इंदौर। प्रदेश की आर्थिक राजधानी इंदौर की सार्वजनिक परिवहन व्यवस्था की रीढ़ मानी जाने वाली एआईसीटीएसएल (AICTSL) की सिटी बसों के संचालन पर गंभीर सवाल खड़े होने लगे हैं। शहर में 100 से अधिक रूटों पर चलने वाली ये बसें न केवल शहरी क्षेत्रों बल्कि आसपास के कस्बों और ग्रामीण इलाकों को भी जोड़ती हैं। बावजूद इसके, कई बस चालक तय बस स्टॉप की बजाय चौराहों, मोड़ों, सर्विस रोड और सड़क के बीचों-बीच बस रोककर यात्रियों को चढ़ाते-उतारते नजर आ रहे हैं, जिससे यातायात व्यवस्था प्रभावित हो रही है और दुर्घटनाओं का खतरा बढ़ गया है।
बस स्टॉप छोड़, चौराहों पर रुक रही बसें
शहर के कई प्रमुख चौराहों पर यह लापरवाही रोजाना देखने को मिल रही है। निर्धारित बस स्टॉप होने के बावजूद चालक यात्रियों की सुविधा या अधिक सवारियां जुटाने के लिए चौराहों और सिग्नल के पास ही बस खड़ी कर देते हैं। इससे पीछे चल रहे दोपहिया और चारपहिया वाहन चालकों को अचानक ब्रेक लगाना पड़ता है, जिससे कई बार टक्कर और सड़क दुर्घटनाएं भी हो चुकी हैं।
व्हाइट चर्च चौराहा: सिग्नल के नीचे खड़ी रही बस
इंदौर के व्यस्त व्हाइट चर्च चौराहे पर एक सिटी बस सवारियों का इंतजार करती दिखाई दी। हैरानी की बात यह रही कि बस से लगभग 200 मीटर की दूरी पर निर्धारित बस स्टॉप मौजूद था, फिर भी चालक ने सिग्नल के नीचे ही बस रोक दी। ग्रीन सिग्नल होने पर जहां सैकड़ों वाहन गुजरते हैं, वहीं बस के खड़े रहने से यातायात प्रभावित होता रहा। मौके पर मौजूद ट्रैफिक अमले ने भी चालक को हटाने या कार्रवाई करने की कोई कोशिश नहीं की।
बंगाली कॉलोनी चौराहे पर भी वही तस्वीर
ऐसी ही स्थिति बंगाली कॉलोनी चौराहे पर भी देखने को मिली। सुबह करीब 10:30 बजे, जब सर्विस रोड पर ट्रैफिक का दबाव अधिक रहता है, तब एक सिटी बस चालक यात्रियों के इंतजार में बस को सर्विस रोड पर ही खड़ा किए रहा। इससे अन्य वाहनों की आवाजाही बाधित होती रही।
न चालान, न कार्रवाई
सबसे बड़ा सवाल यह है कि जब आम वाहन चालकों पर ट्रैफिक नियमों के उल्लंघन पर तत्काल चालान किए जाते हैं, तब सार्वजनिक परिवहन की इन बसों पर कार्रवाई क्यों नहीं होती? स्थानीय लोगों का कहना है कि कई बार ट्रैफिक पुलिस की मौजूदगी में भी बसें नियमों का उल्लंघन करती हैं, लेकिन न तो चालान बनते हैं और न ही चालकों को चेतावनी दी जाती है।
यातायात विशेषज्ञों की राय
यातायात विशेषज्ञों का मानना है कि बसों का निर्धारित स्टॉप के अलावा कहीं भी रुकना मोटर वाहन अधिनियम और सड़क सुरक्षा मानकों के विपरीत है। इससे ट्रैफिक का प्रवाह बाधित होता है और दुर्घटनाओं की संभावना कई गुना बढ़ जाती है। यदि इस पर समय रहते नियंत्रण नहीं किया गया, तो भविष्य में गंभीर हादसे हो सकते हैं।
प्रशासन से अपेक्षा
शहरवासियों का कहना है कि एआईसीटीएसएल और ट्रैफिक पुलिस को संयुक्त रूप से अभियान चलाकर ऐसे बस चालकों पर कार्रवाई करनी चाहिए। साथ ही बसों में जीपीएस और सीसीटीवी के माध्यम से निगरानी बढ़ाकर यह सुनिश्चित किया जाए कि सभी बसें केवल निर्धारित स्टॉप पर ही रुकें। इससे यातायात व्यवस्था भी सुधरेगी और सड़क दुर्घटनाओं पर भी अंकुश लगाया जा सकेगा।

