भोपाल। मध्यप्रदेश की नगरीय विकास एवं आवास राज्यमंत्री प्रतिमा बागरी को उनके अनुसूचित जाति (एससी) प्रमाण पत्र को लेकर चल रहे विवाद में बड़ी राहत मिली है। राज्य स्तरीय अनुसूचित जाति छानबीन समिति ने विस्तृत जांच और दस्तावेजों के परीक्षण के बाद उनके जाति प्रमाण पत्र को वैध घोषित करते हुए शिकायत को खारिज कर दिया है।
दस्तावेजों और राजस्व रिकॉर्ड की हुई जांच
समिति ने जांच के दौरान मंत्री प्रतिमा बागरी द्वारा प्रस्तुत दस्तावेजों का गहन परीक्षण किया। जांच में उनके पिता और दादा के राजस्व अभिलेखों में भी बागरी (अनुसूचित जाति) दर्ज होने के प्रमाण मिले। इसके अलावा संबंधित जिले के कलेक्टर, पुलिस अधीक्षक और तहसीलदार से रिपोर्ट मंगाई गई, जिनमें भी उनकी जाति अनुसूचित जाति श्रेणी की पाई गई।
2018 में जारी हुआ था स्थायी जाति प्रमाण पत्र
प्रतिमा बागरी को वर्ष 2018 में सतना जिले की नागौद तहसील से स्थायी अनुसूचित जाति प्रमाण पत्र जारी किया गया था। राज्य स्तरीय समिति ने उपलब्ध अभिलेखों, राजस्व रिकॉर्ड और अन्य दस्तावेजों का परीक्षण करने के बाद इस प्रमाण पत्र को विधिसम्मत और वैध माना।
TRI रिपोर्ट में भी मिले समर्थन के आधार
जांच के दौरान जनजातीय अनुसंधान संस्थान (TRI) की रिपोर्ट का भी अध्ययन किया गया। रिपोर्ट में बागरी समुदाय की सामाजिक स्थिति, ऐतिहासिक पृष्ठभूमि और अन्य जातियों के साथ उसके सामाजिक संबंधों का विश्लेषण किया गया। समिति ने पाया कि सतना जिले में बागरी समुदाय को राजपूत या ठाकुर वर्ग से जोड़ने के पर्याप्त प्रमाण उपलब्ध नहीं हैं।
इसके अतिरिक्त समिति ने विभिन्न वर्षों की गजट अधिसूचनाओं का भी परीक्षण किया, जिसमें यह पाया गया कि 1976 के बाद बागरी जाति पूरे मध्यप्रदेश में अनुसूचित जाति की सूची में शामिल है।
कांग्रेस नेता ने दर्ज कराई थी शिकायत
यह विवाद तब शुरू हुआ था जब 31 मार्च 2025 को कांग्रेस अनुसूचित जाति विभाग के प्रदेश अध्यक्ष प्रदीप अहिरवार ने शिकायत दर्ज कर आरोप लगाया था कि मंत्री प्रतिमा बागरी ने गलत दस्तावेजों के आधार पर अनुसूचित जाति प्रमाण पत्र प्राप्त किया है।
जांच में देरी होने पर मामला जबलपुर हाईकोर्ट पहुंचा। अदालत ने अप्रैल 2026 में राज्य स्तरीय अनुसूचित जाति छानबीन समिति को 60 दिनों के भीतर मामले का निर्णय करने का निर्देश दिया था।
शिकायत खारिज, प्रमाण पत्र वैध घोषित
दोनों पक्षों की सुनवाई, राजस्व रिकॉर्ड, सरकारी रिपोर्ट, गजट अधिसूचनाओं और TRI रिपोर्ट सहित सभी उपलब्ध साक्ष्यों की समीक्षा के बाद समिति इस निष्कर्ष पर पहुंची कि शिकायतकर्ता मंत्री के परिवार को राजपूत/ठाकुर बागरी सिद्ध करने के पर्याप्त प्रमाण प्रस्तुत नहीं कर सके।
इन सभी तथ्यों के आधार पर राज्य स्तरीय अनुसूचित जाति छानबीन समिति ने प्रतिमा बागरी के अनुसूचित जाति प्रमाण पत्र को वैध घोषित करते हुए शिकायत को खारिज कर दिया।

