ईरान-इजराइल तनाव का असर: भारत में प्रीमियम पेट्रोल-डीजल महंगा, दूसरी बार बढ़े दाम

मध्य पूर्व में ईरान और इजराइल के बीच बढ़ते तनाव का असर अब भारत के ईंधन बाजार पर भी दिखाई देने लगा है। देश की प्रमुख तेल कंपनी Indian Oil Corporation (IOCL) ने प्रीमियम पेट्रोल और डीजल की कीमतों में एक बार फिर बढ़ोतरी कर दी है, जिससे महंगाई के बीच आम उपभोक्ताओं और विशेष रूप से ट्रांसपोर्ट से जुड़े लोगों की चिंता बढ़ गई है।

कंपनी द्वारा जारी नई दरों के अनुसार 100 ऑक्टेन प्रीमियम पेट्रोल, जिसे XP100 के नाम से जाना जाता है, उसकी कीमतों में उल्लेखनीय बढ़ोतरी की गई है। दिल्ली में अब यह पेट्रोल 149 रुपये प्रति लीटर से बढ़कर सीधे 160 रुपये प्रति लीटर हो गया है। इस बढ़ोतरी ने हाई-परफॉर्मेंस वाहनों का उपयोग करने वाले लोगों के बजट को प्रभावित किया है, क्योंकि यह ईंधन मुख्य रूप से महंगे और अधिक क्षमता वाले वाहनों में इस्तेमाल होता है।

इसी के साथ प्रीमियम डीजल ‘एक्स्ट्रा ग्रीन’ के दामों में भी इजाफा किया गया है। इसकी कीमत 91.49 रुपये प्रति लीटर से बढ़ाकर 92.99 रुपये प्रति लीटर कर दी गई है। कंपनी ने यह नई दरें अपने सभी पेट्रोल पंपों पर लागू कर दी हैं, जिससे देशभर में इसका असर देखा जा रहा है। हालांकि, इंडियन ऑयल कॉरपोरेशन ने इस बढ़ोतरी के पीछे कोई स्पष्ट आधिकारिक कारण नहीं बताया है, लेकिन बाजार के जानकार इसे वैश्विक परिस्थितियों से जोड़कर देख रहे हैं।

विशेषज्ञों का मानना है कि अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतों में लगातार उतार-चढ़ाव, मध्य पूर्व में बढ़ता भू-राजनीतिक तनाव और अमेरिका-ईरान के बीच टकराव की स्थिति ने तेल आपूर्ति और परिवहन लागत को प्रभावित किया है। समुद्री मार्गों पर जोखिम बढ़ने के कारण शिपिंग और बीमा खर्च में भी वृद्धि हुई है, जिसका सीधा असर ईंधन की कीमतों पर पड़ रहा है।

गौरतलब है कि यह हाल के दिनों में दूसरी बार है जब प्रीमियम ईंधन की कीमतों में वृद्धि की गई है। इससे पहले 20 मार्च को भी सरकारी तेल कंपनियों ने प्रीमियम पेट्रोल के दामों में 2 से 2.35 रुपये प्रति लीटर तक की बढ़ोतरी की थी। लगातार हो रही इन बढ़ोतरीयों से यह संकेत मिल रहा है कि आने वाले समय में भी ईंधन बाजार में अस्थिरता बनी रह सकती है।

इस बढ़ोतरी का सबसे अधिक प्रभाव ट्रांसपोर्ट, लॉजिस्टिक्स और कृषि क्षेत्र पर पड़ने की संभावना है, जहां डीजल का उपयोग बड़े पैमाने पर होता है। बढ़ती कीमतों के कारण इन क्षेत्रों की लागत में वृद्धि होगी, जिसका असर अंततः आम उपभोक्ताओं पर भी पड़ सकता है। हालांकि प्रीमियम डीजल और पेट्रोल बेहतर माइलेज और इंजन की कार्यक्षमता के लिए जाने जाते हैं, लेकिन कीमतों में लगातार वृद्धि से इनके उपयोग में कमी आने की संभावना जताई जा रही है।

फिलहाल राहत की बात यह है कि सामान्य पेट्रोल और डीजल की कीमतों में कोई बदलाव नहीं किया गया है, जिससे आम जनता पर तत्काल अतिरिक्त बोझ नहीं पड़ा है। लेकिन जिस तरह से वैश्विक परिस्थितियां बदल रही हैं, उसे देखते हुए आने वाले दिनों में ईंधन की कीमतों में और उतार-चढ़ाव से इंकार नहीं किया जा सकता।

कुल मिलाकर, अंतरराष्ट्रीय तनाव का असर अब सीधे भारतीय बाजार और आम लोगों की जेब तक पहुंचने लगा है, और यदि हालात ऐसे ही बने रहते हैं तो महंगाई का दबाव और बढ़ सकता है।

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