
मध्य प्रदेश की राजधानी भोपाल सहित ग्वालियर, सिंगरौली और जबलपुर को वायु प्रदूषण से बचाने के लिए मुख्यमंत्री डॉ मोहन यादव ने बड़ा फैसला लिया है। उपरोक्त चारों शहरों में और इसके अलावा उन सभी शहरों में जहां पर वायु प्रदूषण बढ़ रहा है। सभी शहरों में पुरानी गाड़ियों को डीजल और पेट्रोल नहीं दिया जाएगा। ट्रैफिक पुलिस पुरानी गाड़ियों को सड़क पर चलने से रोकेगी और उनके खिलाफ प्रदूषण नियंत्रण की कार्रवाई की जाएगी।
जिस शहर का AQI 100 से अधिक हुआ वहां प्रतिबंध लग जाएगा
राष्ट्रीय स्वच्छ वायु गुणवत्ता कार्यक्रम की तरह मध्य प्रदेश भी राज्य स्तरीय कार्यक्रम बनाएगा। इसमें 100 या इससे अधिक एक्यूआइ वाले शहरों को शामिल किया जाएगा। उन पर नए सिरे से काम होगा। सीएम डॉ. यादव ने शुक्रवार को पर्यावरण विभाग की समीक्षा बैठक में इस पर अफसरों को नए सिरे से काम करने के निर्देश दिए हैं। उन्होंने सिंहस्थ को देखते हुए शिप्रा और कान्ह नदी के जल की गुणवत्ता की लगातार निगरानी करने के भी निर्देश दिए हैं। यह भी कहा कि रामसर साइट अधिसूचित किए जाएं और औद्योगिक इकाइयों से निकलने वाले डिस्चार्ज का ह्रश्वलांट में ही ट्रीटमेंट हो।
परिवहन विभाग की मेहरबानी से पांच राज्यों की खटारा गाड़ियां मध्य प्रदेश में
मध्य प्रदेश के परिवहन विभाग में भ्रष्टाचार के कारण महाराष्ट्र, दिल्ली, हरियाणा, पंजाब व उत्तर प्रदेश की खटारा गाड़ियों को मध्य प्रदेश में खपाया जा रहा है। यहां सड़क पर दौड़ने वाली कई स्कूल बसें, यात्री बसें और अन्य वाहनों की नंबर प्लेट पर उपरोक्त राज्यों के नंबर मिल जाएंगे। परिवहन विभाग ऐसी गाड़ियों को ना तो पकड़ता है और ना ही इनके खिलाफ कोई कार्रवाई करता है। ओनरशिप ट्रांसफर के बिना ही हजारों गाड़ियां मध्य प्रदेश में नियमित रूप से चल रही है। इन गाड़ियों से गंभीर वायु प्रदूषण होता है। काला धुआं सबके सामने दिखाई देता है, लेकिन परिवहन विभाग कभी इन गाड़ियों को पकड़ने का काम नहीं करता।
वायु प्रदूषण से मुक्ति के लिए दिल्ली में हाल ही में भाजपा सरकार ने नई व्यवस्था बनाई है। इसके तहत दिनांक 1 अप्रैल 2025 से 15 साल पुरानी पेट्रोल गाड़ियों को पेट्रोल और 10 साल पुरानी डीजल गाड़ियों को डीजल नहीं मिलेगा।