सिवनी मालवा में डेयरियों पर प्रशासन का छापा, दूध-मावा समेत मिठाइयों के नमूने जांच के लिए भेजे गए

नर्मदापुरम | जिले में मिलावटी और असुरक्षित खाद्य पदार्थों पर रोक लगाने के लिए प्रशासन ने सख्ती शुरू कर दी है। कलेक्टर  सोमेश मिश्रा के निर्देश पर सिवनी मालवा में राजस्व विभाग और खाद्य सुरक्षा प्रशासन की संयुक्त टीम ने डेयरियों एवं खाद्य प्रतिष्ठानों का औचक निरीक्षण किया। कार्रवाई के दौरान विभिन्न डेयरियों से दूध और दुग्ध उत्पादों के नमूने लेकर जांच के लिए राज्य खाद्य प्रयोगशाला भेजे गए हैं।

वर्षा ऋतु में खाद्य पदार्थों की गुणवत्ता सुनिश्चित करने के उद्देश्य से अनुविभागीय दंडाधिकारी (एसडीएम) के नेतृत्व में गुरुवार को यह अभियान चलाया गया। निरीक्षण के दौरान ब्रजवासी डेयरी, नमामी डेयरी और लववंशी डेयरी की जांच की गई।

टीम ने संदेह के आधार पर दूध, मिल्क केक, केसर पेड़ा और मावा पेड़ा के नमूने एकत्रित कर सुरक्षित किए। इन सभी नमूनों को परीक्षण के लिए राज्य खाद्य प्रयोगशाला भेजा जा रहा है, जहां उनकी गुणवत्ता और शुद्धता की जांच की जाएगी।

खाद्य सुरक्षा प्रशासन के अधिकारियों ने बताया कि यदि जांच रिपोर्ट में खाद्य पदार्थ मानकों के अनुरूप नहीं पाए जाते हैं, तो संबंधित प्रतिष्ठानों के विरुद्ध खाद्य सुरक्षा एवं मानक अधिनियम के तहत वैधानिक कार्रवाई की जाएगी।

निरीक्षण दल में नायब तहसीलदार आलोक भद्र, खाद्य सुरक्षा अधिकारी जितेंद्र सिंह राणा एवं कमलेश एस. दियावार शामिल रहे।

प्रशासन ने स्पष्ट किया है कि जिले में आमजन को सुरक्षित एवं गुणवत्तापूर्ण खाद्य सामग्री उपलब्ध कराने के लिए ऐसे औचक निरीक्षण आगे भी लगातार जारी रहेंगे।




सीएम डॉ. मोहन यादव ने सिवनीमालवा में 106.34 करोड़ के विकास कार्यों की दी सौगात

48.65 करोड़ के 45 कार्यों का लोकार्पण, 57.69 करोड़ के 51 कार्यों का भूमिपूजन

नर्मदापुरम । डॉ. मोहन यादव ने गुरुवार को सिवनीमालवा में आयोजित भव्य कार्यक्रम में जिले को बड़ी विकास सौगात दी। मुख्यमंत्री ने कुल 106.34 करोड़ रुपये की लागत से 96 विकास कार्यों का लोकार्पण एवं भूमिपूजन किया। इसमें 48.65 करोड़ रुपये के 45 कार्यों का लोकार्पण तथा 57.69 करोड़ रुपये के 51 कार्यों का भूमिपूजन शामिल है।

45 विकास कार्यों का लोकार्पण
मुख्यमंत्री ने जिन 45 निर्माण कार्यों का लोकार्पण किया, उनमें सड़क, पुल, खेल मैदान, छात्रावास, स्कूल भवन एवं सामुदायिक अधोसंरचना से जुड़े कार्य प्रमुख रहे।

इनमें प्रमुख रूप से—
SH-15 मार्ग पर विभिन्न स्थानों पर पुल निर्माण कार्य
ग्रामीण सड़कों एवं सीसी रोड निर्माण
मिनी स्टेडियम एवं खेल मैदान निर्माण
सामुदायिक भवन एवं मंगल भवन निर्माण
ग्रामीण नल-जल योजना (5.68 करोड़)
कोरी घाट से सर्किट हाउस घाट तक पिचिंग कार्य (6.70 करोड़)
जनजातीय बालक छात्रावास भवन (तीखड़, महुआखेड़ा, पिपरिया)
शासकीय स्कूलों में अतिरिक्त कक्ष निर्माण
इन कार्यों से क्षेत्र में बुनियादी सुविधाओं को मजबूती मिलने के साथ शिक्षा, खेल और ग्रामीण विकास को बढ़ावा मिलेगा।

51 कार्यों का भूमिपूजन
कार्यक्रम में मुख्यमंत्री ने 57.69 करोड़ रुपये की लागत से 51 नए विकास कार्यों का भूमिपूजन भी किया।
इनमें शामिल हैं—
प्राथमिक एवं हाई स्कूल भवनों का निर्माण
विज्ञान प्रयोगशालाओं (फिजिक्स, केमिस्ट्री, बायोलॉजी) की स्थापना
ग्रामीण क्षेत्रों में सीसी रोड एवं नाली निर्माण
तालाब सौंदर्यीकरण कार्य
विभिन्न ग्राम पंचायतों में मंगल भवन निर्माण
जनजातीय छात्रावास भवन निर्माण
33/11 केवी उपकेन्द्र निर्माण
बैराखेड़ी-घुघवासा-बोरतलाई मार्ग (लगभग 28.22 करोड़)
शासकीय होम्योपैथिक औषधालय केसला का नवीन भवन
विकास को नई गति
मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि प्रदेश सरकार ग्रामीण और शहरी क्षेत्रों में आधारभूत सुविधाओं के विस्तार के लिए लगातार कार्य कर रही है। इन परियोजनाओं से क्षेत्र में रोजगार के अवसर बढ़ेंगे और नागरिकों को बेहतर सुविधाएं उपलब्ध होंगी।
कार्यक्रम में स्थानीय जनप्रतिनिधि, प्रशासनिक अधिकारी एवं बड़ी संख्या में नागरिक उपस्थित रहे।




सिवनी मालवा में मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव का आगमन आज, स्थानीय कार्यक्रम में होंगे शामिल

नर्मदापुरम। मध्यप्रदेश के मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव का आज गुरुवार को नर्मदापुरम जिले के सिवनी मालवा तहसील में आगमन हो रहा है। उनके दौरे को लेकर प्रशासनिक तैयारियां पूरी कर ली गई हैं और स्थानीय स्तर पर उत्साह का माहौल देखा जा रहा है।

निर्धारित कार्यक्रम के अनुसार मुख्यमंत्री डॉ. यादव दोपहर में भोपाल से सिवनी मालवा के लिए प्रस्थान करेंगे और लगभग दोपहर 1:45 बजे सिवनी मालवा पहुंचेंगे। यहां वे स्थानीय कार्यक्रम में भाग लेंगे और विभिन्न विकास कार्यों का लोकार्पण तथा भूमिपूजन करेंगे।

मुख्यमंत्री के दौरे को देखते हुए प्रशासन द्वारा सुरक्षा व्यवस्था कड़ी कर दी गई है। साथ ही कार्यक्रम स्थल पर सभी आवश्यक व्यवस्थाएं सुनिश्चित की गई हैं, ताकि आयोजन सुचारू रूप से संपन्न हो सके।

कार्यक्रम में जनप्रतिनिधियों,अधिकारियों एवं बड़ी संख्या में आमजन की उपस्थिति की संभावना है। मुख्यमंत्री डॉ. यादव कार्यक्रम में शामिल होने के पश्चात सायं 4:00 बजे सिवनी मालवा से पुनः भोपाल के लिए रवाना होंगे।
मुख्यमंत्री के इस दौरे को क्षेत्र के विकास की दृष्टि से महत्वपूर्ण माना जा रहा है, जिससे स्थानीय स्तर पर नई योजनाओं और घोषणाओं की उम्मीद भी जताई जा रही है।




अक्षय तृतीया पर बाल विवाह रोकथाम के सख्त निर्देश, सूचना मिलते ही करें त्वरित कार्रवाई: कलेक्टर सोमेश मिश्रा

नर्मदापुरम। सोमेश मिश्रा ने आगामी अक्षय तृतीया के मद्देनजर जिले में बाल विवाह जैसी कुप्रथा पर सख्ती से रोक लगाने के निर्देश दिए हैं। उन्होंने महिला एवं बाल विकास विभाग सहित सभी संबंधित अधिकारियों को अपने-अपने क्षेत्रों में सतत निगरानी बनाए रखने और किसी भी सूचना पर तत्काल कार्रवाई करने के निर्देश दिए हैं।

कलेक्टर ने कहा कि अनुविभागीय अधिकारी एवं विकासखंड स्तर के अधिकारी नियमित रूप से फील्ड में सक्रिय रहें और संभावित बाल विवाह की सूचना मिलने पर तुरंत हस्तक्षेप करें। उन्होंने स्पष्ट किया कि इस मामले में किसी भी प्रकार की लापरवाही बर्दाश्त नहीं की जाएगी।

लाड़ो अभियान के तहत व्यापक तैयारियां

अक्षय तृतीया एवं अन्य विवाह मुहूर्तों के दौरान संभावित बाल विवाहों की रोकथाम के उद्देश्य से जिले में ‘लाड़ो अभियान’ के अंतर्गत व्यापक स्तर पर तैयारियां की गई हैं। इसके तहत ग्राम एवं वार्ड स्तर पर मजबूत सूचना तंत्र विकसित किया गया है, जिसमें शिक्षक, आंगनवाड़ी कार्यकर्ता, ग्राम सचिव और जागरूक नागरिकों को शामिल किया गया है।

ये भी पढे़ं:समर्थन मूल्य पर खरीदी में लापरवाही बर्दाश्त नहीं, परिवहन व उठाव व्यवस्था रहे सुचारू: कलेक्टर सोमेश मिश्रा

कंट्रोल रूम और हेल्पलाइन सक्रिय

बाल विवाह की सूचना के लिए जिला स्तर पर वन स्टॉप सेंटर, नर्मदापुरम को कंट्रोल रूम बनाया गया है। यहां प्रभारी प्रशासक प्रतिभा वाजपेयी के दूरभाष नंबर 07574-252251 एवं मोबाइल नंबर 8319517910 पर सूचना दी जा सकती है। इसके अलावा चाइल्ड हेल्पलाइन 1098, महिला हेल्पलाइन 181 और पुलिस हेल्पलाइन 112 भी सक्रिय हैं। विकासखण्ड स्तर पर वनखेडी तथा विकासखण्ड पिपरिया के लिये परियोजना अधिकारी अनिल कुमार चौधरी (मो.9588443053, 07574-224963), विकासखण्ड सोहागपुर के लिये परियोजना अधिकारी श्रीमती रंजना गोस्वामी (मो.9827886020,07574-278144), विकासखण्ड माखननगर के लिये श्रीमती सुषमा चौरसिया (मो. 7999584492,07574-259349), विकासखण्ड केसला के लिये परियोजना अधिकारी योगेश घाघरे (मो.8989150789,07574-272272), नर्मदापुरम (ग्रामीण) के लिये परियोजना अधिकारी प्रमोद गौर (मो.9893611099,07574-254148), नर्मदापुरम (शहरी) के लिये परियोजना अधिकारी श्रीमती प्रीति यादव (मो. 9893310130,07574-250469) इटारसी के लिये प्रभारी परियोजना अधिकारी श्रीमती दीप्ति शुक्ला (मो. 974144824,07572-266434) विकासखण्ड सिवनी मालवा के लिये प्रभारी परियोजना अधिकारी श्रीमती सुचित्रा रजावत (मो.8435204472,07574-225333) को जिम्मेदारी सौंपी गई है।

विकासखंड स्तर पर जिम्मेदारी तय

जिले के विभिन्न विकासखंडों में अधिकारियों को जिम्मेदारी सौंपी गई है, जो अपने-अपने क्षेत्रों में निगरानी और कार्रवाई सुनिश्चित करेंगे। इसमें पिपरिया, सोहागपुर, माखननगर, केसला, सिवनी मालवा, इटारसी सहित शहरी एवं ग्रामीण नर्मदापुरम क्षेत्र शामिल हैं।

प्रशासन ने आमजन से भी अपील की है कि बाल विवाह जैसी कुप्रथा को रोकने में सहयोग करें और किसी भी संदिग्ध गतिविधि की सूचना तुरंत संबंधित हेल्पलाइन या अधिकारियों को दें, ताकि समय रहते कार्रवाई कर बाल विवाह को रोका जा सके।




800 क्विंटल शासकीय गेहूं गायब: कोठरा वेयरहाउस बना घोटाले का केंद्र, व्यवस्था पर उठे गंभीर सवाल

नर्मदापुरम/सिवनी मालवा। सिवनी मालवा विधानसभा क्षेत्र की शिवपुर तहसील अंतर्गत ग्राम कोठरा स्थित पंचमुखी वेयरहाउस में शासकीय गेहूं गायब होने का बड़ा मामला सामने आया है। करीब 800 क्विंटल (लगभग 1600 बोरी) गेहूं स्टॉक से गायब मिलने के बाद प्रशासन में हड़कंप मच गया है और भंडारण व्यवस्था की पारदर्शिता पर गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं।

जानकारी के अनुसार, मामले का खुलासा तब हुआ जब एसडीएम विजय राय अपनी टीम के साथ खरीदी केंद्र शुरू होने से पहले निरीक्षण के लिए पहुंचे। प्रारंभिक जांच में स्टॉक में गड़बड़ी की आशंका होने पर वेयरहाउस को तत्काल सील कर दिया गया। तीन दिन बाद, सल्फास का असर खत्म होने पर जब वेयरहाउस खोला गया और स्टॉक की गिनती की गई, तो 1600 बोरी गेहूं कम पाया गया।

एसडीएम विजय राय के अनुसार, रबी उपार्जन 2025-26 के तहत रखे गए गेहूं का भौतिक सत्यापन किया गया था, जिसमें भारी कमी सामने आई। वेयरहाउस संचालक से पूछताछ में संतोषजनक जवाब नहीं मिलने पर एफआईआर दर्ज करने के निर्देश दिए गए हैं।

सिर्फ चोरी नहीं, सिस्टम पर सवाल
यह मामला महज गेहूं चोरी का नहीं, बल्कि पूरी भंडारण व्यवस्था की विश्वसनीयता पर सवाल खड़ा करता है। सबसे बड़ा प्रश्न यह है कि इतनी बड़ी मात्रा में शासकीय अनाज आखिर गायब कैसे हो गया?

क्या वेयरहाउस की चाबी संचालक के पास होना नियमों के खिलाफ था? क्या बिना अधिकारियों की मिलीभगत के इतना बड़ा घोटाला संभव है? क्या गेहूं एक बार में गायब हुआ या लंबे समय से धीरे-धीरे बाहर किया जा रहा था?

रिकॉर्ड और निगरानी पर भी सवाल
स्टॉक रजिस्टर और वास्तविक स्टॉक का मिलान समय-समय पर क्यों नहीं किया गया? क्या कागजों में हेरफेर कर स्टॉक पूरा दिखाया जा रहा था? वेयरहाउस में सुरक्षा व्यवस्था—जैसे सीसीटीवी, गार्ड या निगरानी प्रणाली—कितनी प्रभावी थी और यदि थी तो नाकाम क्यों रही?

यह भी जांच का विषय है कि गेहूं को बाहर ले जाने में ट्रांसपोर्टरों की कोई भूमिका रही या नहीं। साथ ही, इस वेयरहाउस में कब से शासकीय अनाज रखा जा रहा था और क्या पहले कभी इसकी गहन जांच हुई थी?

क्या अन्य वेयरहाउस भी जांच के दायरे में आएंगे?
इस घटना ने पूरे क्षेत्र के अन्य वेयरहाउसों को भी संदेह के घेरे में ला दिया है। सवाल उठ रहा है कि क्षेत्र में कुल कितने वेयरहाउस हैं और क्या सभी का व्यापक ऑडिट किया जाएगा?

जिम्मेदारी और रिकवरी पर नजर
अब सबसे अहम मुद्दा यह है कि इस घोटाले की जिम्मेदारी किस स्तर तक तय होगी—क्या केवल वेयरहाउस संचालक पर कार्रवाई होगी या संबंधित अधिकारी-कर्मचारी भी जांच के दायरे में आएंगे? साथ ही, सरकार को हुए नुकसान की भरपाई कैसे की जाएगी और क्या दोषियों से रिकवरी की जाएगी?

फिलहाल पुलिस ने मामला दर्ज कर जांच शुरू कर दी है, लेकिन इस पूरे प्रकरण ने एक बार फिर यह साबित कर दिया है कि यदि निगरानी तंत्र मजबूत न हो, तो शासकीय संसाधनों की सुरक्षा केवल कागजों तक सीमित रह जाती है। अब देखना होगा कि जांच कितनी पारदर्शी होती है और कब तक इस घोटाले की पूरी सच्चाई सामने आती है।




ओमप्रकाश रघुवंशी का माखन नगर में पुष्पहार से स्वागत, 5 नवंबर से पैदल नर्मदा परिक्रमा पर

माखन नगर। सिवनी मालवा के पूर्व विधायक ओमप्रकाश रघुवंशी इन दिनों मां नर्मदा की आस्था से प्रेरित होकर पैदल नर्मदा परिक्रमा पर हैं। 5 नवंबर से प्रारंभ हुई इस आध्यात्मिक यात्रा के दौरान सोमवार को उन्होंने नगर के समीप ग्राम गुराड़िया में रात्रि विश्राम किया और मंगलवार को माखन नगर पहुंचे, जहां उनका श्रद्धा और उत्साह के साथ स्वागत किया गया।

नगर आगमन पर वरिष्ठ समाजसेवी कुलदीप मिश्रा के प्रतिष्ठान पर शाल-श्रीफल भेंट कर पुष्पहारों से उनका अभिनंदन किया गया। इस दौरान बड़ी संख्या में नगरवासी उपस्थित रहे। परिक्रमा में उनके साथ उमेश रघुवंशी एवं भोला रघुवंशी भी शामिल हैं, जो मां नर्मदा की पैदल परिक्रमा कर रहे हैं।

सुभाष चौक पर सेनानी परिवार के समाजसेवी एवं पूर्व लायंस क्लब अध्यक्ष दीपक वर्मा ने अपने साथी फूलचंद वर्मा के साथ सभी परिक्रमावासियों को शाल-श्रीफल भेंट कर सम्मानित किया। वहीं पूर्व जिला युवक कांग्रेस अध्यक्ष शैलेंद्र गोयल के प्रतिष्ठान ‘पलाश मोटर्स’ पर भी परिक्रमा दल का आत्मीय स्वागत किया गया।

आंचल खेड़ा स्थित अग्रवाल कृषि फार्म पर सभी परिक्रमावासियों ने भोजन प्रसादी ग्रहण की। इस अवसर पर पूर्व विधायक रघुवंशी ने कहा कि वे मां नर्मदा की प्रेरणा से यह परिक्रमा कर रहे हैं और प्रार्थना करते हैं कि मां नर्मदा समस्त क्षेत्रवासियों का कल्याण करें। उन्होंने बताया कि सभी परिक्रमावासी 5 मार्च को ओंकारेश्वर पहुंचेंगे।

परिक्रमा वासियों के स्वागत में रामनारायण लल्लाभैया, मुकेश मालवीय, उमेश तिवारी, प्रदीप शर्मा, दीपक शर्मा, ब्रज भारती बड़गूजर, राजकुमार गुप्ता, अरुण तिवारी, कैलाश भगोरिया, संजय वर्मा, गिरीश वर्मा, अरविंद सोलंकी, अनिल चौरे, शेखर राजपूत, रत्नेश बड़गूजर, मुकेश सोनी, हरि प्रजापति सहित अनेक श्रद्धालु उपस्थित रहे। सभी ने मां नर्मदा के जयकारों के साथ परिक्रमावासियों का स्वागत कर उनके आध्यात्मिक संकल्प की सराहना की।




नर्मदापुरम की सनसनीखेज घटना: पोते की चाहत में Grandmother ने की मासूम पोती की हत्या

(Grandmother)

नर्मदापुरम: मध्य प्रदेश (Madhya Pradesh) के नर्मदापुरम जिले से एक ऐसी घटना सामने आई है जिसने पूरे प्रदेश ही नहीं, बल्कि देशभर को झकझोर कर रख दिया। जिले की सिवनी मालवा तहसील के ग्राम बेरखेड़ी में एक चार माह की मासूम बच्ची की हत्या उसकी सगी दादी (Grandmother) ने कर दी। कारण था—उसे पोते की चाहत थी और पोती के जन्म से वह खुश नहीं थी। इस नृशंस वारदात ने एक बार फिर समाज में व्याप्त लिंग भेदभाव, अंधविश्वास और पितृसत्तात्मक सोच पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।

(Grandmother)

हत्या की वारदात: झूले से लेकर कुएं तक का सफर

मीडिया रिपोर्ट्स और पुलिस के मुताबिक, 27 मई को जन्मी यह मासूम बच्ची अपने घर के आँगन में झूले पर खेल रही थी। उसकी मां घर के अंदर बर्तन धोने में व्यस्त थी। इसी बीच दादी (Grandmother) मीनाबाई ने मौका पाकर बच्ची के मुंह में गमछे का टुकड़ा ठूंस दिया। कपड़े का टुकड़ा लगभग 24 सेंटीमीटर लंबा और 10 सेंटीमीटर चौड़ा था, जिससे बच्ची का दम घुट गया और उसकी मौत हो गई। हत्या के बाद आरोपी दादी (Grandmother) ने शव को पोटली में बांधा और उसे पास के सूखे कुएं में फेंक दिया। फिर वह घर लौटकर ऐसे सामान्य व्यवहार करने लगी मानो कुछ हुआ ही न हो। उसने खुद को संदेह से बचाने के लिए बाड़े की सफाई करना शुरू कर दिया।


परिवार और गांव में मचा हड़कंप

बच्ची अचानक घर से गायब हो गई तो परिवार के लोग परेशान हो गए। पिता शुभम अशवारे उस समय घर पर नहीं थे। जब बच्ची नहीं मिली तो पूरा परिवार और ग्रामीण खोजबीन में जुट गए। खोज के दौरान दादा और गांव के कुछ लोगों ने कुएं में एक पोटली देखी। पहले इसे नजरअंदाज कर दिया गया, लेकिन जब शक गहराया तो उसे बाहर निकालने की बात हुई। तब दादी (Grandmother) मीनाबाई ने लोगों को यह कहकर रोक दिया कि पोटली में महावारी के गंदे कपड़े रखे हैं। ग्रामीणों ने बात मान ली और पोटली खोलने से बचते रहे। लेकिन जब पुलिस को सूचना दी गई और पोटली खोली गई, तो सबके पैरों तले जमीन खिसक गई। अंदर मासूम बच्ची का शव था।


पुलिस की जांच और कबूलनामा

थाना प्रभारी राजेश दुबे के अनुसार, फोरेंसिक टीम की मदद से बच्ची का पोस्टमार्टम कराया गया। डॉक्टरों ने बताया कि बच्ची के मुंह में कपड़ा ठूंसने से उसका दम घुटा और यही उसकी मौत का कारण बना। शक के आधार पर जब पुलिस ने दादी (Grandmother) मीनाबाई से पूछताछ की, तो पहले वह बचती रही लेकिन कड़ी पूछताछ के बाद उसने अपना अपराध स्वीकार कर लिया। पुलिस ने उसे गिरफ्तार कर लिया है और बीएनएस की धारा 103(1) के तहत केस दर्ज किया है।


पिता की पीड़ा: न्याय की मांग

बच्ची के पिता शुभम अशवारे ने मीडिया से बातचीत में कहा— “मैं काम पर गया हुआ था, तभी घर से सूचना मिली कि बच्ची गायब है। हमने बहुत खोजा लेकिन वह नहीं मिली। बाद में कुएं में पोटली मिली। मेरी माँ ने कबूल किया है कि उन्होंने बच्ची को मारा है। लेकिन मुझे समझ नहीं आ रहा कि उन्होंने डर में कबूल किया है या सच में यह किया है। मैं बस यही चाहता हूँ कि मुझे न्याय मिले।” यह बयान बताता है कि यह घटना केवल एक हत्या नहीं, बल्कि परिवार के लिए गहरे मानसिक और भावनात्मक आघात का कारण भी है।


सामाजिक दृष्टिकोण: पोते की चाहत का बोझ

यह मामला सिर्फ एक आपराधिक घटना नहीं, बल्कि समाज की उस कड़वी सच्चाई को भी उजागर करता है जहां आज भी बेटियों को बोझ माना जाता है और बेटों की चाह में लोग अपराध तक कर बैठते हैं। भारत में बेटी बचाओ-बेटी पढ़ाओ जैसी योजनाएं चल रही हैं, लेकिन ग्रामीण और परंपरागत समाज में अभी भी मानसिकता नहीं बदली है। दादी (Grandmother) जैसे लोगों की सोच इस बात को साबित करती है कि शिक्षा और जागरूकता के बिना केवल सरकारी योजनाएं पर्याप्त नहीं हैं।

ये भी पढ़े Salkanpur Devidham जाने वाले श्रद्धालुओं की सेवा में चाय वितरण


कानूनी पहलू

भारतीय न्याय प्रणाली के नए कानूनों के तहत यह मामला मानव वध (Culpable Homicide) की श्रेणी में दर्ज किया गया है। बीएनएस (भारतीय न्याय संहिता) की धारा 103(1) के तहत हत्या का दोषी पाए जाने पर कड़ी सजा का प्रावधान है। इसके अलावा, यह मामला बाल अधिकारों और महिला संरक्षण कानूनों से भी जुड़ा हुआ है। पुलिस और अदालत इस मामले को उदाहरण बनाने की दिशा में कदम उठा सकती हैं ताकि भविष्य में कोई और ऐसा कृत्य न कर सके।


गांव और समाज पर असर

ग्राम बेरखेड़ी में इस घटना के बाद गहरा आक्रोश है। लोग हैरान हैं कि एक सगी दादी (Grandmother) ने अपनी ही पोती की जान ले ली। ग्रामीणों का कहना है कि इस घटना ने पूरे गांव की आत्मा को झकझोर दिया है। यह घटना समाज को एक बड़ा सबक देती है—कि हमें अभी भी लिंग भेदभाव के खिलाफ लंबे संघर्ष की जरूरत है।


बदलती मानसिकता की दरकार

चार माह की मासूम बच्ची का कत्ल केवल एक पारिवारिक अपराध नहीं, बल्कि सामाजिक बीमारी का परिणाम है। पोते की चाहत और पोती के प्रति भेदभाव ने एक निर्दोष जीवन छीन लिया। समाज को अब यह समझना होगा कि बेटा-बेटी में कोई फर्क नहीं। जिस घर से बेटियों को तुच्छ समझा जाता है, वही घर आगे चलकर अंधकार में डूब जाता है। जरूरी है कि इस मामले को एक मिसाल बनाया जाए और दोषी को कड़ी से कड़ी सजा मिले। साथ ही ग्रामीण इलाकों में जागरूकता अभियान, महिला शिक्षा और मानसिकता में बदलाव की दिशा में ठोस कदम उठाए जाएं।

ये भी पढ़े भारतीय Smartphone बाजार 2025 की तीसरी तिमाही: स्थिरता, Apple की बढ़त और Android की चुनौतियाँ




महिला शक्ति के संग उमड़ा उत्साह, सिवनी मालवा में जिला बैठक रही खास

सिवनी मालवा। माहेश्वरी नर्मदापुरम जिला महिला संगठन की बैठक सिवनी मालवा में उत्साहपूर्वक सम्पन्न हुई। कार्यक्रम में मुख्य अतिथि के रूप में संयुक्त राष्ट्रीय मंत्री श्रीमती अनीता जवांदिया, राष्ट्रीय उपाध्यक्ष श्रीमती शिखा जवांदिया और प्रदेश सचिव श्रीमती राजश्री राठी उपस्थित रहीं। सिवनी इकाई द्वारा अतिथियों का स्वागत उपटन व श्रीफल से किया गया।

बैठक में जिला अध्यक्ष संगीता जवांदिया ने सामाजिक गतिविधियों को बढ़ावा देने पर जोर दिया, जबकि जिला सचिव सरला महेश्वरी ने स्थानीय संगठनों को मजबूत बनाने का आह्वान किया। सिवनी अध्यक्ष निरु महेश्वरी ने बच्चों को अच्छे संस्कार देने और शादियों में अनावश्यक खर्च रोकने की आवश्यकता पर बल दिया।

जिले की वरिष्ठ माताओं को श्रीफल व साल भेंटकर सम्मानित किया गया। प्रदेश स्तर पर आयोजित प्रतियोगिताओं के विजेताओं को पुरस्कार भी वितरित किए गए। कार्यक्रम में छोटे बच्चों ने पर्यावरण पर आधारित नाटिका प्रस्तुत कर सभी को संदेश दिया, जिसे सराहा गया और उन्हें सम्मानित किया गया। स्वागत गीत और महेश वंदना ने वातावरण को भक्ति और उमंग से भर दिया।

जिला कोषाध्यक्ष ने आय-व्यय का विवरण प्रस्तुत किया। सांस्कृतिक मंत्री किरण मुंदड़ा और सरला महेश्वरी द्वारा मनोरंजक अंताक्षरी प्रतियोगिता आयोजित की गई, जिसमें प्रतिभागियों को पुरस्कार प्रदान किए गए। अंत में संध्या मुंदड़ा ने आभार व्यक्त किया।

बैठक में आशा मालपानी, रुचि बाहेती, वीना मुंदड़ा, सुनीता सारडा, हेमा मोहता समेत सभी पदाधिकारी उपस्थित रहीं। पदाधिकारी बहनों और युवा मंडल-सेवा मंडल की सक्रियता से कार्यक्रम सफलतापूर्वक सम्पन्न हुआ।




Denvapost Exclusive : पोषण ट्रैकर एप: तकनीक ने बढ़ाई पारदर्शिता या खड़ी की दीवारें?

नर्मदापुरम। महिला एवं बाल विकास विभाग द्वारा पारदर्शिता बढ़ाने के उद्देश्य से लागू की गई पोषण ट्रैकर एप व्यवस्था, व्यवहारिक धरातल पर कई चुनौतियों से जूझ रही है। जिले की करीब 1470 आंगनवाड़ी कार्यकर्ताओं के सामने यह नई तकनीक सुविधा से अधिक बाधा बनकर सामने आई है।

तकनीक और ज़मीनी वास्तविकताओं में टकराव

नई व्यवस्था में लाभार्थियों को पोषण आहार वितरण से पहले उनके चेहरे की पहचान और आधार लिंक मोबाइल नंबर पर भेजे गए ओटीपी के जरिए सत्यापन किया जाता है। लेकिन हकीकत यह है कि अधिकांश ग्रामीण क्षेत्रों में न तो नेटवर्क की सुविधा है और न ही लाभार्थियों के पास अपडेटेड मोबाइल नंबर। साथ ही, जिन कार्यकर्ताओं के पास विभाग द्वारा पहले दिए गए स्मार्टफोन हैं, उनकी तकनीकी गुणवत्ता इतनी कमज़ोर है कि न तो चेहरा स्कैन हो पाता है और न ही एप सुचारू रूप से काम करता है।

प्रमुख व्यवहारिक समस्याएं

आधार लिंक मोबाइल नंबर की अनुपलब्धता या सिम गुम होना।

दूरस्थ गांवों में नेटवर्क की अनुपस्थिति।

गर्भवती महिलाओं का केंद्र तक न पहुंच पाना।

पुराने मोबाइल की कैमरा और प्रोसेसिंग क्षमता सीमित।

एप की धीमी गति के कारण समय की बर्बादी।

ओटीपी न आने से वितरण बाधित।

सिर्फ माताओं को ही मिलेगा पोषण आहार

पहले पोषण आहार परिवार के किसी भी सदस्य को दिया जा सकता था, लेकिन अब एप के जरिए सिर्फ माताओं की फेस स्कैनिंग अनिवार्य कर दी गई है। इससे वे महिलाएं जो किसी कारणवश केंद्र नहीं पहुंच पातीं, उन्हें पोषण आहार नहीं मिल पा रहा है। यह परिवर्तन खुद एक नई समस्या बन गया है।

निजी खर्च में झांकता सरकारी भार

सुमित्रा अहीरवाल, जिला अध्यक्ष, आंगनवाड़ी कार्यकर्ता संगठन के अनुसार: “शासन ने जो मोबाइल पहले दिए थे, अब वो तकनीकी रूप से अनुपयुक्त हो चुके हैं। नेटवर्क नहीं है, ओटीपी नहीं आता, एप हैंग होता है – ऐसे में हम पर नया मोबाइल खरीदने का दबाव आ रहा है।”

ऐसे काम करता है एप

1. लाभार्थी का चेहरा स्कैन किया जाता है।

2. उसके आधार से लिंक मोबाइल नंबर पर ओटीपी भेजा जाता है।

3. ओटीपी सफलतापूर्वक दर्ज होने के बाद ही पोषण आहार वितरण की पुष्टि होती है।

लेकिन जब मोबाइल नंबर बंद हो, बदले जा चुके हों या नेटवर्क ही न हो — तब यह पूरी प्रक्रिया रुक जाती है और सबसे अधिक प्रभावित होती है वह महिला या बच्चा जिसके लिए यह योजना बनाई गई थी।

क्या चाहिए सुधार के लिए?

विभाग को कार्यकर्ताओं को नई तकनीकी सुविधाएं (उन्नत स्मार्टफोन, नेटवर्क आधारित समाधान) देना होगा।

नेटवर्कविहीन क्षेत्रों के लिए ऑफ़लाइन वेरिफिकेशन मोड शुरू किया जाए।

ओटीपी आधारित प्रक्रिया के विकल्प के रूप में फिजिकल वेरिफिकेशन या रजिस्टर सिस्टम लागू किया जाए।

योजना के उद्देश्य को ध्यान में रखते हुए, लचीलापन और व्यावहारिकता लाई जाए।

तकनीकी नवाचार आवश्यक है, लेकिन वह तभी सार्थक होता है जब नीतियों की ज़मीन हकीकत से जुड़ी हो। पोषण ट्रैकर एप की वर्तमान प्रणाली लाभ की बजाय लाचारियों और तकनीकी उलझनों का पर्याय बनती जा रही है। ज़रूरत है कि नीति निर्माता जमीनी रिपोर्टों को गंभीरता से लें और व्यवस्था को ऐसा स्वरूप दें, जो लाभार्थी केंद्रित हो, न कि केवल डाटा केंद्रित।




Narmadapuram News : स्लॉट बुकिंग नहीं, जवाब भी नहीं – किसान जाएं तो जाएं कहां?

एक तरफ सरकार किसानों की आय दोगुनी करने की बात करती है, तो दूसरी तरफ ज़मीनी हकीकत यह है कि जिले के करीब 13 हजार से ज्यादा किसान अपनी उपज बेचने के लिए स्लॉट बुकिंग तक नहीं कर पा रहे हैं। जिनकी मूंग खलिहानों में सड़ रही है, वे केवल एक सवाल पूछ रहे हैं — “हम कब बेच पाएंगे अपनी फसल?” और जवाब में मिल रहा है — “पता नहीं।”

किसान कामता प्रसाद दुबे जैसे न जाने कितने किसान हैं, जो 20-30 क्विंटल मूंग लेकर समिति के चक्कर काट रहे हैं। न स्लॉट बुकिंग हो रही है, न अफसरों के पास कोई स्पष्ट उत्तर। किसानों की आवाज़ प्रशासन की फाइलों और तकनीकी बहानों में दबकर रह गई है।

राजीव यादव (ADA) का बयान तो और भी निराशाजनक है। उनका कहना है कि “स्लॉट बुकिंग तो होगी लेकिन कब होगी, यह नहीं बता सकते।” वजह — टेक्निकल समस्या। सिस्टम में ‘स्टेक’ खाली नहीं दिख रहे हैं।

अब सवाल यह है कि जब हज़ारों किसान अपनी उपज लेकर तैयार हैं, सहकारी समिति में पहुंचने को बेताब हैं, तब सरकार का तकनीक के नाम पर हाथ खड़े कर देना क्या किसानों के साथ अन्याय नहीं?

क्या यह वही ‘डिजिटल इंडिया’ है, जिसकी दुहाई हर मंच से दी जाती है?

क्या ये वही ‘स्मार्ट एग्रीकल्चर सिस्टम’ है, जिसके लिए करोड़ों खर्च हो रहे हैं?

या फिर यह उस तंत्र की सच्चाई है, जो हर सीजन में किसानों की उम्मीदों का गला घोंट देता है?

प्रशासन कहता है – “समस्या तकनीकी है।”
किसान पूछते हैं – “तो समाधान कब आएगा?”
प्रशासन कहता है – “कुछ कह नहीं सकते।”
किसान कहते हैं – “तो हमें मूंग सड़ने दें?”

कितनी विडंबना है कि किसान जो साल भर मेहनत कर अन्न पैदा करता है, उसे अपना ही माल बेचने के लिए ‘स्लॉट’ की भीख मांगनी पड़ रही है और अफसर हैं कि बस इतना कहकर पल्ला झाड़ लेते हैं – “जैसे ही तकनीकी समस्या हल होगी, प्रक्रिया शुरू कर देंगे।”

सरकार और प्रशासन को यह समझना होगा कि यह महज ‘तकनीकी समस्या’ नहीं, यह विश्वास की गिरती हुई दीवार है। अगर समय रहते समाधान नहीं निकाला गया, तो किसान सिर्फ मूंग नहीं सड़ाएगा, वह अपनी उम्मीदें और भरोसा भी जला देगा।