नर्मदापुरम में तैयार होगी सबसे मीठे गन्ने की नई किस्म, पवारखेड़ा अनुसंधान केंद्र में 20 प्रजातियों पर शोध जारी

तमिलनाडु और गुजरात की उन्नत किस्मों का किया जा रहा अध्ययन, सफल प्रयोग से बढ़ेगी मिठास और उत्पादन

 

देशभर में मिठास घोलेगा MP का गन्ना; पवारखेड़ा अनुसंधान केंद्र में 20 प्रजातियों पर शोध, 1 साल में तैयार होगी फसल
कृषि अनुसंधान केंद्र पर अनुसंधान करते कृषि विज्ञानी
 

नर्मदापुरम। नर्मदापुरम जिले के पवारखेड़ा स्थित गन्ना अनुसंधान केंद्र में गन्ने की अधिक मिठास और बेहतर उत्पादन देने वाली नई किस्म विकसित करने की दिशा में महत्वपूर्ण अनुसंधान चल रहा है। इस परियोजना के तहत देश के विभिन्न राज्यों से लाई गई गन्ने की 20 उन्नत किस्मों का अध्ययन किया जा रहा है। कृषि वैज्ञानिकों का दावा है कि यदि यह प्रयोग सफल रहा तो आने वाले वर्षों में नर्मदापुरम का गन्ना अपनी अधिक मिठास के कारण देशभर में अलग पहचान बनाएगा।

देशभर की उन्नत किस्मों पर हो रहा अध्ययन

जवाहरलाल नेहरू कृषि विश्वविद्यालय, जबलपुर के अंतर्गत संचालित आंचलिक कृषि अनुसंधान केंद्र, पवारखेड़ा में इस समय तमिलनाडु के कोयंबटूर, गुजरात के नवसारी सहित विभिन्न क्षेत्रों से लाई गई करीब 20 गन्ना किस्मों पर अनुसंधान किया जा रहा है। वैज्ञानिक इन किस्मों के गुणों का अध्ययन कर एक नई संकर (हाइब्रिड) किस्म विकसित करने में जुटे हैं। इस प्रक्रिया को पूरा होने में लगभग एक वर्ष का समय लगने की संभावना है।

हाइब्रिडाइजेशन से तैयार होगी नई किस्म

कृषि वैज्ञानिकों के अनुसार नई किस्म तैयार करने के लिए दो या तीन उत्कृष्ट गन्ना प्रजातियों का चयन कर हाइब्रिडाइजेशन (संकरण) की प्रक्रिया अपनाई जाती है। अलग-अलग किस्मों का परागण (पॉलीनेशन) कर नई पौध तैयार की जाती है। प्रारंभिक चरण में इन्हें क्यारियों में लगाया जाता है और बाद में बड़े क्षेत्र में परीक्षण किया जाता है।

अनुसंधान के दौरान पौधों की ऊंचाई, मोटाई, प्रति हेक्टेयर उत्पादन, शर्करा (चीनी) की मात्रा, रोग प्रतिरोधक क्षमता और जलवायु अनुकूलता जैसे विभिन्न मानकों पर परीक्षण किया जाता है। सभी परीक्षण सफल होने के बाद केंद्रीय एवं राज्य किस्म मूल्यांकन समिति द्वारा नई किस्म को आधिकारिक मान्यता प्रदान की जाती है।

तीन मीटर तक लंबाई और अधिक मिठास की उम्मीद

कृषि वैज्ञानिकों का मानना है कि विकसित की जा रही नई किस्म की लंबाई करीब तीन मीटर तक हो सकती है। इसके साथ ही इसमें वर्तमान प्रचलित किस्मों की तुलना में अधिक शर्करा मात्रा होने की संभावना है, जिससे किसानों को बेहतर मूल्य और चीनी उद्योग को उच्च गुणवत्ता का कच्चा माल मिल सकेगा।

पहले भी विकसित हो चुकी हैं कई सफल किस्में

पवारखेड़ा अनुसंधान केंद्र इससे पहले भी गन्ने की कई उन्नत किस्में विकसित कर चुका है। केंद्र द्वारा विकसित कोजेएन-9505 और कोजेएन-86/600 जैसी किस्में किसानों के बीच लोकप्रिय रही हैं। वहीं कोजेएन-9509 किस्म प्रति हेक्टेयर लगभग 1100 क्विंटल तक उत्पादन देने में सक्षम है और इसमें करीब 22 प्रतिशत तक शर्करा पाई जाती है।

गन्ने के अलावा केंद्र ने गेहूं की उन्नत किस्म एमपीओ-1255 भी विकसित की थी, जिसे विशेष रूप से पास्ता निर्माण के लिए तैयार किया गया था।

कृषि वैज्ञानिक बोले

गन्ना अनुसंधान केंद्र, पवारखेड़ा के कृषि विज्ञानी आस्कर टोप्पो ने बताया कि अधिक उत्पादन और अधिक मिठास वाली गन्ना किस्म विकसित करने के लिए लगातार अनुसंधान किए जा रहे हैं। वर्तमान में एक नई उन्नत किस्म तैयार करने के उद्देश्य से विभिन्न प्रजातियों का अध्ययन जारी है। यदि यह अनुसंधान सफल होता है तो इसका सीधा लाभ किसानों, चीनी उद्योग और प्रदेश की कृषि अर्थव्यवस्था को मिलेगा।

 

 

 

image_pdfimage_print

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

error: Content is protected !!