Narmadapuram News : पहले लाखों का सामान करोड़ो में खरीदा, अब GEM से पैसा बचाने की दे रहे ट्रेनिंग
written by Deepak Sharma | 29/12/2023
दीपक शर्मा/ नर्मदापुरम : मोदी सरकार की तरफ से सरकारी खरीद में भ्रष्टाचार खत्म करने के लिए शुरू की गई मुहिम सरकारी खरीद वेबपोर्टल GeM (Goverment E Marketplace) से लाखो का सामान करोड़ों में जिले भर की पंचायतों में खरीदा गया।अब जिले में सरपंच, सचिव और रोजगार सहायको को gem से कैसे खरीदी करते हैं इसका प्रशिक्षण दिया जा रहा है।
प्रशिक्षण लेते कर्मचारी
जिले की पंचायतों एसबीएम के नाम पर करीब चार साल से Gem पोर्टल से करोड़ो की खरीदी की जा रही हैं। जिसमे दो वेंडर गोमती इंटरप्राइजेस और बल्लू इंटरप्राइजेस से लाखों का सामान करोड़ों में खरीदा गया। लेकिन अब यह बात समझ से परे हैं कि प्रशिक्षण में सरपंच, सचिव और रोजगार सहायको यह बताया जा रहा है कि Gem पोर्टल से सामान बाजार से कम दाम पर मिलेगा। फिर भी अभी तक बाज़ार से 75 फीसदी ज्यादा दाम पर ताबड़ तोड़ खरीदी की जा रही है इसका ज़बाब किसी के पास नही है।आश्चर्य इस बात का होता है कि अधिकतर पंचायतों में तो सफाई कर्मचारी भी नही है। फिर भी वहां समान खरीदा गया और अब वह पड़े पड़े खराब हों रहा है।
यह है स्वच्छ भारत मिशन के हाल
पूर्व सरपंच पति ने बताया कि हमने इसका विरोध किया था लेकिन अधिकारियों ने एक नही सुनी और कहा जो सामान आया उसका भुगतान करो।
फेक्ट फाइल
खरीदी और बाज़ार के भाव में अंतर
देनवा पोस्ट के कुछ सवाल हैं
सरकारी खरीद में भ्रष्टाचार खत्म करने के लिए Gem पोर्टल शुरू किया गया तो इतना महंगा समान क्यो खरीदा जा रहा है। जबकि बाजार में इससे सस्ता उपलब्ध है।
Gem पोर्टल से पंचायते चार साल से खरीदी कर रही हैं तो सरपंच, सचिव और रोजगार सहायको को खरीदी करने का प्रशिक्षण क्यों दिया जा रहा है।
प्रशिक्षण के बाद इस बात की क्या गारंटी कि Gem पोर्टल से अभी तक खरीदा गया 75 फीसदी महंगा समान अब सस्ता मिलेगा। जो अभी तक हुईं पैसे की बर्बादी की जिम्मेदारी किसकी है।
Narmadapuram News : पटवारियों की छवि खराब करने सोशल मीडिया पर फिर वाइरल हुआ फर्जी मैसेज
written by Deepak Sharma | 29/12/2023
पटवारियों की शिकायत के मैसेज के साथ वायरल मोबाइल नंबर 9630524516 आम आदमी पार्टी मध्य प्रदेश से संबंधित है, जबकि टोल फ्री नंबर 155343 मध्य प्रदेश स्टेट कन्ज्यूमर हेल्पलाइन नंबर है। मध्य प्रदेश की नई सरकार ने ऐसा कोई नंबर जारी नहीं किया है।
देनवापोस्ट एक्सक्लूसिव/ दीपक शर्मा :राज्य में हुए विधानसभा चुनाव के बाद सोशल मीडिया पर एक सूचना शेयर की जा रही है। इसमें दावा किया जा रहा है कि सरकार ने पटवारियों की शिकायत करने के लिए हेल्पलाइन नंबर 9630524516 और टोल फ्री नम्बर 155343 जारी किया है। इस मैसेज को कुछ यूजर मध्य प्रदेश की नई सरकार से भी जोड़ रहे हैं।
देनवापोस्ट ने अपनी जांच में पाया कि मध्य प्रदेश की सरकार ने ऐसा कोई नंबर जारी नहीं किया है। मैसेज में दिया गया मोबाइल नंबर 9630524516 मध्य प्रदेश आम आदमी पार्टी से संबंधित है, जबकि टोल फ्री नंबर 155343 मध्य प्रदेश स्टेट कन्ज्यूमर से संबंधित है।
क्या है वायरल पोस्ट
देनवा पोस्ट के टिपलाइन नंबर +91 9981814651 पर यूजर ने इस दावे को भेजकर इसकी सच्चाई जानने का अनुरोध किया। मैसेज में लिखा है,
“ब्रेकिंग पटवारियों पर सरकार हुई सख्त सरकार ने जारी किये हेल्पलाइन नंबर अब कोई भी पटवारी अगर जमीन के सीमांकन, नामांकरण या अन्य कार्य के लिए रिश्वत् की माँग करता है, तो सरकार ने जारी किया है हेल्पलाइन नंबर 9630524516 एवं टोल फ्री नम्बर–155343 इस नंबर पर पटवारी के विरुद्ध शिकायत दर्ज करवाई जा सकते है।”
पड़ताल
वायरल दावे की जांच के लिए हमने कीवर्ड से इस बारे में गूगल पर सर्च किया। 2021 में भी इस मैसेज को फेसबुक (आर्काइव लिंक) पर शेयर किया गया है। मतलब इसका मध्य प्रदेश की नई सरकार से कोई संबंध नहीं है।
इस बारे में हमें ऐसी कोई मीडिया रिपोर्ट नहीं मिली, जिससे यह साबित हो सके कि मध्य प्रदेश में पटवारियों की शिकायत के लिए ऐसा कोई हेल्पलाइन या टोल फ्री नंबर जारी किया गया है।
इसके बाद हमने मैसेज में दिए गए मोबाइल नंबर 9630524516 पर कॉल किया, लेकिन यह बंद मिला। इसके वॉट्सऐप नंबर पर मैसेज पर करने पर हमें कोई रिप्लाई मैसेज नही मिला।
सर्च में हमें यह नंबर मध्य प्रदेश आम आदमी पार्टी के आधिकारिक फेसबुक पेज पर भी मिला।
गूगल पर सर्च में हमें यह नंबर मध्य प्रदेश का स्टेट कन्ज्यूमर हेल्पलाइन नंबर मिला। कन्ज्यूमर अफेयर्स की वेबसाइट पर इस नंबर को देखा जा सकता है। मतलब यह भी पटवारियों की शिकायत से नहीं जुड़ा है।
पटवारियों की छवि खराब कर रहे है
पटवारी संघ जिला अध्यक्ष देवेंद्र जाट ने देनवापोस्ट को बताया कि इस तरह के नंबर वाइरल कर पटवारियों की छवि खराब करने की कोशिश हो रही हैं।इसकी शिकायत शासन से कर ऐसे लोगों के खिलाफ कार्यवाही की मांग करेंगे।
Mp Election 2023 : प्रदेश में भले ही BJP का परचम लहराया है; पर नर्मदापुरम जिले के सरकारी कर्मचारी चाहते थे सत्ता परिवर्तन
written by Deepak Sharma | 29/12/2023
पोस्टल बैलेट पेपर के आंकड़े कुछ और ही कह रहे – फोटो : देनवापोस्ट
दीपक शर्मा: मध्य प्रदेश विधानसभा चुनाव 2023 में शायद सरकारी अमले की मंशा सरकार बदलने की थी। दरअसल, नर्मदापुरम जिले में पोस्टल बैलेट पेपर के जरिए डाले गए मतों के आंकड़ों से तो यही स्पष्ट हो रहा है। आंकड़े बताते हैं कि जिले में 44.36% पोस्टल बैलेट पेपर के मत कांग्रेसी प्रत्याशियों को मिले और भाजपा के खाते में 37.74% मत गए। जबकि 17.89% मत पोस्टल बैलेट पेपर से निर्दलीय और अन्य दलों के प्रत्याशियों को प्राप्त हुए।
जानकारी के मुताबिक, जिले की चारों विधानसभाओं में डाले गए 5500 पोस्टल बैलेट पेपर के मत वैध पाए गए। इनमें से 2400 कांग्रेस प्रत्याशियों को मिले और 2076 भाजपा प्रत्याशियों को। यानी कांग्रेस के पक्ष में 324 मत अधिक पड़े। जबकि 1024 मत निर्दलीय और अन्य राजनीतिक दलों के प्रत्याशियों के खाते में गए हैं। पोस्टल बैलेट पेपर के इन आंकड़ों से स्पष्ट होता है कि सरकारी अमला परिवर्तन के मूड में था। आंकड़े यह भी बताते हैं कि सिवनी मालवा में ही भाजपा को अधिक मत मिले बाकी सभी तीन विधानसभाओं में कांग्रेस को समर्थन मिला है।
विधानसभा वार पोस्टल बैलेट पेपर के आंकड़े यह भी बताते हैं कि जिले की चार विधानसभाओं में कांग्रेस के प्रत्याशियों को भाजपा की तुलना में ज्यादा मत मिले हैं। केवल एक सिवनी मालवा विधानसभा में भाजपा के पक्ष में 113 मत ज्यादा हैं। जबकि पूरे जिले की बात करें तो होशंगाबाद विधानसभा में ही सर्वाधिक 1893 वैध मत पाए गए हैं।
पोस्टल बैलेट पेपर के उप जिला निर्वाचन कार्यालय से प्राप्त आंकड़े जानिए कि किस विधानसभा में किसको कितने मत मिले।
विधानसभा
पिपरिया
भाजपा को 391 मत मिले
कांग्रेस को 656 मत मिले
सोहागपुर
भाजपा को 485 मत मिले
कांग्रेस को 693 मत मिले
होशंगाबाद
भाजपा को 606 मत मिले
कांग्रेस को 610 मत मिले
सिवनी मालवा
भाजपा को 594 मत मिले
कांग्रेस को 481 मत मिले
Narmdapuram News : सोहागपुर में सिर्फ 0.84 प्रतिशत वोट ने बचा ली बीजेपी की लाज, अंतिम 8 राउंड में कांग्रेस का बढ़ा था वोट
written by Denva Post Bureau | 29/12/2023
दीपक शर्मा : सोहागपुर के नतीजे घोषित हो चुके हैं। विजय पाल यहां से चौथी बार विधायक चुने गए, लेकिन इस बार मुकाबला कांटे का रहा और बीजेपी यहां हारते—हारते रह गई। सिर्फ 0.84 प्रतिशत वोट ने सोहागपुर में बीजेपी की लाज बचाई। 2 लाख 11 हजार 465 वोट में से बीजेपी के विजयपाल को 48.89 प्रतिशत वोट मिले। वहीं कांग्रेस के पुष्पराज पटेल को सिर्फ 0.84 प्रतिशत कम यानी 48.05 प्रतिशत वोट मिले। कांग्रेस का अंतिम आठ राउंड में तेजी से वोट बढ़ा, लेकिन वह 1762 मतो से हार गई।
इस तरह रही दोनो के बीच टफ फाइट
सोहागपुर में कुल 20 राउंड में गिनती हुई। शुरुआती 11 राउंड में विजयपाल को 70 हजार 450 और पुष्पराज पटेल को 46 हजार 953 वोट मिले। इस तरह 11वे राउंड में बीजेपी की लीड 23 हजार 497 रही। लेकिन 12वे राउंड की काउंटिंग शुरु होते ही बीजेपी पिछड़ने लगी। 12वे से लेकर 20वे राउंड तक कांग्रेस को 54 हजार 664 और बीजेपी को सिर्फ 32 हजार 929 वोट मिले, लेकिन शुरुआती 11 राउंड में आगे होने से बीजेपी 1762 मतो से जीत गई।
जीत हार का अंतर लगभग खत्म
चुनावी वर्ष : बीजेपी : कांग्रेस : जीत का अंतर 2008 : 56578 : 40037 : 16541 2013 : 92859 : 63968 : 28891 2018 : 87488 : 76071 : 11417 2023 : 103379 : 101617 : 1762
Narmadapuram News : चर्चा परिवर्तन की तो जीती बीजेपी कैसे!
written by Deepak Sharma | 29/12/2023
दीपक शर्मा, देनवा पोस्ट एक्सक्लूसिव। प्रदेश में विधानसभा चुनाव में चौक चौराहों पर इस बार सत्ता परिवर्तन की चर्चा थी. अमूमन अधिकांश इस बार परिवर्तन की बात कहते हुए कांग्रेस के पक्ष में माहौल बनाने में लगे थे. बड़ा सवाल यह है कि जब चौक चौराहों पर मतदान के बाद परिवर्तन की चर्चा थी, अधिकांश एग्जिट पोल भी कांग्रेस की सरकार बना रहे थे, तो फिर मध्य प्रदेश में बीजेपी कैसे प्रचंड बहुमत की ओर आगे बढ़ गई है. दरअसल चौक चौराहों पर जो चर्चा हुई वह वो चर्चा थी जो पुरुष मतदाताओं के द्वारा एक दूसरे से कही गई. बीजेपी का अधिकांश पुरुष वोटर चुप्पी साधा रहा और लाडली बहनों ने वोट के रूप में जो अपने भैया को भरपूर आशीर्वाद दिया था उसकी चर्चा चौक चौराहों तक पहुंची ही नहीं. यही कारण रहा की चौक चौराहों पर तो सत्ता परिवर्तन की बातें खूब हुई पर रिजल्ट उसके ठीक विपरीत आ गया.
क्या लाडली को काउंटर नहीं कर सका नारी सम्मान
बीजेपी ने अपने प्रचार में केंद्र में लाडली बहन योजना को रखा. जिसमें शुरुआत में 1000 और बाद में ₹3000 प्रति माह तक देने की बात कहीं गई. चुनाव से ठीक पहले 1250 रुपए प्रति माह तक मिलने भी लगे. पर कांग्रेस नारी सम्मान योजना में सिर्फ ₹1500 प्रतिमाह देने के अपने वादे पर अड़ी रही. क्या इससे कांग्रेस को नुकसान उठाना पड़ा, निश्चित तौर पर अब राजनीतिक पंडित इस मुद्दे पर भी अपने गणित बिठाएंगे. पर इतना तो तय है कि कांग्रेस के नारी सम्मान योजना पर बीजेपी की लाडली बहन बहुत भारी पड़ गई.
MP Election 2023 Live: होशंगाबाद जिले में सुबह 11 बजे तक लगभग 33. 45प्रतिशत मतदान, 4 सीटों पर पल-पल का अपडेट यहां देखिए
written by Deepak Sharma | 29/12/2023
होशंगाबाद जिले में सुबह 11 बजे तक लगभग 33. 45 प्रतिशत मतदान, 4 सीटों पर पल-पल का अपडेट यहां देखिए। 5 घंटे बाद सोहागपुर में सबसे ज्यादा 47% और होशंगाबाद में सबसे कम 26 फीसदी मतदान अभी तक हुआ है। अगले अपडेट के लिए देनवापोस्ट से जुड़े रहे।
MP Election 2023 : भाजपा-कांग्रेस ने सोहागपुर, पिपरिया, सिवनीमालवा में अब तक महिला को नहीं दिया टिकट
written by Deepak Sharma | 29/12/2023
नर्मदापुरम/दीपकशर्मा : चुनाव में महिलाओं को आरक्षण का दंभ वाली पार्टियां जिले की चार विधानसभा में फेल नजर आ रही हैं। वर्ष 1998 से अभी तक के चुनाव प्रत्याशियों पर नजर डालें तो प्रमुख पार्टियों भाजपा और कांग्रेस ने सोहागपुर, पिपरिया और सिवनीमालवा में किसी महिला प्रत्याशी को टिकट नहीं दिया है। वहीं होशंगाबाद में कांग्रेस पार्टी ने महिलाओं को टिकट दिया है। विधानसभा क्षेत्र में महिलाओं ने निर्दलीय और अन्य पार्टियों से चुनाव लड़ा है, उन्हे जीत नहीं मिली। वर्ष 2023 के विधानसभा चुनाव में किसी भी पार्टी ने महिला उम्मीदवार नही बनाया है। इसके पहले 2003 के चुनाव में सविता दीवान शर्मा को कांग्रेस ने टिकट दिया था। लेकिन वे चुनाव में हार गई थी।
होशंगाबाद : कांग्रेस के टिकट पर जीतीं थी सविता
यहां कांग्रेस ने महिला उम्मीदवारों को टिकट दिया और वह विधायक भी बनी। वर्ष 1998 के चुनाव में कांग्रेस से सविता दीवान शर्मा ने चुनाव जीता था। कांग्रेस ने ही सविता दीवान शर्मा को फिर 2003 में टिकट दिया, लेकिन यह चुनाव सविता भाजपा के मधुकर राव हर्णे से हार गई थी। विधानसभा में कांग्रेस से सविता दीवान ने 1998 में चुनाव लड़ा था और वह विधायक बनी थी।1975 में कांग्रेस ने होशंगाबाद से सुशीला दीक्षित को टिकिट दिया था और वह विजयी हुई थी। लेकिन 1977 सुशीला दीक्षित जनता पार्टी के रमेश बरगले से हार गई थी। अभी तक कांग्रेस ने सिर्फ होशंगाबाद से महिला उम्मीदवार उतारा हैं। लेकिन 2008 के बाद कांग्रेस ने भी महिला उम्मीदवार मैदान में नही उतारा।
Mp Election 2023 : सोहागपुर में विजयपाल और पुष्पराज में सोशल मीडिया पर कौन ज्यादा भारी, यहां जानें
written by Denva Post Bureau | 29/12/2023
नर्मदापुरम / दीपकशर्मा : विधानसभा चुनाव में प्रत्याशी की घोषणा के बाद तस्वीर साफ हो गई है. चुनाव में सोशल मीडिया एक बड़ा हथियार बनकर उभरा है। ऐसे में देनवा पोस्ट पर आज की खबर में पढ़िए सोशल मीडिया के रण में कौन कहाँ खड़ा है। मध्यप्रदेश में विधानसभा चुनाव (Madhyapradesh Assembly Election 2023) में बेहतर करने के लिए विजयपाल बीजेपी और पुष्पराज कांग्रेस दोनों ने अपने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म को मजबूत करने के लिए पूरी ताकत झोंक दी है। इसके लिए टीम बनी हुई है। यह टीम दिन-रात मेहनत करती है। सोहागपुर में वोटर्स की संख्या कुल 2 लाख 42 हजार 867 है। ऐसे में सोशल मीडिया के प्रमुख चार प्लेटफॉर्म है लेकिन हम यहां बात कर रहे हैं फेसबुक पर सोहागपुर विधानसभा से विजयपाल और पुष्पराज की जो उपस्थिति है, वो बेहद की कमजोर है। वोटर्स के आंकड़ों को देखें तो महज 10 प्रतिशत भी नहीं है। हालाँकि, इस मामले में सोहागपुर की विजयपाल सोशल मीडिया की स्थिति पुष्पराज से 1.5 गुना आगे है। पढ़िए यह खास पड़ताल।
विजयपाल सिंह के दो फेसबुक पेज पर कुल 11 हजार फॉलोवर्स हैं। एक विजयपाल सिंह राजपूत जिसमें 9 हजार 900 फॉलोवर्स हैं और दूसरा विजयपाल सिंह जिसमें 1 हजार 400 फॉलोवर्स हैं । इनके दोनों पेज से हर दिन सैकड़ों की संख्या वीडियो और पोस्ट शेयर किये जा रहे हैं।
पुष्पराज 8700 के भरोसे
पुष्पराज के फेसबुक पेज पर अभी 8700 फॉलोवर्स हैं। उस पेज के द्वारा कुल 169 लोगों को फॉलो किया जा रहा है। इसमें दो पेज शामिल हैं। पुष्पराज सिंह बब्बा एवं पुष्पराज पटेल पेज से हर दिन वीडियो और पोस्ट शेयर किए जा रहे हैं।ऐसे में कुल मिलाकर सोशल मीडिया पर पुष्पराज के पास 8 हजार 700 के आसपास फॉलोवर्स हैं।
MP Election 2023 : पिछले चुनाव में 11726 मतदाताओं ने दबाया था नोटा का बटन
written by Deepak Sharma | 29/12/2023
विधानसभा चुनाव : सिवनीमालवा में सबसे ज्यादा, होशंगाबाद में सबसे कम थे नोटा वाले मतदाता
देनवापोस्ट एक्सक्लूसिव/नर्मदापुरम / दीपकशर्मा/ आचार सहिंता के बाद एक ओर जहां अभी तक ज्यादातर पार्टियों ने अपने प्रत्याशियों के नाम की घोषणा नही की है। वही दूसरी ओर जिले की चारों विधानसभा क्षैत्रों में कई पार्टियां चुनावी मैदान में प्रत्याशी उतारने को तैयार हैं। पिछली बार की तरह इस बार भी कई निर्दलीय प्रत्याशी भी चुनाव में उतरने को बेताब हैै। यह बात और हैं कि मतदाता केवल कुछ पार्टियों को ही महत्व देते हैं।
पिछले विधानसभा चुनाव में मतदान के आंकड़ों पर गौर करे तो चारों विधानसभा क्षैत्र में आधे से अधिक प्रत्याशियों को नोटा ( इनमें से कोई नही ) से भी कम मत प्राप्त हुए थे। पिछले विधानसभा चुनााव यानी वर्ष 2018 में हुए मतदान की बात करे तो सिवनीमालवा विधानसभा क्षैत्र में सबसे अधिक मतदाताओं ने नोटा में मतदान किया था। यहां कुल 222992 मतदाताओं में से 3897 मतदाताओं यानी 2.06 फीसदी ने नोटा का विकल्प चुना था।यहां के कुल 15 प्रत्याशियों में से 11 प्रत्याशियों को नोटा से भी कम मत मिले थे।
पिपरिया विधानसभा क्षैत्र की स्थिति भी लगभग सिवनीमालवा जैसी ही थी। यहां कुल 206952 मदाताओं में से 3842 मतदाताओं यानी 2.27 फीसदी ने नोटा को मतदान किया था। यहां कुल 10 प्रत्याशियों में से 6 प्रत्याशियों को नोटा से भी कम वोट मिले थें। वही सोहागपुर विधानसभा क्षैत्र कुल 220262 मदाताओं में से 2618 मतदाताओं यानी 1.44 फीसदी ने नोटा को मतदान किया था। यहां कुल 14 प्रत्याशियों मैदान में थे। इनमें से 10 प्रत्याशियों को नोटा से बहुत कम वोट मिले थें।
अब बात कर लेते होशंगाबाद विधानसभा क्षैत्र की होशंगाबाद क्षैत्र की स्थिति इस मायनें में थोड़ी अलग नजर आती हैं।यहां कुल 207283 मतदाताओं में से 1369 मतदाताओं ने यानी 0.87 फीसदी ने नोटा में मतदान किया था। कुल 15 प्रत्याशियों मे से 11 प्रत्याशियों को नोटा से कम वोट मिले थें। नोटा में हुए अधिक मतदान के पीछे अधिकारियों का तर्क है कि मतदाताओं मे जागरूकता की कम रही थी।
नोटा का विकल्प देने के पीछे की मंशा
पिछले चुनाव की तरह इसबार भी इवीएम मशीन में नोटा का बटान शामिल होगा । मतदाताओं लिए यह विकल्प इसलिए दिया जाता कि मतदाता चुनावी मैदान में उतरें किसी भी प्रत्याशी को मतदान नही करना चाहता हैं। तो वे कोई नही यानी नोटा का बटन दबा सके। नोटा का बटन दबाने का अर्थ यह होता हैं। चुनावी मैदान में उतरा एक भी प्रत्याशी मतदाता को पसंद का नही हैं।
Narmadapuram : आपदा जोखिम न्यूनीकरण दिवस विशेष, भूकंप के मुहाने पर नर्मदापुरम
written by Deepak Sharma | 29/12/2023
दीपकशर्मा : हर साल, आपदा जोखिम न्यूनीकरण के लिए अंतर्राष्ट्रीय दिवस 13 अक्टूबर को मनाया जाता है। यह दिन प्राकृतिक आपदाओं को रोकने और कम करने के क्षेत्र में हुई प्रगति को दर्शाता है। पिछले वर्षों में मौतों की संख्या में वृद्धि ने विश्व स्तर पर विभिन्न आपदा प्रबंधन संगठनों के लिए चिंता का विषय है। प्राकृतिक आपदाओं के परिणामस्वरूप व्यापक विनाश, संपार्श्विक क्षति और कई देशों में रहने वाले लोगों की जान चली गई है। अंतर्राष्ट्रीय संगठन कुछ शक्तिशाली निर्णय लेकर आपदाओं की संख्या को कम करने के लक्ष्य के साथ एक साथ आए हैं।
मध्यप्रदेश में नर्मदा और इससे सटे इलाकों में भविष्य में भूकंप का नया सक्रिय जोन बनने की आशंका को देखते हुए ही तीन साल पहले पृथ्वी विज्ञान मंत्रालय के अधीन मौसम विज्ञान विभाग के राष्ट्रीय भूकंप केंद्र और खनिज मंत्रालय के अधीन काम करने वाले जियोलॉजिकल सर्वे ऑफ इंडिया दोनों ने नर्मदा भ्रंश (रिफ्ट) घाटी में भूगर्भीय घटनाओं की माइक्रोलेबल पर निगरानी तेज कर दी है। मध्यप्रदेश में भूकंप के संभावित खतरे को समय रहते पहचानने के लिए 7 स्थानों पर उपकरण भी लगाए गए हैं।
अगर इतिहास की बात करे तो पूरे प्रदेश में सबसे ज्यादा नर्मदापुरम जिले की ही जमीन थर्राई है। जियोलॉजिकल सर्वे ऑफ इंडिया 2000 की रिपोर्ट बताती है कि 11 जिलों में भूकंप की गतिविधियां दर्ज की गई, इनमें सबसे ज्यादा भूकंप नर्मदापुरम यानी होशंगाबाद जिले में आए हैं। नर्मदापुरम के सोहागपुर में वर्ष 1995 में 2 मई, 8 मई और 20 मई को 1.1 से लेकर 3.8 तीव्रता के भूकंप के झटके देखे गए हैं। वही 19 जुलाई 1998 को इटारसी में 4.1 तीव्रता का भूकंप आ चुका है। इसी तरह 1969 में 4.2, 1996 में 2.7 से 4.4 तीव्रता तक की तीव्रता रिएक्टर पर दर्ज हुई है।
भूकंप के खतरों के हिसाब से जोन में बांटा क्षेत्र
भूकंप के खतरे या संवेदनशीलता के आधार पर चार अलग-अलग हिस्सों में बांटा है। इसे सिस्मो जोन कहा जाता है। जोन-2 जो सबसे कम सक्रीय या काम संवेदनशील इलाका होता है। इसके बाद जोन 3 है, जो मध्यम संवेदनशील मना जाता है। इन इलाकों में भूकंप का खतरा अपेक्षाकृत थोड़ा अधिक होता है। वहीं जोन 4 अधिक सक्रीय या संवेदनशील इलाकों में आता है। इनमें भूकंप का खतरा सबसे अधिक रहता है। वहीं जोन 5 में अत्यधिक सक्रिय या संवेदनशील हिस्से आते हैं।
जोन—2 में आते हैं भोपाल और इंदौर
सिस्मिक जोन—2 में इंदौर, ग्वालियर, अशोक नगर, भोपाल, आगर मालवा, उज्जैन, उमरिया, कटनी, ग्वालियर, गुना, श्योपुर, निवाड़ी, टीकमगढ़, छतरपुर, शिवपुरी, भिंड, बुरहानपुर, मुरैना, पन्ना, बड़वानी, रीवा, रतलाम, सागर, देवास, शाजापुर, नीमच, दतिया, मंदसौर, छिंदवाड़ा, बैतूल, राजगढ़, बालाघाट, विदिशा, धार, रायसेन और दमोह जिले शामिल हैं।
ये जिले संवेदनशील
मध्य प्रदेश के अधिक संवेदनशील यानी जोन 3 में आने वाले जिले खंडवा, खरगोन, हरदा, नर्मदापुरम, सिवनी, नरसिंहपुर, जबलपुर, मंडला, डिंडोरी, अनूपपुर, उमरिया, शहडोल और सीधी, सिंगरौली है। ये सभी जिले नर्मदा घाटी के आसपास बसे हैं।
बढ़ाई जा रही है नेटवर्क डेंसिटी
भूकंप के संभावित खतरे को पहले से पहचानने के लिए नेटवर्क डेंसिटी को बढ़ाया जा रहा है। जिसके अंतर्गत इंदौर, गुना, उमरिया, सिवनी, जबलपुर और छिंदवाड़ा सहित एक अन्य स्थान पर भूकंप मापने के यंत्र लगाए गए हैं।
जीएसआई के अनुसार वर्ष 2002 तक भूकंप की स्थिति
जिला : वर्ष : भूकंप की तीव्रता
जबलपुर : 1846, 22 मई 1997, 11 अक्टूबर 1997, 31 अक्टूबर 1993, 16 अक्टूबर 2000, 17 मई 1903, 12 जुलाई 1973 : 3.0 से लेकर 6.0 तक
छिंदवाड़ा : 15 जनवरी 1997, 30 मार्च 1998, 9 दिसंबर 1997, 18 अप्रैल 1987 : 2.0 से लेकर 4.9 तक
खंडवा : 14 मार्च 1938 और 18 नवंबर 1863 : 6.3
बड़वानी : 1863, 1938 और 11 नवंबर 1985 : 4.0 से लेकर 5.0 तक