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भोपाल · 24 मिनट पहले

भोपाल नगर निगम पर 47 भैंसों का बोझ, 10 महीने में चारे पर खर्च हुए 16 लाख रुपये से ज्यादा

कोर्ट में मामला लंबित होने से नहीं हो सकी नीलामी, कांजी हाउस में 9 भैंसों की मौत; अब इटखेड़ी पुलिस को वापस सौंपने की तैयारी

दीपक शर्मा
दीपक शर्मा
Editor-in-Chief · 24 मिनट पहले
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भोपाल नगर निगम पर 47 भैंसों का बोझ, 10 महीने में चारे पर खर्च हुए 16 लाख रुपये से ज्यादा

भोपाल। भोपाल नगर निगम के लिए 47 भैंसों का रखरखाव अब आर्थिक बोझ और प्रशासनिक परेशानी का कारण बन गया है। अरवलिया स्थित नगर निगम के कांजी हाउस में रखी इन भैंसों के चारे पर पिछले करीब 10 महीने में 16 लाख रुपये से अधिक खर्च हो चुके हैं। मामला अदालत में लंबित होने के कारण नगर निगम इनकी नीलामी भी नहीं कर पा रहा है। लगातार बढ़ते खर्च और पशुओं की देखभाल की जिम्मेदारी के बीच अब निगम ने भैंसों को इटखेड़ी पुलिस को वापस सौंपने की तैयारी शुरू कर दी है।

नगर निगम के गोवर्धन प्रोजेक्ट ने इस संबंध में वरिष्ठ अधिकारियों से अनुमति मांगी है। अनुमति मिलने के बाद इटखेड़ी पुलिस को पत्र भेजकर भैंसों को वापस लेने का अनुरोध किया जाएगा। साथ ही अब तक चारे और देखभाल पर खर्च की गई राशि का पूरा ब्योरा भी पुलिस को उपलब्ध कराया जाएगा।

जनवरी 2026 से कांजी हाउस में रखी हैं भैंसें

नगर निगम के अधिकारियों के मुताबिक, इटखेड़ी पुलिस ने जनवरी 2026 से अब तक 49 भैंसों को ट्रकों में कथित तौर पर अवैध तरीके से ले जाते हुए पकड़ा था। पुलिस ने पशु क्रूरता निवारण अधिनियम के तहत कार्रवाई करते हुए ट्रकों और भैंसों को जब्त किया था। मामला अदालत में पहुंचने के बाद ट्रक छोड़ दिए गए, लेकिन भैंसों को नगर निगम के कांजी हाउस में रखा गया।

इसके बाद से ही पशुओं के चारे, रखरखाव और देखभाल की जिम्मेदारी नगर निगम पर आ गई। निगम के रिकॉर्ड के अनुसार, इस अवधि में चारे पर 16 लाख रुपये से अधिक खर्च हो चुके हैं। अदालत में मामला लंबित होने के कारण निगम के सामने यह भी समस्या है कि वह पशुओं के संबंध में अपने स्तर पर कोई अंतिम निर्णय नहीं ले पा रहा है।

9 भैंसों की मौत, चार बछड़ों का हुआ जन्म

कांजी हाउस में रखी गई 49 भैंसों में से अब तक नौ की मौत हो चुकी है, जबकि इसी दौरान चार बछड़ों का जन्म भी हुआ है। इस तरह पशुओं की संख्या और उनकी देखभाल से जुड़ी परिस्थितियां भी बदलती रही हैं।

अधिकारियों के अनुसार, किसी भैंस की मौत होने पर गोवर्धन प्रोजेक्ट को इटखेड़ी पुलिस को सूचना देनी पड़ती है। पुलिस की अनुमति के बाद ही पोस्टमार्टम की प्रक्रिया पूरी की जाती है। बताया गया है कि हाल ही में करीब 45 दिनों के भीतर चार भैंसों की मौत हुई।

लगातार हो रही मौतों के बीच लंबे समय तक कांजी हाउस में बड़ी संख्या में पशुओं को रखने, उनकी उचित देखभाल और व्यवस्था पर भी सवाल खड़े हो रहे हैं। हालांकि, मौतों के कारणों को लेकर किसी निष्कर्ष पर पहुंचने के लिए संबंधित रिकॉर्ड और पोस्टमार्टम रिपोर्ट की जानकारी आवश्यक होगी।

नीलामी की कोशिश नाकाम, लगातार बढ़ रहा खर्च

नगर निगम ने भैंसों के रखरखाव पर खर्च हो रही राशि की भरपाई के लिए पहले उनकी नीलामी कराने की कोशिश की थी। इसके लिए इटखेड़ी पुलिस से दो बार अनुमति मांगी गई, लेकिन अदालत में मामला लंबित होने का हवाला देकर अनुमति नहीं दी गई।

नीलामी नहीं होने से नगर निगम को लगातार चारे और देखभाल पर खर्च करना पड़ रहा है। वहीं, पशुओं को कितने समय तक कांजी हाउस में रखा जाएगा, इस संबंध में भी स्थिति स्पष्ट नहीं हो सकी है।

अब पुलिस को वापस सौंपने की तैयारी

लगातार बढ़ते खर्च को देखते हुए नगर निगम का गोवर्धन प्रोजेक्ट अब भैंसों को इटखेड़ी पुलिस को वापस सौंपने के विकल्प पर आगे बढ़ रहा है। इसके लिए वरिष्ठ अधिकारियों की अनुमति मांगी गई है। अनुमति मिलने के बाद पुलिस को औपचारिक पत्र भेजा जाएगा और अब तक हुए खर्च का पूरा हिसाब भी दिया जाएगा।

फिलहाल यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि पुलिस इन भैंसों को वापस लेने के संबंध में क्या निर्णय लेती है और अदालत में लंबित मामले के बीच इनके रखरखाव की जिम्मेदारी किस तरह तय होती है। तब तक नगर निगम पर चारे और देखभाल का खर्च जारी रहने की स्थिति बनी हुई है।

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