
माखन नगर। पुरुषोत्तम मास के पावन अवसर पर आयोजित श्रीमद् भागवत महापुराण कथा के चतुर्थ दिवस में श्रीकृष्ण जन्मोत्सव बड़े हर्षोल्लास और भक्तिभाव के साथ मनाया गया। कथा स्थल पर भगवान श्रीकृष्ण के जन्म की दिव्य लीलाओं का मनोहारी वर्णन सुनकर श्रद्धालु भाव-विभोर हो उठे।
आसपास के ग्रामीण एवं शहरी क्षेत्रों से बड़ी संख्या में श्रद्धालु कथा श्रवण के लिए पहुंचे और भक्ति रस में सराबोर होकर भगवान श्रीकृष्ण के जन्मोत्सव का आनंद लिया।
वृंदावन से पधारे धर्माचार्य पंडित देवेंद्र कृष्ण शास्त्री ने अपने प्रवचन में कहा कि जब भगवान की भक्ति पूर्ण समर्पण और निष्काम भाव से की जाती है, तब भक्त का हृदय ही वृंदावन बन जाता है। उन्होंने कहा कि श्रीमद् भागवत कथा केवल एक धार्मिक आयोजन नहीं, बल्कि आत्मा के कल्याण और ईश्वर से जुड़ने का श्रेष्ठ माध्यम है।

कथा के दौरान भगवान श्रीकृष्ण के अवतरण की लीलाओं का भावपूर्ण वर्णन किया गया। जैसे ही ठाकुरजी के जन्म का प्रसंग आया, पूरा पंडाल “नंद के आनंद भयो, जय कन्हैया लाल की” के जयघोष से गूंज उठा। श्रद्धालुओं ने एक-दूसरे को बधाइयां दीं, भजन-कीर्तन किए और भगवान श्रीकृष्ण के जन्मोत्सव का उल्लासपूर्वक उत्सव मनाया।

धर्माचार्य पंडित देवेंद्र कृष्ण शास्त्री ने कहा कि श्रीमद् भागवत कथा का श्रवण मात्र करने से जीव का कल्याण होता है। करोड़ों जन्मों के पुण्य उदय होने पर ही मनुष्य को भागवत कथा सुनने का सौभाग्य प्राप्त होता है। उन्होंने कहा कि माखन नगर के श्रद्धालुओं को पुरुषोत्तम मास में इस दिव्य कथा का लाभ मिलना अत्यंत सौभाग्य की बात है।
कथा के समापन पर श्रद्धालुओं ने भगवान श्रीकृष्ण के चरणों में अपनी श्रद्धा अर्पित की और धर्म, भक्ति एवं सदाचार के मार्ग पर चलने का संकल्प लिया। आयोजन समिति ने सभी श्रद्धालुओं के प्रति आभार व्यक्त करते हुए आगामी दिनों में भी अधिक से अधिक संख्या में कथा श्रवण हेतु पहुंचने की अपील की।