भोपाल। मध्यप्रदेश शासन के सामान्य प्रशासन विभाग ने आईएएस अधिकारी संतोष कुमार वर्मा को एक विवादित टिप्पणी के मामले में अखिल भारतीय सेवाएं (अनुशासन एवं अपील) नियम, 1969 के तहत कारण बताओ नोटिस जारी किया है। यह नोटिस तत्काल प्रभाव से जारी किया गया है और इसे गोपनीय/तत्काल श्रेणी में रखा गया है।

जय स्तंभ दिवस कार्यक्रम में दिए गए बयान से मचा विवाद
23 नवंबर 2025 को भोपाल में आयोजित जय स्तंभ दिवस कार्यक्रम के दौरान आईएएस संतोष वर्मा द्वारा किए गए एक वक्तव्य ने गंभीर विवाद को जन्म दिया। कार्यक्रम में उन्होंने एक समुदाय विशेष को लेकर टिप्पणी की—
“किसी परिवार में एक लड़की अवश्य मिलनी चाहिए, जब बेटा-बेटी का कोई भेदभाव नहीं है तो अपनी बेटी दान क्यों करें या उसका संबंध क्यों नहीं बनाएं।”
इस टिप्पणी को सामाजिक रूप से संवेदनशील मुद्दे पर गैरजिम्मेदाराना अभिव्यक्ति माना गया। सरकार ने पत्र में स्पष्ट किया है कि ऐसी टिप्पणी एक उच्च पदस्थ प्रशासनिक अधिकारी द्वारा की जाना “अत्यंत आपत्तिजनक, असंवेदनशील, एवं अनुशासनहीन” कृत्य की श्रेणी में आता है।
सामान्य प्रशासन विभाग की ओर से जारी आदेश में यह भी उल्लेख है कि इस बयान से सामाजिक सौहार्द प्रभावित होता है और यह आचरण अखिल भारतीय सेवाओं (आचरण) नियम, 1968 के नियम 3(1), 3(2)(ii)(i) का उल्लंघन माना गया है।
नियमों के उल्लंघन की श्रेणी में माना गया मामला
सरकार ने नोटिस में स्पष्ट किया है कि अधिकारी का व्यवहार अखिल भारतीय सेवाएँ नियम, 1969 के नियम 10(1)(ए) के अंतर्गत अनुशासनात्मक कार्रवाई का विषय बनता है। यह प्रावधान उन मामलों पर लागू होता है जहां अधिकारी का आचरण सेवा मर्यादा, तटस्थता और सार्वजनिक व्यवहार के मानकों के विपरीत पाया जाता है।
7 दिनों में जवाब देने के निर्देश
नोटिस में कहा गया है कि आईएएस संतोष वर्मा 7 दिनों के भीतर कारण बताएं कि क्यों न उनके खिलाफ अखिल भारतीय सेवाएं (अनुशासन एवं अपील) नियम, 1969 के तहत अनुशासनात्मक कार्यवाही प्रारंभ की जाए।
यदि निर्धारित समयसीमा में जवाब प्राप्त नहीं होता है, तो सरकार एकतरफा निर्णय लेते हुए बिना पूर्व सूचना के अनुशासनात्मक कार्रवाई कर सकती है।
नोटिस में यह भी उल्लेख है कि बयान सार्वजनिक रूप से प्रसारित होने के बाद उसकी भाषा और आशय व्यापक विरोध का कारण बने, जिससे सार्वजनिक कार्यों के प्रति असम्मति और प्रशासनिक तंत्र पर अविश्वास जैसे भाव पैदा हुए। सरकार ने इसे सेवा आचरण के विरुद्ध गंभीर लापरवाही माना है।
मामला केंद्र सरकार को भी भेजा गया
नोटिस की प्रति भारत सरकार के कार्मिक एवं प्रशिक्षण विभाग (DoPT) को भी भेजी गई है। इससे स्पष्ट संकेत मिलते हैं कि केंद्र स्तर पर भी मामले को गंभीरता से देखा जा रहा है।
क्या है आगे की प्रक्रिया?
अब संतोष वर्मा द्वारा दिए जाने वाले लिखित जवाब पर आगामी कार्रवाई निर्भर करेगी। यदि स्पष्टीकरण संतोषजनक नहीं पाया जाता, तो निलंबन, चेतावनी, वेतन वृद्धि रोकने से लेकर प्रमुख दंडात्मक प्रक्रिया तक लागू की जा सकती है।
प्रशासनिक हल्कों में हलचल
इस नोटिस के सामने आने के बाद मध्यप्रदेश के प्रशासनिक हल्कों में हलचल मच गई है। वरिष्ठ अधिकारियों का कहना है कि यह नोटिस उच्च पदस्थ अधिकारियों के आचरण पर कठोर नियंत्रण और सामाजिक मुद्दों पर सार्वजनिक बयान देने में अधिक जवाबदेही सुनिश्चित करने का संकेत है।
यह मामला आने वाले दिनों में राज्य प्रशासन में बड़ा प्रभाव छोड़ सकता है, क्योंकि पहली बार किसी वरिष्ठ अधिकारी को इस तरह की टिप्पणी पर औपचारिक नोटिस जारी किया गया है।