India News: AAP में बड़ा सियासी झटका: 7 राज्यसभा सांसदों का BJP में विलय, केजरीवाल के प्रयास नाकाम

Kejriwal tried to stop defections, but it was a case of too little, too late
Arvind Kejriwal (File photo)

नई दिल्ली। आम आदमी पार्टी (AAP) को बड़ा राजनीतिक झटका देते हुए उसके सात राज्यसभा सांसदों के भारतीय जनता पार्टी (BJP) में शामिल होने की खबर सामने आई है। इस घटनाक्रम से पहले पार्टी सुप्रीमो अरविंद केजरीवाल ने हालात संभालने की कोशिश की, लेकिन उनके प्रयास देर से शुरू होने के कारण सफल नहीं हो सके।

सूत्रों के मुताबिक, पार्टी के कई सांसद लंबे समय से असंतुष्ट थे और अंततः उन्होंने अलग राह चुन ली। इस घटनाक्रम में संदीप पाठक का नाम भी शामिल होना सबसे चौंकाने वाला माना जा रहा है, जिन्हें केजरीवाल का करीबी और वफादार माना जाता था।

अयोग्यता की मांग, कानूनी लड़ाई के संकेत

AAP सांसद संजय सिंह ने रविवार को राज्यसभा अध्यक्ष सी. पी. राधाकृष्णन को याचिका सौंपकर BJP में शामिल हुए सातों सांसदों को अयोग्य ठहराने की मांग की है।

संजय सिंह ने कहा कि यह कदम दलबदल विरोधी कानून का स्पष्ट उल्लंघन है और पार्टी जरूरत पड़ने पर इस मामले में कानूनी कार्रवाई भी करेगी। उन्होंने सुप्रीम कोर्ट के पूर्व फैसलों का हवाला देते हुए कहा कि इस तरह के दलबदल के मामलों में अयोग्यता तय है।

केजरीवाल ने की थी अंतिम कोशिश

सूत्रों के अनुसार, अरविंद केजरीवाल ने 22 अप्रैल से असंतुष्ट सांसदों से संपर्क साधना शुरू किया था। उन्होंने विक्रमजीत सिंह साहनी, अशोक मित्तल और संदीप पाठक के साथ बैठकें कीं।

बताया जा रहा है कि केजरीवाल ने संदीप पाठक से करीब डेढ़ घंटे तक बातचीत की थी और उन्हें भरोसा था कि वे पार्टी नहीं छोड़ेंगे। हालांकि, घटनाक्रम ने अलग ही मोड़ ले लिया।

इसी दौरान हरभजन सिंह, जो उस समय मुंबई में थे, उनसे भी केजरीवाल ने बातचीत की थी।

राघव चड्ढा की प्रेस कॉन्फ्रेंस से हुआ खुलासा

घटनाक्रम ने उस समय निर्णायक रूप लिया जब राघव चड्ढा ने प्रेस कॉन्फ्रेंस कर सांसदों के BJP में शामिल होने की जानकारी दी। इससे साफ हो गया कि पार्टी के भीतर असंतोष लंबे समय से पनप रहा था।

सूत्रों के मुताबिक, संदीप पाठक और राघव चड्ढा दोनों ने पंजाब में पार्टी की जीत में अहम भूमिका निभाई थी, लेकिन दिल्ली चुनाव में हार के बाद पार्टी के भीतर उनका प्रभाव कम होता गया, जिससे असंतोष बढ़ा।

असंतोष की बड़ी वजहें

राज्यसभा सांसद विक्रमजीत सिंह साहनी के अनुसार, राज्य सरकार के कामकाज को लेकर बढ़ता मोहभंग और पंजाब में उभरती चुनौतियां उनके फैसले के प्रमुख कारणों में शामिल हैं।

AAP के लिए यह घटनाक्रम बड़ा राजनीतिक झटका माना जा रहा है। अब पार्टी की नजर कानूनी लड़ाई पर है, जबकि BJP के लिए यह घटनाक्रम राजनीतिक बढ़त के रूप में देखा जा रहा है। आने वाले दिनों में इस मामले का असर राष्ट्रीय राजनीति पर भी पड़ सकता है।

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