डिजिटल साक्ष्यों ने खोला राज: अश्लील मैसेज भेजने वाला नगरपालिका का पूर्व अतिक्रमण प्रभारी गिरफ्तार, जेल भेजा गया

नर्मदापुरम। अश्लील संदेश और आपत्तिजनक तस्वीरें भेजकर एक युवती को मानसिक रूप से प्रताड़ित करने के मामले में नगरपालिका के पूर्व अतिक्रमण प्रभारी एवं दैनिक वेतनभोगी कर्मचारी सुनील राजपूत को पुलिस ने गिरफ्तार कर न्यायालय में पेश किया, जहां से उसे जेल भेज दिया गया। आरोपी के खिलाफ सूचना प्रौद्योगिकी अधिनियम (आईटी एक्ट) तथा छेड़छाड़ से संबंधित गंभीर धाराओं के तहत मामला दर्ज है।

अस्पताल में भर्ती युवती को बनाया निशाना

मामले के अनुसार इटारसी निवासी एक युवती 5 फरवरी 2026 को नर्मदापुरम के एक निजी अस्पताल में भर्ती हुई थी। उपचार के दौरान 14 फरवरी की सुबह उसके फेसबुक मैसेंजर पर लगातार अश्लील संदेश और आपत्तिजनक तस्वीरें भेजी जाने लगीं। यह सामग्री ‘सौरभ साहू’ तथा एक अन्य महिला के नाम से बनाई गई कथित फर्जी फेसबुक आईडी के माध्यम से भेजी जा रही थी।

पीड़िता के अनुसार अप्रैल माह में भी उसे दो अलग-अलग मोबाइल नंबरों से अश्लील कॉल कर परेशान किया गया। इसके बाद उसने 16 फरवरी को अस्पताल से ही साइबर सेल में लिखित शिकायत दर्ज कराई थी।

साइबर जांच में सामने आया आरोपी का नाम

शुरुआती जांच में पुलिस ने अज्ञात आरोपी के खिलाफ मामला दर्ज किया था। बाद में साइबर सेल द्वारा फर्जी फेसबुक आईडी और संबंधित मोबाइल नंबरों की तकनीकी जांच की गई। जांच के दौरान प्राप्त आईपी एड्रेस और अन्य डिजिटल साक्ष्य कथित रूप से शास्त्री वार्ड निवासी सुनील राजपूत से जुड़े पाए गए। इसके बाद पुलिस ने मामले में आरोपी का नाम जोड़ते हुए जांच आगे बढ़ाई।

कार्रवाई में देरी पर उठे थे सवाल

एफआईआर दर्ज होने के बाद भी आरोपी के शहर में खुलेआम घूमने और नगरपालिका के पहचान पत्र के साथ सरकारी वाहन का उपयोग करने की चर्चाएं सामने आई थीं। मामले को लेकर सवाल उठने पर नगरपालिका प्रशासन ने उसे अतिक्रमण दल के प्रभारी पद से हटा दिया था।

कोर्ट के निर्देश पर भेजा गया जेल

मामले की विवेचना कोतवाली थाना पुलिस को सौंपे जाने के बाद थाना प्रभारी कंचन सिंह ठाकुर के नेतृत्व में पुलिस टीम ने शुक्रवार को आरोपी को गिरफ्तार कर लिया। पुलिस ने उसे न्यायालय में पेश किया, जहां से उसे न्यायिक अभिरक्षा में जेल भेजने के आदेश जारी किए गए।

पुलिस सूत्रों के अनुसार आरोपी के खिलाफ वर्ष 2023 में भी आईटी एक्ट के तहत मामला दर्ज हो चुका है। इसी कारण न्यायालय ने मामले की गंभीरता और आरोपी के पूर्व रिकॉर्ड को ध्यान में रखते हुए राहत देने से इंकार कर दिया।

पुराने विवादों से भी जुड़ा रहा नाम

पुलिस और प्रशासनिक रिकॉर्ड के अनुसार सुनील राजपूत का नाम पूर्व में भी कई विवादों में सामने आ चुका है। वर्ष 2018-19 में नगरपालिका से जुड़े प्रधानमंत्री आवास योजना प्रकरण में भी उसका नाम चर्चा में रहा था। वहीं 2023 में उस पर आईटी एक्ट के तहत मामला दर्ज हुआ था।

फिलहाल पुलिस का कहना है कि डिजिटल साक्ष्यों और तकनीकी जांच के आधार पर कार्रवाई की गई है तथा मामले की आगे की विवेचना जारी है।

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