और स्वास्थ्यकर्मियों तक सीमित रखने की योजना नहीं है। आम नागरिक और मरीज भी आयुर्वेद के मूल सिद्धांतों तथा बुनियादी जानकारी से जुड़े पाठ्यक्रम कर सकेंगे।

आम लोगों के लिए हर पाठ्यक्रम में प्रमाणपत्र जरूरी नहीं होगा। हालांकि, जिन पाठ्यक्रमों में परीक्षा का प्रावधान होगा, उन्हें सफलतापूर्वक पूरा करने वाले प्रतिभागियों को प्रमाणपत्र देने का विकल्प रखा जा सकता है।

इसका उद्देश्य आम लोगों तक आयुर्वेद से जुड़ी प्रमाणिक और व्यवस्थित बुनियादी जानकारी पहुंचाना है।

देश ही नहीं, विदेशों तक पहुंचेगा आयुर्वेद प्रशिक्षण

डिजिटल प्लेटफॉर्म इस प्रस्तावित संस्थान की सबसे अहम विशेषताओं में से एक होगा। ऑनलाइन पंजीयन के बाद प्रशिक्षणार्थी अपने स्थान से ही सर्वर के माध्यम से पाठ्यक्रम की सामग्री और प्रशिक्षण सत्रों से जुड़ सकेंगे।

पाठ्यक्रम पूरा होने के बाद प्रमाणपत्र भी ऑनलाइन उपलब्ध कराया जा सकेगा। इससे आयुर्वेद प्रशिक्षण को संस्थान की भौगोलिक सीमा से बाहर ले जाने की संभावना बनेगी।

यदि योजना प्रस्तावित स्वरूप में आगे बढ़ती है तो भोपाल का यह संस्थान आयुर्वेद के डिजिटल प्रशिक्षण, सतत ज्ञानवर्धन और विशेषज्ञ प्रशिक्षण के लिए एक प्लेटफॉर्म के रूप में विकसित किया जा सकता है। इससे चिकित्सकों और स्वास्थ्यकर्मियों को बदलती चिकित्सा तकनीकों के साथ अपडेट रहने का अवसर मिलेगा, वहीं आम लोगों को भी आयुर्वेद के मूल सिद्धांतों को समझने के लिए व्यवस्थित ऑनलाइन पाठ्यक्रम उपलब्ध हो सकेंगे।

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