रीवा में बदबूदार काला पानी सप्लाई, इंदौर त्रासदी के बाद भी प्रशासन बेखबर

Gemini_Generated_Image

रीवा। इंदौर में दूषित पानी के कारण हुई दुखद मौतों के बाद पूरे प्रदेश में हड़कंप मचा था और शासन स्तर पर सख्त निर्देश जारी किए गए थे। लेकिन विंध्य की राजधानी कहे जाने वाले रीवा शहर में प्रशासन की नींद अब भी नहीं खुली है। हैरानी की बात यह है कि प्रदेश के उपमुख्यमंत्री राजेंद्र शुक्ला के गृह क्षेत्र में ही जल संकट और दूषित पेयजल की स्थिति भयावह होती जा रही है।

रीवा नगर निगम क्षेत्र के वार्ड क्रमांक 11, 12, 15 और 16 में पिछले कई दिनों से नलों के माध्यम से बदबूदार और काला पानी सप्लाई किया जा रहा है। इस गंदे पानी के कारण हजारों परिवारों के स्वास्थ्य पर गंभीर खतरा मंडरा रहा है।

नालियों से जुड़ी पाइपलाइन, घरों तक पहुंच रहा कीचड़

स्थानीय रहवासियों का आरोप है कि पेयजल की पाइपलाइनें कई स्थानों पर क्षतिग्रस्त हैं और सीधे नालियों के संपर्क में आ गई हैं। जब नलों में पानी की सप्लाई चालू होती है, तो पाइपों में जमा नाली का कीचड़ और गंदा पानी घरों तक पहुंच रहा है। हालात ऐसे हैं कि पानी से उठने वाली तीव्र दुर्गंध के कारण लोग घरों के दरवाजे बंद करने को मजबूर हैं।

शिकायतें हुईं, लेकिन निरीक्षण तक नहीं

वार्ड 11, 12, 15 और 16 के निवासियों ने बताया कि उन्होंने नगर निगम और लोक स्वास्थ्य यांत्रिकी विभाग (PHE) को कई बार इस गंभीर समस्या की जानकारी दी, लेकिन अब तक न तो कोई निरीक्षण किया गया और न ही सुधार कार्य शुरू हुआ। इंदौर की घटना के बाद शासन ने स्पष्ट निर्देश दिए थे कि कहीं भी दूषित पानी की आपूर्ति न हो, इसके बावजूद रीवा नगर निगम और PHE विभाग की निष्क्रियता सवालों के घेरे में है।

बीमारियों का खतरा बढ़ा

दूषित पानी के सेवन से इन इलाकों में उल्टी, दस्त, पेट दर्द और चर्म रोगों के मामले बढ़ने लगे हैं। विशेष रूप से बच्चों और बुजुर्गों में संक्रमण का खतरा सबसे अधिक देखा जा रहा है। स्थानीय लोगों का कहना है,
“हम नियमित रूप से टैक्स भरते हैं, लेकिन बदले में प्रशासन हमें बीमारियां परोस रहा है।”

सवाल जो जवाब मांगते हैं

  • जब इंदौर जैसी घटना हो चुकी है, तो रीवा में प्रशासन ने इससे सबक क्यों नहीं लिया?
  • शिकायतों के बावजूद अब तक सुधार कार्य क्यों शुरू नहीं हुआ?
  • क्या उपमुख्यमंत्री के गृह क्षेत्र में भी जनता की जान की कोई कीमत नहीं है?
  • क्या प्रशासन किसी बड़ी त्रासदी का इंतजार कर रहा है?

रीवा जैसे वीआईपी क्षेत्र में दूषित पानी की आपूर्ति और प्रशासन की उदासीनता ने शासन-प्रशासन की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। अब देखना यह है कि जिम्मेदार अधिकारी कब जागते हैं और क्या किसी अनहोनी से पहले हालात सुधारे जाते हैं या नहीं।

image_pdfimage_print

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

error: Content is protected !!