लाइफस्टाइल डेस्क। मानसून की पहली बारिश जहां गर्मी से राहत देती है, वहीं छोटे बच्चों की सेहत के लिए यह मौसम अतिरिक्त सावधानी की मांग करता है। मौसम बदलते ही 1 से 10 वर्ष तक के बच्चों में सर्दी, खांसी, बुखार, पेट का संक्रमण और वायरल बीमारियों का खतरा बढ़ जाता है। ऐसे में बच्चों के खानपान और स्कूल टिफिन पर विशेष ध्यान देना जरूरी है। विशेषज्ञों का कहना है कि यदि इस मौसम में संतुलित और स्वच्छ भोजन दिया जाए तो बच्चों की रोग प्रतिरोधक क्षमता मजबूत बनी रह सकती है।
बच्चों को हमेशा दें ताजा और गर्म भोजन
फरीदाबाद स्थित अमृता हॉस्पिटल की क्लिनिकल न्यूट्रिशनिस्ट कोमल भाटी के अनुसार, बारिश के मौसम में बच्चों की इम्यूनिटी कमजोर होने की संभावना अधिक रहती है। इसलिए उन्हें हमेशा ताजा और गर्म भोजन खिलाना चाहिए। रात का बचा हुआ या बासी खाना देने से बचें, क्योंकि इस मौसम में ऐसे भोजन में बैक्टीरिया तेजी से पनप सकते हैं और संक्रमण का खतरा बढ़ सकता है।
फास्ट फूड और अनहाइजीनिक भोजन से रखें दूरी
विशेषज्ञों के अनुसार, मानसून में बच्चों को बाहर का फास्ट फूड, कटे हुए फल और अस्वच्छ वातावरण में तैयार भोजन नहीं देना चाहिए। पिज्जा, बर्गर और फ्रेंच फ्राइज जैसी चीजें संक्रमण का कारण बन सकती हैं। इसके बजाय घर का ताजा, पौष्टिक और साफ-सुथरा भोजन बेहतर विकल्प है।
यदि बच्चे की भूख कम हो तो उसे एक साथ अधिक भोजन खिलाने की बजाय थोड़ी-थोड़ी मात्रा में कई बार भोजन दें। रोटी रोल, हेल्दी पास्ता या अन्य पौष्टिक व्यंजन आकर्षक तरीके से बनाकर देने से बच्चे उन्हें आसानी से खा लेते हैं।
स्कूल टिफिन में रखें पौष्टिक और संतुलित आहार
विशेषज्ञों का कहना है कि स्कूल टिफिन में जरूरत से ज्यादा खाना भरने की बजाय पौष्टिक और संतुलित भोजन रखना चाहिए। रोटी रोल, पनीर रोल, ताजे फल, भुना चना, मखाना और अन्य हेल्दी स्नैक्स अच्छे विकल्प हैं। टिफिन में प्रोटीन, कार्बोहाइड्रेट और सब्जियों का संतुलन बच्चों को पूरे दिन ऊर्जा प्रदान करता है।
इम्यूनिटी बढ़ाने वाले खाद्य पदार्थ जरूर दें
मानसून में बच्चों के भोजन में विटामिन-सी, आयरन और जिंक से भरपूर खाद्य पदार्थ शामिल करें। नट्स का पाउडर, हरी पत्तेदार सब्जियां, चुकंदर, मूंग दाल, बेसन या ओट्स का चीला, अंडा और भुना चना जैसे खाद्य पदार्थ बच्चों की रोग प्रतिरोधक क्षमता बढ़ाने में मददगार माने जाते हैं।
1 से 3 साल के बच्चों के लिए क्या खिलाएं?
विशेषज्ञों के अनुसार, एक वर्ष की उम्र के बाद बच्चों को अंडा, दूध से बने उत्पाद, खिचड़ी, दाल-चावल, पनीर पराठा और नरम रोटी रोल दिए जा सकते हैं। यह भोजन पौष्टिक होने के साथ-साथ छोटे बच्चों के लिए आसानी से खाने योग्य भी होता है।
खानपान के साथ शारीरिक गतिविधि भी जरूरी
संतुलित आहार के साथ बच्चों की नियमित शारीरिक गतिविधियां भी बेहद महत्वपूर्ण हैं। रोजाना खेलना, दौड़ना और सक्रिय रहना बच्चों की सेहत और इम्यूनिटी को मजबूत बनाने में अहम भूमिका निभाता है।
डिस्क्लेमर: यह जानकारी स्वास्थ्य विशेषज्ञों की सलाह और सामान्य स्वास्थ्य संबंधी जानकारी पर आधारित है। किसी भी बच्चे की विशेष स्वास्थ्य स्थिति या आहार संबंधी समस्या के लिए बाल रोग विशेषज्ञ या योग्य पोषण विशेषज्ञ से परामर्श अवश्य लें।

