मखना हाथी की कब्र पर पहुंचा 25 हाथियों का झुंड, दूसरे दिन बांधवगढ़ से आए 30 हाथियों ने बढ़ाई चिंता
बाणसागर बैकवाटर क्षेत्र में हाथियों की बढ़ी आवाजाही, दो दल अलग-अलग बीटों में सक्रिय; वन विभाग ने ग्रामीणों को किया सतर्क


शहडोल। पश्चिम ब्यौहारी क्षेत्र के चंदौली में बिजली के तार की चपेट में आने से मारे गए मखना हाथी की मौत के बाद एक भावुक कर देने वाला घटनाक्रम सामने आया है। हाथी को दफनाए जाने के ठीक दूसरे दिन बाणसागर बांध के बैकवाटर क्षेत्र में रहने वाला 25 हाथियों का दल उसी स्थान पर पहुंचा, जहां मखना को दफनाया गया था। यह दल कुछ समय तक वहां रुका और फिर शांत भाव से आगे बढ़ गया। इसी बीच बांधवगढ़ टाइगर रिजर्व की ओर से करीब 30 हाथियों का एक अन्य दल भी क्षेत्र में पहुंच गया। दो बड़े हाथी दलों की सक्रियता से वन विभाग की चिंता बढ़ गई है। विभाग ने ग्रामीणों को सतर्क रहने की सलाह दी है।
मृत साथी की याद में उसी स्थान पर पहुंचा झुंड
उत्तर वन मंडल की डीएफओ तरुणा वर्मा के अनुसार, हाथियों की स्मरण शक्ति काफी तेज होती है। मखना हाथी पिछले तीन महीने से 25 हाथियों के इसी दल के साथ रह रहा था। चंदौली के राजस्व क्षेत्र में बिजली के तार की चपेट में आने से उसकी मौत हो गई थी। वन विभाग ने आवश्यक जांच प्रक्रिया पूरी करने के बाद हाथी को विधि-विधान से दफना दिया था।
इसके अगले ही दिन हाथियों का यह दल बाणसागर बैकवाटर क्षेत्र से निकलकर सीधे मखना के दफन स्थल पर पहुंचा। यहां कुछ देर रुकने के बाद दल झिरिया बीट की ओर चला गया। इस घटनाक्रम को लेकर डीएफओ ने हाथियों की तेज स्मरण शक्ति और अपने साथी के साथ उनके जुड़ाव का उल्लेख किया।
एक क्षेत्र में सक्रिय हैं हाथियों के दो बड़े दल
वर्तमान में उत्तर वन मंडल के अलग-अलग क्षेत्रों में हाथियों के दो दल विचरण कर रहे हैं। पहला दल करीब 25 हाथियों का है, जो पिछले दो से तीन वर्षों से बाणसागर बांध के बैकवाटर क्षेत्र में सक्रिय रहा है। फिलहाल इस दल की मौजूदगी झिरिया बीट क्षेत्र में बताई जा रही है।
वहीं, दूसरा दल बांधवगढ़ टाइगर रिजर्व से शहडोल क्षेत्र में पहुंचा है। इसमें लगभग 30 हाथी बताए जा रहे हैं, जो वर्तमान में गोदावल रेंज की घोरसा बीट में विचरण कर रहे हैं। दोनों दलों की लगातार बदलती लोकेशन के कारण वन विभाग को संवेदनशील गांवों में निगरानी बढ़ानी पड़ रही है।
हाथियों की आवाजाही का प्रमुख क्षेत्र बना शहडोल संभाग
शहडोल संभाग में पिछले कुछ वर्षों से हाथियों की आवाजाही बढ़ी है। बांधवगढ़ टाइगर रिजर्व में लगभग 60 से 70 हाथियों के स्थायी रूप से रहने की जानकारी दी गई है। टाइगर रिजर्व से सटे जंगलों के कारण हाथियों का आसपास के क्षेत्रों में आना-जाना बना रहता है।
खासकर फसलों के पकने के समय हाथियों के खेतों तक पहुंचने की घटनाएं सामने आती हैं। इसके अलावा छत्तीसगढ़ की ओर से अनूपपुर के रास्ते भी हाथियों के दल शहडोल संभाग में पहुंचते रहते हैं। हाथियों की इस आवाजाही के दौरान फसलों को नुकसान होने के साथ ग्रामीणों और वन्यजीवों के बीच टकराव की आशंका भी बनी रहती है।
ग्रामीणों के लिए अलर्ट, वन विभाग की गश्त तेज
दोनों हाथी दलों की मौजूदगी ने वन विभाग के सामने वन्यजीवों की सुरक्षा के साथ ग्रामीणों की जान-माल की रक्षा करने की चुनौती खड़ी कर दी है। हाथियों के अलग-अलग क्षेत्रों में विचरण करने और खेतों में खड़ी फसलों को नुकसान पहुंचाने की सूचनाओं के बीच मैदानी अमले को सतर्क रखा गया है।
वन विभाग की टीमें प्रभावित क्षेत्रों में लगातार गश्त कर रही हैं। संवेदनशील गांवों में मुनादी कराकर लोगों को हाथियों की मौजूदगी की जानकारी दी जा रही है और सावधानी बरतने की अपील की जा रही है।
वन अधिकारियों ने ग्रामीणों से कहा है कि वे हाथियों की मौजूदगी वाले क्षेत्रों में जाने से बचें, उनके करीब जाने या उन्हें छेड़ने का प्रयास न करें और सुरक्षित स्थानों पर रहें। हाथियों को देखने के लिए भीड़ न लगाएं और किसी भी गतिविधि की जानकारी तत्काल वन विभाग को दें।
मखना हाथी की मौत के बाद उसके साथी दल का दफन स्थल पर पहुंचना जहां वन्यजीवों की स्मरण शक्ति और सामाजिक व्यवहार को लेकर चर्चा का विषय बना हुआ है, वहीं क्षेत्र में दो बड़े हाथी दलों की मौजूदगी ने सुरक्षा संबंधी सतर्कता को और महत्वपूर्ण बना दिया है।
