इंदौर की स्कीम नंबर-71 का मामला, खाद्य एवं नागरिक आपूर्ति विभाग से निष्पक्ष जांच की मांग
इंदौर। शहर की स्कीम नंबर-71 में घरेलू गैस सिलेंडर में निर्धारित मात्रा से कम गैस मिलने का मामला सामने आया है। क्षेत्र के एक उपभोक्ता ने एचपी गैस की सांई लक्ष्मी गैस एजेंसी पर सीलबंद सिलेंडर में दो किलोग्राम से अधिक गैस कम देने का आरोप लगाया है। इतना ही नहीं, शिकायत करने पर एजेंसी संचालक द्वारा धमकी देने और अभद्र व्यवहार किए जाने का भी दावा किया गया है। मामले की लिखित शिकायत खाद्य एवं नागरिक आपूर्ति विभाग को सौंप दी गई है।
वजन में मिली 2.150 किलोग्राम गैस की कमी का दावा
स्कीम नंबर-71 निवासी अरुण माहेश्वरी के अनुसार, 20 जून को उनके घर एचपी की सांई लक्ष्मी गैस एजेंसी द्वारा घरेलू गैस सिलेंडर की डिलीवरी की गई। सिलेंडर का वजन सामान्य से कम महसूस होने पर उन्होंने बिना सील तोड़े उसका वजन कराया।
उनका दावा है कि इलेक्ट्रॉनिक कांटे पर सिलेंडर का कुल वजन 27.350 किलोग्राम निकला, जबकि सिलेंडर पर अंकित जानकारी के अनुसार खाली सिलेंडर का वजन 15.100 किलोग्राम तथा गैस का शुद्ध वजन 14.400 किलोग्राम होना चाहिए था। इस आधार पर कुल वजन 29.500 किलोग्राम होना अपेक्षित था। उपभोक्ता का आरोप है कि सिलेंडर में लगभग 2.150 किलोग्राम गैस कम पाई गई।
शिकायत करने पर धमकी देने का आरोप
अरुण माहेश्वरी का आरोप है कि उन्होंने एजेंसी के आधिकारिक नंबर पर संपर्क कर शिकायत दर्ज कराई, जिस पर प्रारंभ में सिलेंडर बदलने का आश्वासन दिया गया। हालांकि, जब उन्होंने पहले भी कम गैस मिलने की शिकायतों का हवाला देते हुए इस पर जवाब मांगा, तो एजेंसी संचालक कथित रूप से नाराज हो गया।
उपभोक्ता का दावा है कि संचालक ने कहा कि वह जहां चाहें शिकायत कर सकते हैं, क्योंकि उसकी “ऊपर तक सेटिंग” है और उसका कोई कुछ नहीं बिगाड़ सकता। उपभोक्ता ने इसे धमकीपूर्ण और गैर-जिम्मेदाराना व्यवहार बताया है।
विभाग से आकस्मिक जांच और कार्रवाई की मांग
घटना से आहत अरुण माहेश्वरी ने खाद्य एवं नागरिक आपूर्ति विभाग के अधिकारियों को लिखित शिकायत सौंपकर एजेंसी के स्टॉक, वितरण प्रणाली और कार्यप्रणाली की निष्पक्ष जांच कराने की मांग की है। उन्होंने आरोप लगाया कि यदि शिकायत सही पाई जाती है तो यह आम उपभोक्ताओं के साथ आर्थिक धोखाधड़ी का गंभीर मामला है।
शिकायत में दोषी पाए जाने पर संबंधित एजेंसी के विरुद्ध नियमानुसार कड़ी कार्रवाई करने की मांग भी की गई है। अब निगाहें इस बात पर टिकी हैं कि विभाग इस शिकायत की जांच किस प्रकार करता है और यदि आरोप सही पाए जाते हैं तो संबंधित एजेंसी के खिलाफ क्या कार्रवाई की जाती है।
(नोट: इस समाचार में उल्लेखित सभी आरोप शिकायतकर्ता के दावों पर आधारित हैं। संबंधित गैस एजेंसी अथवा विभाग की ओर से इस संबंध में आधिकारिक प्रतिक्रिया प्राप्त होने पर उसे भी प्रमुखता से प्रकाशित किया जाएगा।)