3500 किलो की ऐतिहासिक तोप चोरी: 3000 फीट ऊंचे नरवर किले से तीन टन धरोहर गायब, सुरक्षा व्यवस्था पर बड़े सवाल

शिवपुरी। मध्य प्रदेश के शिवपुरी जिले स्थित ऐतिहासिक नरवर किले से लगभग 3500 किलोग्राम (साढ़े तीन टन) वजनी बहुमूल्य ऐतिहासिक तोप की चोरी ने पूरे देश को हैरान कर दिया है। बुधवार और गुरुवार की दरम्यानी रात हुई इस सनसनीखेज वारदात ने न केवल पुलिस और प्रशासन की सुरक्षा व्यवस्था पर सवाल खड़े कर दिए हैं, बल्कि देश की सांस्कृतिक और पुरातात्विक धरोहरों की सुरक्षा को लेकर भी गंभीर चिंता पैदा कर दी है।

करीब 3000 फीट की ऊंचाई पर स्थित दुर्गम नरवर किले से इतनी भारी-भरकम तोप का गायब होना अपने आप में बेहद असाधारण घटना मानी जा रही है। प्रारंभिक जांच में आशंका जताई जा रही है कि वारदात को पूरी योजना, रेकी और संसाधनों के साथ अंजाम दिया गया।

किले के पिछले हिस्से से घुसे बदमाश

जानकारी के अनुसार, बदमाश किले के पिछले हिस्से से अंदर दाखिल हुए। पुलिस को आशंका है कि अपराधियों ने पहले से इलाके की कई दिनों तक रेकी की थी। इतनी भारी तोप को हटाने के लिए संभवतः लोडिंग वाहनों, क्रेन अथवा अन्य भारी उपकरणों का इस्तेमाल किया गया होगा। हालांकि पुलिस अभी इस संबंध में आधिकारिक पुष्टि नहीं कर रही है।

चोरी के तरीके को लेकर कई चर्चाएं

घटना के बाद चोरी के तरीके को लेकर कई तरह की चर्चाएं सामने आ रही हैं। स्थानीय स्तर पर यह भी दावा किया जा रहा है कि बदमाशों ने तोप को रजाई और गद्दों में लपेटकर किले की ऊंचाई से नीचे सरका दिया, ताकि गिरने की आवाज कम हो और आसपास किसी को भनक न लगे। हालांकि इस दावे की अब तक आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है।

अंतरराष्ट्रीय तस्कर गिरोह पर शक

जांच एजेंसियों को आशंका है कि इस वारदात के पीछे किसी अंतरराष्ट्रीय पुरातात्विक तस्कर गिरोह का हाथ हो सकता है। माना जा रहा है कि ऐतिहासिक और दुर्लभ धरोहरों की अवैध तस्करी करने वाले संगठित गिरोह इस तरह की घटनाओं को अंजाम देते हैं। पुलिस इस एंगल से भी जांच कर रही है।

30 से 35 लोगों के शामिल होने की चर्चा

सूत्रों के अनुसार, वारदात में लगभग 30 से 35 बदमाश शामिल हो सकते हैं। हालांकि पुरातत्व विभाग के अधिकारियों ने इस संख्या की पुष्टि नहीं की है। पुलिस का कहना है कि जांच पूरी होने के बाद ही किसी निष्कर्ष पर पहुंचा जाएगा।

सुरक्षा कर्मियों को धमकाने का दावा

नरवर किले के ओपन कचहरी परिसर में कुल 14 ऐतिहासिक तोपें रखी थीं, जिनमें से अब केवल 13 तोपें बची हैं। बताया जा रहा है कि बदमाशों ने हथियारों के बल पर सुरक्षा कर्मियों को धमकाया और विरोध करने पर जान से मारने की धमकी दी। हालांकि पुलिस ने इस दावे की भी आधिकारिक पुष्टि नहीं की है।

पहले से हो रही थी रेकी?

स्थानीय लोगों के अनुसार, घटना से पहले कई दिनों तक किले के आसपास संदिग्ध गतिविधियां देखी गई थीं। आशंका है कि अपराधियों ने वारदात से पहले पूरे इलाके की बारीकी से रेकी की और सुरक्षा व्यवस्था का अध्ययन करने के बाद चोरी को अंजाम दिया।

पुलिस ने शुरू की व्यापक जांच

घटना के बाद पुलिस ने अज्ञात आरोपियों के खिलाफ मामला दर्ज कर लिया है। किले के आसपास और आने-जाने वाले सभी मार्गों के सीसीटीवी फुटेज खंगाले जा रहे हैं। पुलिस की विशेष टीमें संभावित रूटों पर जांच और नाकाबंदी कर रही हैं।

शिवपुरी पुलिस अधीक्षक यांगचेन डोलकर भूटिया ने कहा,

“यह बेहद गंभीर और संवेदनशील मामला है। पुलिस की विशेष टीमें जांच में जुटी हुई हैं। किले की ओर आने-जाने वाले सभी रास्तों पर निगरानी बढ़ा दी गई है और सीसीटीवी फुटेज की गहन जांच की जा रही है।”

पुरातत्व विभाग ने जताई चिंता

पुरातत्व विभाग के डिप्टी डायरेक्टर तरुण कुमार महोबिया ने कहा,

“इतिहास से जुड़ी इस महत्वपूर्ण धरोहर का गायब होना देश की सांस्कृतिक विरासत के लिए बड़ा नुकसान है।”

उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि वारदात में 30 से 35 लोगों के शामिल होने की जानकारी की अभी पुष्टि नहीं हुई है।

देश की धरोहरों की सुरक्षा पर बड़ा सवाल

इतनी भारी ऐतिहासिक तोप का एक संरक्षित किले से चोरी हो जाना सुरक्षा व्यवस्था पर गंभीर प्रश्नचिह्न लगाता है। आखिर इतनी बड़ी धरोहर को बिना किसी की नजर में आए कैसे हटाया गया? क्या सुरक्षा व्यवस्था में लापरवाही हुई या फिर यह किसी संगठित तस्कर गिरोह की महीनों की योजना थी? इन सभी सवालों के जवाब अब पुलिस जांच के बाद ही सामने आएंगे।

फिलहाल पूरे मामले ने प्रशासन, पुरातत्व विभाग और सुरक्षा एजेंसियों की कार्यप्रणाली पर बहस छेड़ दी है। सभी की निगाहें अब इस बात पर टिकी हैं कि देश की इस ऐतिहासिक धरोहर को कब और कैसे बरामद किया जाता है।

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