
माखननगर। प्रदेश में धान खरीदी की आधिकारिक शुरुआत अभी नहीं हुई है, लेकिन कई खरीदी केंद्रों पर पहले से ही धान के ढेर दिखाई देने लगे हैं। यह स्थिति किसानों के बीच गहरी नाराजगी और प्रशासन की कार्यशैली पर गंभीर सवाल खड़े कर रही है।
सूत्रों के अनुसार, राज्य सरकार की ओर से अब तक धान खरीदी को लेकर कोई स्पष्ट निर्देश जारी नहीं किए गए हैं। फिलहाल खरीदी की जिम्मेदारी नान (मध्यप्रदेश नागरिक आपूर्ति निगम) के माध्यम से होने की संभावना बताई जा रही है, लेकिन उसकी भी औपचारिक घोषणा लंबित है। ऐसे में केंद्रों पर फ़सल का पहुंचना नियमों के विपरीत और सवालों से भरा मामला है।
किसे और कैसे मिली खरीदी केंद्र की “पहले खरीदी” की खबर?
स्थानीय किसानों का कहना है कि खरीदी शुरू होने की न कोई तारीख घोषित हुई, न स्लॉट बुकिंग की प्रक्रिया पूर्ण हुई, फिर भी कुछ किसानों ने खरीदी केंद्रों पर पहले ही धान पहुंचा दी है।
सबसे बड़ा प्रश्न यही है कि—
“जब सरकार ने खरीदी शुरू ही नहीं की, तो कुछ किसानों को कैसे पता चला कि उन्हें इसी केंद्र पर सबसे पहले खरीदी का मौका मिलेगा?”
गांव में चर्चा है कि कुछ प्रभावशाली किसान या बिचौलिये “अंदरूनी जानकारी” के भरोसे धान केंद्रों पर पहले से स्थान घेर रहे हैं, जिससे सामान्य और छोटे किसान हताश हो रहे हैं।
प्रशासन अनजान कैसे?
धान खरीदी केंद्रों पर सुरक्षा और निगरानी व्यवस्था होती है। बिना समिति के कर्मचारी, चौकीदार या स्थानीय अधिकारी की अनुमति के कोई धान केंद्र में प्रवेश कर ही नहीं सकता।
ऐसे में यह सवाल उठना स्वाभाविक है कि— “प्रशासन वास्तव में अनजान है, या फिर अनदेखी की जा रही है?”
किसानों का आरोप है कि यह सब मिलीभगत के बिना संभव नहीं है। यदि फसल समय से पहले स्वीकार की गई है, तो यह नियमों का उल्लंघन है और जिम्मेदारों पर कार्रवाई होनी चाहिए।
किसान विजय का दर्द—“हम कहां रखें अपनी धान?”
किसान विजय ने देनवापोस्ट को बताया
“अभी खरीदी शुरू ही नहीं हुई और रसूखदार लोगों ने पहले ही अपनी धान ढेर लगा रखी है। जब हम जैसी सामान्य किसानों का नंबर आएगा तो जगह नहीं बचेगी। ऐसे में हम कैसे बेचेंगे, कुछ समझ नहीं आ रहा।”
उनकी यह पीड़ा छोटे किसानों की सामूहिक चिंता है। बारिश, खेतों में नमी जैसी चुनौतियों से जूझने के बाद किसान अब खरीदी प्रक्रिया की गड़बड़ी से परेशान हैं।
केंद्रों पर रखी धान—क्या किसानों के साथ धोखा?
कई ग्रामीणों ने इस स्थिति को छोटे किसानों के साथ स्पष्ट धोखाधड़ी बताया है। जब खरीदी प्रारंभ ही नहीं हुई है, तब केंद्र में धान की मौजूदगी नियमों के विरुद्ध है। यह संकेत देता है कि या तो प्रभावशाली लोग अपनी पकड़ का उपयोग कर रहे हैं, या स्थानीय केंद्र प्रभारी और कर्मचारी जानबूझकर नियमों को नजरअंदाज कर रहे हैं।

सूत्रों के अनुसार, खरीदी शुरू होने से पहले धान रखना अवैधानिक माना जाता है। यह न केवल प्रशासनिक व्यवस्था पर प्रश्नचिह्न है, बल्कि वास्तविक खरीदी के समय किसानों के अधिकारों का उल्लंघन भी है।
नान DM श्रीमती रश्मि साहू ने कहा—“मैं अभी खरीदी चेक करवाती हूं”
मामले पर नागरिक आपूर्ति निगम (नान) की जिला प्रबंधक श्रीमती रश्मि साहू से संपर्क किया गया, तो उन्होंने तत्काल प्रतिक्रिया देते हुए कहा—“मैं अभी खरीदी केंद्रों की स्थिति चेक करवाती हूं।”
उनका यह बयान यह दर्शाता है कि विभाग को स्थिति की जानकारी नहीं थी या जानकारी मिलने के बाद अब निगरानी बढ़ाई जाएगी। किसानों को उम्मीद है कि जांच के बाद यदि कोई अनियमितता पाई जाती है तो कठोर कार्रवाई होगी।
किसानों की मांगें—
खरीदी शुरू होने से पहले केंद्रों पर रखी धान की जांच और सत्यापन हो।
अवैध रूप से रखी धान को तुरंत हटाया जाए।
केंद्र प्रभारी और कर्मचारियों की जवाबदेही तय की जाए।
खरीदी शुरू होने पर सभी किसानों को समान अवसर मिले।
पहले-आओ पहले-पाओ की नीति पारदर्शी रूप में लागू की जाए।
धान खरीदी शुरू होने से पहले ही केंद्रों पर धान पहुंच जाना इस बात का संकेत है कि कहीं न कहीं नियम, प्रणाली और निगरानी की बड़ी खामी है। छोटे किसानों की चिंता सही है—यदि शुरुआत में ही अव्यवस्था फैल जाएगी, तो वास्तविक खरीदी प्रक्रिया प्रभावित होगी।
अब गेंद प्रशासन और नान के पाले में है।
किसानों को उम्मीद है कि जांच के बाद इस गड़बड़ी पर अंकुश लगेगा और खरीदी प्रक्रिया पारदर्शी एवं न्यायसंगत होगी।