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भोपाल · 30 मिनट पहले

MP में बिजली संकट से अगले सप्ताह मिल सकती है राहत, 4 हजार मेगावाट तक बढ़ेगी आपूर्ति; ऊर्जा मंत्री ने बताया प्लान

मध्य प्रदेश में बिजली कटौती से अगले सप्ताह राहत मिलने की उम्मीद है। ऊर्जा मंत्री प्रद्युम्न सिंह तोमर के मुताबिक, प्रदेश को 3 से 4 हजार मेगावाट अतिरिक्त बिजली मिल सकती है।

अशोक शर्मा
अशोक शर्मा
Sub Editor · 30 मिनट पहले
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MP में बिजली संकट से अगले सप्ताह मिल सकती है राहत, 4 हजार मेगावाट तक बढ़ेगी आपूर्ति; ऊर्जा मंत्री ने बताया प्लान

भोपाल। मध्य प्रदेश में बिजली की बढ़ती मांग और उत्पादन में कमी के कारण कई इलाकों में बिजली कटौती की शिकायतें सामने आ रही हैं। ग्रामीण क्षेत्रों में पर्याप्त बिजली उपलब्ध कराने और अघोषित कटौती बंद करने की मांग को लेकर विरोध प्रदर्शन भी हो रहे हैं। इस बीच प्रदेश सरकार ने अगले सप्ताह से बिजली संकट में राहत मिलने की उम्मीद जताई है। ऊर्जा मंत्री प्रद्युम्न सिंह तोमर के मुताबिक, अगले सप्ताह तक प्रदेश को 3 से 4 हजार मेगावाट अतिरिक्त बिजली मिल सकती है। इससे बिजली की मौजूदा कमी दूर करने और आपूर्ति व्यवस्था सुधारने में मदद मिलने की संभावना है।

सरकार के अनुसार, प्रदेश में बिजली की मांग पिछले साल के मुकाबले तेजी से बढ़ी है। कम बारिश, जलविद्युत उत्पादन में गिरावट और ताप विद्युत इकाइयों में तकनीकी खराबी के कारण आपूर्ति पर दबाव बढ़ा है। सरकार अब बंद इकाइयों को चालू करने, दूसरे राज्यों से बिजली लेने और बिजली एक्सचेंज से खरीद बढ़ाने के प्रयास कर रही है।

एक साल में बिजली की मांग 11,874 से बढ़कर 17,124 मेगावाट

ऊर्जा मंत्री प्रद्युम्न सिंह तोमर ने बताया कि 14 अक्टूबर 2025 को मध्य प्रदेश में बिजली की अधिकतम मांग 11,874 मेगावाट थी। वहीं, 14 अक्टूबर 2026 को यह बढ़कर 17,124 मेगावाट पहुंच गई। यानी एक साल में बिजली की अधिकतम मांग में करीब 5,250 मेगावाट की वृद्धि हुई है।

कृषि क्षेत्र में भी बिजली की जरूरत तेजी से बढ़ी है। पिछले साल 1 अक्टूबर को खेती के लिए बिजली की मांग 1,752 मेगावाट थी, जो इस साल इसी तारीख को बढ़कर 3,701 मेगावाट हो गई। कम बारिश वाले क्षेत्रों में सिंचाई और धान की फसल के लिए पलेवा को मांग बढ़ने की प्रमुख वजह बताया गया है।

मांग बढ़ने के बावजूद सरकार का कहना है कि इस साल 14 अक्टूबर तक पिछले साल की तुलना में 38.6 प्रतिशत अधिक बिजली की आपूर्ति की गई। पिछले साल 14 अक्टूबर तक 2,423 लाख यूनिट बिजली दी गई थी, जबकि इस साल यह आंकड़ा बढ़कर 3,310 लाख यूनिट हो गया।

कम बारिश से जलविद्युत उत्पादन में 1,500 मेगावाट की कमी

प्रदेश में कम बारिश का असर जलविद्युत उत्पादन पर भी पड़ा है। गांधीसागर, ओंकारेश्वर, इंदिरा सागर, राजघाट और सरदार सरोवर परियोजनाओं से मिलने वाली बिजली में करीब 1,500 मेगावाट की कमी बताई गई है।

इसके अलावा कोयले की कमी और तकनीकी समस्याओं के कारण ताप विद्युत इकाइयों का उत्पादन भी प्रभावित हुआ है। ऊर्जा मंत्री के अनुसार, ताप विद्युत गृहों में तकनीकी दिक्कतों के चलते करीब 1,000 मेगावाट उत्पादन प्रभावित हुआ है। इन कारणों से प्रदेश में बिजली की उपलब्धता और मांग के बीच अंतर बढ़ गया है।

बिजली एक्सचेंज में भी महंगी बिजली, दूसरे राज्यों से ली जा रही आपूर्ति

ऊर्जा मंत्री ने बताया कि 13 अक्टूबर को पीक आवर्स के दौरान इंडियन एनर्जी एक्सचेंज में बिजली खरीदने के लिए अधिकतम बोली करीब 70 हजार मेगावाट रही, जबकि बिक्री के लिए लगभग 500 मेगावाट बिजली उपलब्ध थी। उपलब्ध बिजली की दर करीब 10 रुपये प्रति यूनिट बताई गई।

आपूर्ति बनाए रखने के लिए मध्य प्रदेश पीक आवर्स में उत्तर प्रदेश से 500 मेगावाट बिजली ले रहा है। इसके साथ ही बिजली एक्सचेंज से अतिरिक्त बिजली खरीदने की कोशिश की जा रही है। वार्षिक रखरखाव के कारण बंद विद्युत इकाइयों को भी जल्द शुरू करने की तैयारी है।

इन बिजली इकाइयों से बढ़ेगी उपलब्धता

ऊर्जा मंत्री के अनुसार, खंडवा स्थित श्री सिंगाजी ताप विद्युत गृह और बिरसिंहपुर स्थित संजय गांधी ताप विद्युत गृह की इकाइयों में रखरखाव के बाद उत्पादन दोबारा शुरू हो गया है। इससे करीब 1,000 मेगावाट बिजली की उपलब्धता बढ़ी है।

इसके अलावा बिजली आपूर्ति बढ़ाने के लिए कई स्तरों पर प्रयास किए जा रहे हैं।

लैंको पावर और एनटीपीसी गाडरवाड़ा: 20 अक्टूबर 2026 तक इनकी इकाइयों से करीब 600 मेगावाट बिजली मिलने की उम्मीद है।

बंद ताप विद्युत इकाइयां: तकनीकी कारणों से बंद करीब 1,200 मेगावाट क्षमता की इकाइयों को एक से दो दिन में चालू करने के प्रयास किए जा रहे हैं।

बैंकिंग व्यवस्था: 16 अक्टूबर से इस व्यवस्था के जरिए 500 मेगावाट बिजली मिलने की बात कही गई है।

सरकार को उम्मीद है कि इन उपायों के जरिए अगले सप्ताह तक प्रदेश को 3 से 4 हजार मेगावाट अतिरिक्त बिजली उपलब्ध हो सकेगी। इससे बिजली कटौती की समस्या कम करने में मदद मिल सकती है।

रबी सीजन के लिए भी बिजली जुटाने की तैयारी

प्रदेश सरकार ने आगामी रबी सीजन में बिजली की जरूरतों को पूरा करने के लिए भी पहले से इंतजाम करने की बात कही है। ऊर्जा मंत्री के मुताबिक, पिछले साल 3,600 मिलियन यूनिट की तुलना में करीब 225 मिलियन यूनिट अतिरिक्त बिजली की अग्रिम बैंकिंग की गई है।

इस व्यवस्था के तहत 1 नवंबर 2026 से 10 मार्च 2027 तक अलग-अलग अवधि में 407 से 3,900 मेगावाट बिजली मिलने की बात कही गई है। इसके अलावा नवंबर 2026 से फरवरी 2027 के बीच 300 से 800 मेगावाट बिजली की अल्पकालिक खरीद के लिए निविदाएं आमंत्रित की गई हैं।

सरकार का दावा है कि अतिरिक्त बिजली की व्यवस्था और बंद इकाइयों को फिर से चालू करने के प्रयासों से आने वाले दिनों में आपूर्ति बेहतर होगी। हालांकि, प्रदेश के ग्रामीण और शहरी क्षेत्रों में बिजली कटौती से कितनी राहत मिलेगी, यह अतिरिक्त बिजली की वास्तविक उपलब्धता और मांग के बीच संतुलन पर निर्भर करेगा।

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