नर्मदापुरम। मध्यप्रदेश के एकमात्र हिल स्टेशन पचमढ़ी में पर्यटकों से प्रवेश एवं पार्किंग शुल्क के नाम पर की जा रही वसूली अब सवालों के घेरे में आ गई है। सोशल मीडिया पर वायरल हो रही रसीदों के अनुसार दोपहिया वाहन से ₹11.80, छोटे चारपहिया वाहन से ₹23.60 तथा बड़े चारपहिया वाहन से ₹59 तक की राशि (GST सहित) वसूली जा रही है। लेकिन इस वसूली का कानूनी आधार क्या है, इसका जवाब फिलहाल स्पष्ट नहीं है।
सबसे बड़ा और चौंकाने वाला सवाल रसीद पर दर्ज GST नंबर 23ARMPC0327P3ZR को लेकर खड़ा हुआ है। प्रारंभिक जानकारी के अनुसार यह GST नंबर किसी शासकीय विभाग का नहीं, बल्कि एक निजी प्रतिष्ठान “राज मोबाइल” से संबंधित बताया जा रहा है। यदि यह तथ्य सही है तो मामला केवल शुल्क वसूली का नहीं बल्कि कर नियमों और वित्तीय पारदर्शिता का भी बन जाता है।
आखिर किस अधिकार से हो रही वसूली?

पर्यटकों के मन में कई सवाल हैं—
यह शुल्क किस विभाग द्वारा और किस वैधानिक आदेश के तहत वसूला जा रहा है?
क्या इसके लिए शासन की विधिवत स्वीकृति प्राप्त है?
शुल्क निर्धारण का आदेश सार्वजनिक क्यों नहीं किया गया?
एकत्रित राशि का उपयोग किन कार्यों में किया जा रहा है?
क्या पर्यटकों को शुल्क का उद्देश्य और कानूनी आधार बताया जाता है?
यदि यह शुल्क वैधानिक है तो संबंधित विभाग को आदेश, अधिसूचना और राजस्व उपयोग का पूरा विवरण सार्वजनिक करना चाहिए।
GST नियमों पर भी गंभीर प्रश्न
मामले का सबसे संवेदनशील पहलू यह है कि रसीद पर अंकित GST नंबर कथित रूप से कंपोजीशन स्कीम के अंतर्गत पंजीकृत व्यापारी का बताया जा रहा है। जीएसटी कानून के अनुसार कंपोजीशन योजना में पंजीकृत व्यापारी सामान्य रूप से ग्राहकों से अलग से GST वसूल नहीं सकता और न ही टैक्स इनवॉइस जारी कर सकता है।
ऐसी स्थिति में यदि रसीद पर “GST सहित” राशि दर्शाई जा रही है या किसी कंपोजीशन डीलर का GST नंबर उपयोग किया जा रहा है, तो यह जांच का विषय बन जाता है कि—
GST नंबर का उपयोग किस अनुमति से किया जा रहा है?
वसूली करने वाला वास्तविक प्राधिकृत निकाय कौन है?
क्या कर नियमों का उल्लंघन हुआ है?
क्या पर्यटकों से ली जा रही राशि का पूरा हिसाब-किताब उपलब्ध है?
https://www.facebook.com/share/v/1FbsA7j1Si/
जांच की मांग तेज
जांच की मांग तेज
सूत्रों की माने तो स्थानीय नागरिकों और सामाजिक कार्यकर्ताओं का कहना है कि यदि यह वसूली पूरी तरह वैधानिक है तो संबंधित विभाग को सार्वजनिक रूप से आदेश, टेंडर, अनुबंध, स्वीकृति और राजस्व उपयोग का विवरण जारी करना चाहिए। वहीं यदि किसी निजी संस्था या व्यक्ति के GST नंबर के माध्यम से राशि वसूली जा रही है तो इसकी स्वतंत्र जांच आवश्यक है।
जनता जानना चाहती है
पचमढ़ी जैसे अंतरराष्ट्रीय पहचान वाले पर्यटन स्थल पर पर्यटकों से शुल्क लेना गलत नहीं है, बशर्ते वह कानूनसम्मत, पारदर्शी और जवाबदेह हो। लेकिन जब रसीद पर दर्ज GST नंबर, वसूली की वैधता और राशि के उपयोग पर सवाल उठने लगें, तब प्रशासन की चुप्पी संदेह को और गहरा करती है।
अब जिम्मेदार विभागों को स्पष्ट करना होगा कि यह शुल्क वास्तव में किसके आदेश से वसूला जा रहा है और पर्यटकों की जेब से निकला पैसा आखिर जा कहां रहा है?