
माखननगर। महिला एवं बाल विकास विभाग के माखननगर परियोजना कार्यालय में अप्रैल माह के कम्प्यूटर ऑपरेटर भुगतान को लेकर गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं। उपलब्ध दस्तावेज़ों, विभागीय जानकारी और स्थानीय सूत्रों से सामने आई परिस्थितियों ने पूरे मामले को चर्चा का विषय बना दिया है। मामला भले ही लगभग 9 हजार रुपये के भुगतान का हो, लेकिन इससे जुड़े प्रशासनिक सवाल कहीं अधिक बड़े हैं।
सूत्रों के अनुसार, मार्च 2026 में परियोजना कार्यालय में कार्यरत कम्प्यूटर ऑपरेटर जावेद अली को हटा दिया गया था। इसके बाद विभाग में नए कम्प्यूटर ऑपरेटर की नियुक्ति मई 2026 में हुई। ऐसे में अप्रैल माह के दौरान कम्प्यूटर संबंधी कार्य किसके द्वारा किया गया, यही सबसे बड़ा प्रश्न बन गया है।
उपलब्ध भुगतान रिकॉर्ड के अनुसार अप्रैल माह का भुगतान सपन मिश्रा के नाम से किया गया। दूसरी ओर, स्थानीय स्तर पर यह चर्चा है कि संबंधित महिला उस अवधि में इंदौर में कार्यरत थीं। इस दावे की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हो सकी है और देनवापोस्ट को उनका पक्ष भी प्राप्त नहीं हो सका।
इसी बीच यह भी सवाल उठ रहे हैं कि संबंधित अवधि के उपस्थिति रिकॉर्ड में क्या दर्ज है। यदि किसी व्यक्ति ने विभाग में कार्य किया, तो उसके कार्यादेश, उपस्थिति, कार्य सत्यापन और भुगतान से जुड़े रिकॉर्ड उपलब्ध होने चाहिए।
देनवापोस्ट ने इस संबंध में परियोजना अधिकारी सुष्मा चौरसिया से संपर्क किया। उन्होंने बताया कि संबंधित महिला को लगभग 20 दिनों के लिए अस्थायी रूप से बुलाया गया था और उसी अवधि का भुगतान विभाग द्वारा किया गया।
सरकारी विभागों में होने वाला प्रत्येक भुगतान सार्वजनिक धन से किया जाता है। ऐसे में केवल मौखिक स्पष्टीकरण पर्याप्त नहीं माना जाता; रिकॉर्ड और दस्तावेज़ ही किसी भी विवाद का सबसे मजबूत उत्तर होते हैं। यदि विभाग के पास सभी आवश्यक दस्तावेज़ उपलब्ध हैं, तो उन्हें सार्वजनिक करना चाहिए जिससे सभी शंकाओं का समाधान हो सके है। यदि रिकॉर्ड और भुगतान के बीच कोई विसंगति सामने आती है, तो उसकी निष्पक्ष जांच होना चाहिए।यह मामला केवल 9 हजार रुपये का नहीं है। यह प्रशासनिक पारदर्शिता, रिकॉर्ड प्रबंधन और सार्वजनिक धन के उपयोग में जवाबदेही का प्रश्न है।
डिस्क्लेमर: यह समाचार उपलब्ध दस्तावेज़ों, विभागीय प्रतिक्रिया एवं स्थानीय सूत्रों से प्राप्त जानकारी पर आधारित है। संबंधित महिला से संपर्क नहीं हो सका, इसलिए उनका पक्ष प्रकाशित नहीं किया जा सका। उनका पक्ष प्राप्त होने पर उसे भी प्रमुखता से प्रकाशित किया जाएगा। समाचार में उल्लिखित विवादित दावों की अंतिम पुष्टि सक्षम जांच अथवा आधिकारिक रिकॉर्ड के अधीन है।

