कोटा रेल मंडल में रविवार अल सुबह उस समय हड़कंप मच गया, जब त्रिवेंद्रम से हजरत निजामुद्दीन जा रही राजधानी एक्सप्रेस के एसी कोच में अचानक भीषण आग लग गई। हादसा विक्रमगढ़ आलोट और लूनीरिचा रेलवे स्टेशनों के बीच हुआ, जहां देखते ही देखते आग ने ट्रेन के थर्ड एसी और एसएलआर कोच को अपनी चपेट में ले लिया। घटना के बाद ट्रेन में अफरा-तफरी मच गई और यात्रियों में दहशत फैल गई।
प्रत्यक्षदर्शियों के मुताबिक हादसे के समय अधिकांश यात्री अपने-अपने केबिन में सो रहे थे। अचानक कोच से धुआं उठता देख लोगों की नींद खुली और चीख-पुकार शुरू हो गई। ट्रेन रुकते ही यात्री जान बचाने के लिए जल्दबाजी में नीचे उतरने लगे। कई यात्री अपना सामान तक कोच में छोड़कर बाहर निकल आए।
घटना की सूचना मिलते ही कोटा रेलवे स्टेशन पर आपातकालीन हूटर बजाया गया, जिसके बाद रेलवे प्रशासन तुरंत हरकत में आया। मेडिकल टीम, फायर ब्रिगेड और दुर्घटना राहत ट्रेन को तत्काल मौके के लिए रवाना किया गया। रेलवे अधिकारियों के साथ भारी पुलिस बल भी घटनास्थल पर पहुंच गया।
कोटा रेल मंडल के सीनियर डीसीएम सौरभ जैन ने बताया कि आग लगने की सूचना मिलते ही राहत एवं बचाव कार्य शुरू कर दिया गया था। राहत की बात यह रही कि इस हादसे में किसी यात्री के हताहत होने की सूचना नहीं है। आग प्रभावित कोच के यात्रियों को सुरक्षित बाहर निकालकर अन्य डिब्बों में शिफ्ट किया गया।
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रेलवे कर्मचारियों ने एहतियात के तौर पर तुरंत ओएचई (OHE) यानी ओवरहेड बिजली सप्लाई बंद करवा दी, ताकि आग और अधिक न फैल सके। इसके चलते कोटा रेल मंडल के इस महत्वपूर्ण रेल मार्ग पर ट्रेनों का संचालन पूरी तरह प्रभावित हो गया और कई ट्रेनें रास्ते में रोकनी पड़ीं।
घटना के बाद रेलवे की तकनीकी टीम आग लगने के कारणों की जांच में जुट गई है। शुरुआती जांच में शॉर्ट सर्किट की आशंका जताई जा रही है, हालांकि अधिकारी अभी किसी निष्कर्ष पर पहुंचने से बच रहे हैं। रेलवे प्रशासन ने कहा है कि जांच रिपोर्ट आने के बाद ही आग लगने के वास्तविक कारणों का खुलासा हो सकेगा।
इस हादसे ने एक बार फिर रेलवे की सुरक्षा व्यवस्थाओं पर सवाल खड़े कर दिए हैं। गर्मी के मौसम में लगातार बढ़ रही तकनीकी घटनाओं के बीच यात्रियों की सुरक्षा को लेकर रेलवे पर दबाव बढ़ता जा रहा है। यात्रियों का कहना है कि अगर समय रहते आग पर काबू नहीं पाया जाता, तो बड़ा हादसा हो सकता था।