गनेरा में फूटा ग्रामीणों का गुस्सा, अनिश्चितकालीन धरने पर बैठे ग्रामीण

माखननगर। ग्राम पंचायत गनेरा में संचालित वाइन शॉप को लेकर अब ग्रामीणों का आक्रोश खुलकर सामने आने लगा है। धार्मिक स्थलों, स्कूल और नर्मदा नदी के समीप शराब दुकान संचालित होने के विरोध में मंगलवार से ग्रामीणों ने अनिश्चितकालीन धरना शुरू कर दिया। ग्राम पंचायत, महिलाओं, युवाओं और बुजुर्गों सहित बड़ी संख्या में ग्रामीण धरना स्थल पर जुटे और प्रशासन के खिलाफ जमकर नाराजगी जाहिर की।

ग्रामीणों का आरोप है कि प्रशासन को कई बार शिकायत और ज्ञापन सौंपे जाने के बावजूद अब तक कोई कार्रवाई नहीं की गई, जिससे लोगों में भारी असंतोष है। धरने का नेतृत्व सरपंच कृष्ण कुमार झा कर रहे हैं, जिन्होंने कलेक्टर और जिला आबकारी अधिकारी को दिए आवेदन में शराब दुकान को तत्काल हटाने की मांग की है।

“मंदिर के सामने शराब, आखिर किसकी अनुमति से?”

ग्रामीणों का कहना है कि जिस स्थान पर वाइन शॉप संचालित हो रही है, वहां से महज 40 मीटर दूरी पर प्राचीन मां नर्मदा मंदिर और श्री हनुमान मंदिर स्थित हैं। रोजाना बड़ी संख्या में श्रद्धालु पूजा-अर्चना के लिए यहां पहुंचते हैं, लेकिन शराब दुकान के कारण धार्मिक वातावरण प्रभावित हो रहा है।

धरना स्थल पर मौजूद महिलाओं ने कहा कि मंदिर जाने वाली बेटियों और महिलाओं को शराबियों की हरकतों का सामना करना पड़ता है। शाम होते ही दुकान के आसपास शराब पीने वालों की भीड़ लग जाती है, जिससे गांव का माहौल खराब हो रहा है।

ग्रामीणों ने सवाल उठाया कि जब शासन धार्मिक स्थलों के आसपास शराब बिक्री पर नियंत्रण की बात करता है, तो फिर मंदिर के सामने शराब दुकान कैसे संचालित हो रही है? लोगों का कहना है कि यह केवल कानून का नहीं बल्कि आस्था और संस्कृति का भी प्रश्न है।

स्कूल के सामने शराब दुकान, बच्चों पर पड़ रहा बुरा असर

विरोध का दूसरा बड़ा कारण स्कूल के समीप शराब दुकान का संचालन है। ग्रामीणों के अनुसार श्रीकृष्ण आदर्श स्कूल का मुख्य प्रवेश द्वार सीधे शराब दुकान के सामने है। रोजाना स्कूली बच्चे उसी रास्ते से निकलते हैं और शराब खरीदने आने वाले लोगों का दृश्य देखते हैं।

अभिभावकों का कहना है कि इससे बच्चों के मानसिक और सामाजिक विकास पर गलत असर पड़ रहा है। कई बार शराब के नशे में लोग स्कूल के आसपास विवाद और अभद्रता करते देखे गए हैं। ग्रामीणों ने इसे “बच्चों के भविष्य के साथ खिलवाड़” बताया है। धरने में शामिल ग्रामीणों ने कहा कि सरकार एक ओर नशामुक्ति अभियान चलाती है, वहीं दूसरी ओर स्कूलों और धार्मिक स्थलों के सामने शराब दुकानें खोलकर विरोधाभासी संदेश दे रही है।

नर्मदा किनारे शराब बिक्री पर भी उठे सवाल

ग्राम पंचायत ने अपने ज्ञापन में मध्यप्रदेश शासन की वर्ष 2017-18 की आबकारी नीति का हवाला दिया है। पंचायत का दावा है कि संबंधित वाइन शॉप नर्मदा नदी चौकाघाट से पांच किलोमीटर से कम दूरी पर स्थित है, जबकि नीति के अनुसार नर्मदा नदी के दोनों तटों से पांच किलोमीटर की परिधि में देशी और विदेशी मदिरा दुकानों का संचालन प्रतिबंधित है।

ग्रामीणों का आरोप है कि यदि नियमों का पालन सही तरीके से किया जाए तो यह दुकान स्वतः अवैध की श्रेणी में आ जाएगी। लोगों ने प्रशासन पर नियमों की अनदेखी करने और शराब कारोबारियों को संरक्षण देने जैसे गंभीर आरोप भी लगाए।

“जब तक दुकान नहीं हटेगी, आंदोलन जारी रहेगा”

धरने पर बैठे ग्रामीणों ने स्पष्ट चेतावनी दी है कि जब तक शराब दुकान को हटाने का लिखित आदेश जारी नहीं किया जाता, तब तक आंदोलन जारी रहेगा। ग्रामीणों ने कहा कि यह लड़ाई केवल एक दुकान हटाने की नहीं, बल्कि गांव की सामाजिक और सांस्कृतिक पहचान बचाने की है।

प्रशासन पर निष्क्रियता के आरोप

ग्रामीणों का कहना है कि पहले भी कई बार शिकायतें की गईं, लेकिन हर बार केवल आश्वासन मिला। इससे लोगों में प्रशासन के प्रति नाराजगी और अविश्वास बढ़ा है। धरना स्थल पर ग्रामीणों ने प्रशासन के खिलाफ नारेबाजी करते हुए जल्द कार्रवाई की मांग की। स्थानीय लोगों का कहना है कि यदि समय रहते प्रशासन ने निर्णय नहीं लिया, तो आंदोलन और उग्र हो सकता है। ग्रामीणों ने चेतावनी दी कि आने वाले दिनों में सड़क जाम और बड़े जनआंदोलन की रणनीति भी बनाई जा सकती है।

गांव की लड़ाई अब जनभावना का मुद्दा

गनेरा का यह आंदोलन अब केवल पंचायत तक सीमित नहीं रह गया है। आसपास के गांवों से भी लोगों का समर्थन मिलने लगा है। ग्रामीणों का कहना है कि यह मुद्दा जनभावनाओं, धार्मिक आस्था, बच्चों के भविष्य और सामाजिक सुरक्षा से जुड़ा हुआ है।

धरना स्थल पर ग्रामीणों की एक ही मांग सुनाई दे रही है —“मंदिर और स्कूल के पास शराब दुकान नहीं चलेगी।”

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