उज्जैन। मध्यप्रदेश के उज्जैन जिले में पुलिस विभाग में नौकरी दिलाने के नाम पर लाखों रुपये की ठगी का मामला सामने आया है। आरोपी खुद को पुलिस महानिदेशक (डीजीपी) का रिश्तेदार बताकर लोगों को भरोसे में लेता था और पुलिस में भर्ती कराने का झांसा देकर रकम वसूलता था। मामले में पुलिस ने धोखाधड़ी का प्रकरण दर्ज कर जांच शुरू कर दी है।
जानकारी के अनुसार झारखेड़ी निवासी बालूसिंह पिता भेरूलाल वाड़िया के खिलाफ कई लोगों ने एसपी कार्यालय उज्जैन पहुंचकर शिकायत दर्ज कराई। पीड़ितों का आरोप है कि आरोपी ने खुद को डीजीपी कैलाश मकवाना का रिश्तेदार बताते हुए पुलिस विभाग में नौकरी लगवाने का भरोसा दिया था।
10 लोगों से वसूले करीब 25 लाख रुपये
शिकायतकर्ताओं के मुताबिक आरोपी ने अलग-अलग 10 लोगों से तीन से चार लाख रुपये तक लिए और कुल मिलाकर करीब 25 लाख रुपये की ठगी की। आरोप है कि पैसे लेने के बावजूद आरोपी किसी भी व्यक्ति की नौकरी नहीं लगवा सका।
जब पीड़ितों ने अपने रुपये वापस मांगे तो आरोपी ने गाली-गलौज की और जान से मारने की धमकी तक दे डाली। इसके बाद सभी पीड़ितों ने पुलिस की शरण ली।
किसी ने जमीन गिरवी रखी, किसी ने जमा पूंजी दी
एसडीओपी जेंडर लिंगजेरपा ने बताया कि आरोपी ने लोगों की मजबूरी और बेरोजगारी का फायदा उठाया। किसी ने जमीन गिरवी रखकर रुपये दिए तो किसी ने अपनी जीवनभर की जमा पूंजी आरोपी को सौंप दी।
शिकायतकर्ताओं में जितेंद्र पिता रणजीत, फतेसिंह पिता अंबाराम, बलराम पिता रमेश, रमेश बोड़ाना, विकास पिता अंतरसिंह, विक्रम पिता रमेश, मुकेश पिता रामेश, लालूबाई पति स्वर्गीय अनिल, कमलाबाई पति स्वर्गीय सत्यनारायण निवासी उज्जैन तथा हेमंत पिता रणजीत और विकास यादव पिता वासुदेव निवासी देवास शामिल हैं।
तीन साल से देता रहा झांसा
पुलिस जांच में सामने आया है कि पीड़ितों ने करीब तीन साल पहले आरोपी को रुपये दिए थे। नौकरी को लेकर पूछताछ करने पर आरोपी लगातार टालमटोल करता रहा। लंबे समय तक इंतजार के बाद जब किसी की भी भर्ती नहीं हुई तो लोगों को अपने साथ ठगी होने का एहसास हुआ।
फिलहाल पुलिस ने आरोपी बालूसिंह के खिलाफ धोखाधड़ी सहित अन्य धाराओं में मामला दर्ज कर जांच शुरू कर दी है। पुलिस यह भी पता लगाने में जुटी है कि आरोपी ने इसी तरह और कितने लोगों को अपना शिकार बनाया है।