जनपद पंचायत का जीनक्षीर भवन औने-पौने दामों में नीलाम? नियम ताक पर, 4 भवन मात्र 1.05 लाख में डिस्मेंटल सहित फाइनल

न जनपद सभा प्रस्ताव, न विधिवत प्रमाणन और PWD अनुमति के नीलामी के आरोप; 33 में से सिर्फ 2 ने लगाई बोली

माखननगर। जनपद पंचायत के जीनक्षीर आवासीय भवन की नीलामी को लेकर गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं। 27 फरवरी 2026, शुक्रवार को हुई इस नीलामी में कथित तौर पर नियमों को दरकिनार कर चार भवनों को मात्र 1 लाख 5 हजार रुपये में डिस्मेंटल मटेरियल सहित फाइनल कर दिया गया। सूत्रों का दावा है कि पूरी प्रक्रिया में न तो जनपद सभा से प्रस्ताव लिया गया और न ही सदस्यों को पूर्व सूचना दी गई।

33 पंजीयन, पर बोली सिर्फ 2 की — क्या यह प्रतिस्पर्धी नीलामी थी?

दस्तावेज़ी जानकारी के अनुसार 33 खरीदारों ने भागीदारी दर्ज कराई, लेकिन बोली केवल दो व्यक्तियों ने लगाई। ऐसे में सवाल उठता है कि क्या नीलामी की शर्तें और समय-सीमा ऐसी रखी गईं कि वास्तविक प्रतिस्पर्धा ही खत्म हो गई? चार भवनों का डिस्मेंटल मटेरियल सहित कुल मूल्य मात्र 1.05 लाख रुपये तय होना अपने आप में संदेह पैदा करता है।

नियम क्या कहते हैं?

सामान्य प्रशासन की कंडिका 4.2, सामान्य परिपत्र पुस्तिका 3-8 तथा लोक निर्माण विभाग के मैनुअल के अनुसार— कलेक्टर द्वारा यह प्रमाणित किया जाना आवश्यक है कि संबंधित भवन किसी अन्य विभाग को आवश्यक नहीं है।
यह भी सुनिश्चित होना चाहिए कि भवन किसी लोक प्रयोजन के लिए उपयोग योग्य नहीं है।
पूंजीगत लागत का निर्धारण PWD मैनुअल के अनुसार होना चाहिए।
यहां प्रश्न यह है कि क्या यह समस्त प्रमाणन और मूल्यांकन विधिवत हुआ?

PWD से अनुमति पर चुप्पी

जब इस संबंध में PWD के सब इंजीनियर आरबी चौहान से संपर्क किया गया तो फोन रिसीव नहीं हुआ। वहीं जनपद के सब इंजीनियर मुकेश बुबाड़े का कहना है कि PWD सब इंजीनियर ने “कलेक्टर को सूचना दे दी गई है, नीलामी कर सकते हैं” कहा था। लेकिन क्या केवल मौखिक सूचना पर्याप्त है? क्या लिखित स्वीकृति और प्रमाणन मौजूद है?

जनपद बॉडी को जानकारी नहीं!

जनपद उपाध्यक्ष लालचंद यादव ने स्पष्ट कहा कि न तो जनपद की बॉडी में इस प्रकार का कोई प्रस्ताव आया और न ही सदस्यों को जानकारी दी गई। उन्होंने उच्च अधिकारियों से शिकायत कर जांच कराने की बात कही है। यदि यह सही है, तो यह सीधे-सीधे जनप्रतिनिधियों की भूमिका को दरकिनार करने का मामला बनता है।

पंचायत इंस्पेक्टर हरिप्रसाद बरेले का कहना है कि “सीईओ के निर्देशानुसार प्रक्रिया का पालन किया गया।”
तहसीलदार महेंद्र सिंह चौहान ने बताया कि प्रेस विज्ञप्ति जारी कर नीलामी की गई है और फिर भी अनियमितता हुई है तो प्रक्रिया की जांच करवाएंगे।
लेकिन केवल प्रेस विज्ञप्ति जारी कर देना क्या पर्याप्त पारदर्शिता है? क्या यह सुनिश्चित किया गया कि अधिकतम प्रतिस्पर्धा और राजस्व हित सुरक्षित रहे?

बड़ा सवाल: किसे लाभ, किसे नुकसान?

चार भवनों का डिस्मेंटल मटेरियल सहित मात्र 1.05 लाख रुपये में निपटान—क्या यह बाजार मूल्य के अनुरूप है? यदि नहीं, तो यह सीधा-सीधा जनपद पंचायत को राजस्व हानि का मामला हो सकता है।
यदि नियमों के अनुरूप कलेक्टर प्रमाणन, PWD मूल्यांकन और जनपद सभा प्रस्ताव नहीं लिया गया, तो यह न केवल प्रशासनिक लापरवाही बल्कि वित्तीय अनियमितता की श्रेणी में आ सकता है।

उच्चस्तरीय जांच की मांग

स्थानीय जनप्रतिनिधियों और जागरूक नागरिकों ने इस पूरे प्रकरण की स्वतंत्र और निष्पक्ष जांच की मांग की है।
नीलामी की पूरी फाइल सार्वजनिक की जाए।
मूल्यांकन रिपोर्ट और कलेक्टर प्रमाणन सामने लाया जाए।
यह स्पष्ट किया जाए कि 33 में से केवल 2 बोलीदाता ही क्यों सक्रिय रहे।
यदि प्रक्रिया पारदर्शी है तो प्रशासन को दस्तावेज़ सार्वजनिक करने में संकोच नहीं होना चाहिए। और यदि चूक हुई है, तो जिम्मेदारी तय होनी ही चाहिए।

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

This will close in 0 seconds

error: Content is protected !!